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चिकनी मैडम की चिकनी गांड

मेरा नाम प्रांजल है मैं मुंबई का रहने वाला एक बहुत ही खुले विचारों का लड़का हूं। मैं जिस कॉलेज में पढ़ता हूं उस कॉलेज में मेरे जितने भी क्लासमेंट है उनमें से आधी लड़कियां तो मेरे पीछे पड़ी है लेकिन मैं उन्हें ज्यादा भाव नहीं देता। मैं आज तक कभी भी किसी लड़की के लिए सीरियस नहीं हुआ हूं। स्कूल के समय मेरी काफी गर्लफ्रेंड थी और उसी की वजह से शायद मैं कभी पढ़ नहीं पाया। मैं पढ़ाई में अच्छा नहीं था लेकिन मैंने जैसे कैसे अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी कर ली और उसके बाद मैं कॉलेज में आ गया। मुझे फुटबॉल खेलने का बड़ा शौक है और मैं बचपन से फुटबॉल खेलता हुआ आ रहा हूं। यह शौक मैंने अब भी जारी रखा है। मुझे इसका फायदा उस वक्त मिला जब हमारे कॉलेज में फुटबॉल की प्रतियोगिता हो रही थी और हमारे कॉलेज में दूसरे कॉलेजों के भी बच्चे खेलने के लिए आने वाले थे। हमारे कॉलेज में फुटबॉल टीम का सिलेक्शन होने वाला था और उसके लिए काफी लड़के प्रैक्टिस कर रहे थे।

मैं भी जब अपने स्पोर्ट्स टीचर से मिला तो उन्होंने मुझे कहा कि क्या तुम भी फुटबॉल खेल सकते हो। मैंने उन्हें कहा सर मैं बचपन से ही फुटबॉल खेल रहा हूं और मैं फुटबॉल काफी अच्छा खेल लेता हूं। वह कहने लगे ठीक है हम लोग अभी टीम सेलेक्ट कर रहे हैं यदि तुम अच्छा खेलोगे तो तुम्हारा भी सिलेक्शन हो जाएगा। मैंने उनसे पूछा सर मुझे कब आना है। वह कहने लगे कि कल से ही फुटबॉल टीम का सिलेक्शन होगा तुम कल आ सकते हो।  अगले दिन से फुटबॉल टीम का सिलेक्शन होना शुरू हो गया। काफी सारे बच्चे आए हुए थे लेकिन उनमें से कइयों का सिलेक्शन नहीं हुआ। मेरा फुटबॉल टीम में सिलेक्शन हो गया उस दिन मुझे मेरे स्पोर्ट्स के टीचर कहने लगे बेटा तुम तो बहुत ही अच्छा फुटबॉल खेल लेते हो। मैंने उन्हें कहा सर मैं आपसे कह रहा था कि मैं बचपन से ही फुटबॉल खेलता हुआ आया हूं।

वह मेरे फुटबॉल खेलने से इतना खुश हुए कि वह कहने लगे मैं तुम्हें ही फुटबॉल टीम का कैप्टन बनाऊंगा। मैंने उन्हें कहा सर मुझे इतनी जिम्मेदारी मत दीजिए। कॉलेज में और भी सीनियर बच्चे हैं आप उन्हें फुटबॉल टीम का कैप्टन बना दीजिए। वह कहने लगे कि नहीं तुम मुझे बड़े एक्टिव प्रतीत हो रहे हो और यदि हमारे कॉलेज की टीम को जीतना है तो मुझे एक अच्छा प्लेयर चाहिए जो कि एक अच्छा कप्तान भी हो। वह मेरे गेम पर बहुत ही ध्यान देने लगे और उन्होंने मेरे गेम को और भी सुधार दिया। अब हमारे कॉलेज में बाहर से बच्चे खेलने के लिए आए। उस वक्त हमारे कॉलेज का माहौल बिल्कुल ही बदला हुआ था। हमारे कॉलेज में इतनी ज्यादा भीड़ हो गई कि वहां पर सारे नए बच्चे दिखाई देने लगे। मैं भी कॉलेज आकर बहुत खुश हो रहा था और जिस दिन हमारा मैच था उस दिन हमारे कॉलेज के लगभग सारे बच्चे आए हुए थे। जिस कॉलेज के साथ हमारा मैच था उस कॉलेज के बच्चे भी बहुत अच्छा फुटबॉल खेलते हैं। मुझे यब बात जब मेरे स्पोर्ट्स टीचर ने बताई तो वह कहने लगे कि तुम्हें पूरे ध्यान से खेलना है और अपनी पूरी मेहनत लगानी है। मैंने सर से कहा हम लोग अपना पूरा सौ प्रतिशत देंगे। उस दिन मैच बड़ा ही टक्कर दर हुआ। किसी की टीम से भी गोल नहीं लग रहा था। हम लोगों ने भी बड़ी जद्दोजहद की लेकिन हमारी टीम से भी कोई गोल नहीं लगा और आखिरी वक्त में दूसरे कॉलेज की टीम ने हमारे ऊपर एक गोल कर दिया। जब हमारे ऊपर गोल हुआ तो हमारे ऊपर बहुत प्रेशर बन चुका था। हमारे पास काफी कम समय बचा था और उस कम समय में हमें कम से कम एक गोल तो मारना ही था जिससे कि हमारा मैच ड्रॉ हो सके। हमारी टीम के सभी लड़के बहुत मेहनत कर रहे थे लेकिन किसी से भी गोल नहीं लगा। उन लोगों ने बहुत प्रयास किया। आखरी में मेरे पास फुटबॉल आई तो मैंने एक जोरदार किक मार दी जो की गोलकीपर को भेदते हुए गोल पोस्ट के अंदर बॉल चली गई। जैसे ही गोलपोस्ट के अंदर फुटबॉल गई तो हमारे कॉलेज के और बच्चे सिटी मारने लगे और हमारे कॉलेज में पूरा शोर होने लगा। उस दिन तो जैसे मैं कॉलेज का हीरो ही बन गया था और सब लोग मुझे कंधे पर उठाने लग गए। मैं दिल में सोच रहा था कि कौन सा हम लोग आज मैच जीत गए हैं जो यह लोग मुझे अपना हीरो बना बैठे हैं। पर मेरे लिए भी यह खुशी की बात थी कि हमारी टीम ने कम से कम मैच ड्रॉ करवा दिया था।

मेरे स्पोर्ट्स के टीचर तो मुझसे पहले से ही बहुत खुश थे और वह अब और भी अधिक खुश होने लगे। वह कहने लगे कि चलो तुमने हमारी इज्जत बचा ली नहीं तो आज हम पर एक कलंक लग चुका होता और शायद हम यह मैच हार जाते। हमारा मैच तीन-चार दिनों बाद था और उसी बीच मैं भी कॉलेज में प्रैक्टिस करने के लिए हमेशा आता था। मैं अपनी प्रैक्टिस पर पूरा ध्यान देता और मेरे साथ के जितने भी हमारी टीम में थे मैं उन्हें भी समझाता हूं और हमारे स्पोर्ट्स टीचर भी हमें नए नए टिप्स बताते कि तुम्हें ऐसे खेलना चाहिए और तुम्हारे अंदर यह कमियां हैं। हम लोग उसे दूर करने की कोशिश करते हैं और अपने गेम पर पूरा फोकस करने लगे थे। मैं जब खेल कर लौट रहा था तो मैं काफी पसीना पसीना हो रखा था। जब मैं अपने ग्राउंड से बाहर निकला तो मेरे सामने से एक टीचर गुजर रही थी। मैं उन्हें देखकर बहुत खुश होने लगा क्योंकि उन्होंने जो साड़ी पहनी हुई थी उसमे उनके हिप्स और उनके स्तन बाहर की तरह दिखाई दे रहे थे। वह भी मुझे देख कर खुश होने लगी। उन्होंने मुझे आवाज़ देते हुए रोक लिया उन्होंने मुझे अपना इंट्रोडक्शन दिया और कहा मेरा नाम रोहनी है।

वह मुझे कहने लगी तुमने बहुत अच्छा खेला जब उन्होंने यह बात कही तो मैंने उन्हें थैंक्यू कहा और उनसे पूछा आप कौनसे कॉलेज से हैं। उन्होंने अपने कॉलेज का नाम बताया लेकिन उनके चेहरे के हाव भाव मझे कुछ ठीक नहीं लग रहे थे। मैं उनकी आंखों के इशारे समझ चुका था। मैंने उन्हें सीधा ही कह दिया कि मुझे आपके साथ रोमांस करना है। जब मैंने यह बात कही तो वह भी अपने आपको ना रोक सकी और कहने लगी लेकिन हम लोग कहां जाएंगे। मैंने उसे कहा मैडम यह मेरा कॉलेज है मुझे यहां पर सब कुछ पता है आप चिंता ना करें। मैं उन्हें अपने कॉलेज के पुराने हॉल में ले गया वहां पर कोई भी नहीं आता था। वह एक तरीके से बंद ही पड़ा हुआ था। मुझे उसके पीछे का रास्ता पता था। मै उन्हें वहां से अंदर लेकर चला गया जैसे ही हम लोग अंदर पहुंचे तो मैंने उनके बदन को कसकर पकड़ लिया और उन्हें किस करने लगा। वह भी मुझे बड़े जोरदार तरीके से किस कर रही थी। उन्होंने मेरे होठों से खून भी निकाल दिया था। वह जब मुझे किस करने लगी तो मुझे बहुत मजा आ रहा था मैंने काफी देर तक उनके साथ स्मूच किया। जब मैंने उनके कपड़े उतारे तो उन्होंने मेरे कपड़े गर्मजोशी मे उतारे। वह मेरे लंड को अपने हाथ से हिला रही थी कुछ समय बाद उन्होने अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को ले लिया। उन्होंने मेरे लंड को इतने अच्छे से चूसा मेरे अंदर से गर्मी बाहर निकलने लगी। मैंने कुछ देर बाद उनकी योनि के अंदर उंगली को डाल दिया और अंदर बाहर करना शुरू किया। जैसे ही मेरी उंगली उनकी योनि के अंदर होती तो उनका तरल पदार्थ बाहर की तरफ निकल जाता। मैंने उन्हें घोडी बनाते हुए उनकी चूत के अंदर अपने लंड को डाल दिया। मेरा लंड उनकी चूत के अंदर गया तो वह अपने मुंह से सिसकियां ले रही थी। वह जिस प्रकार से अपने मुंह से सिसकियां लेती मेरे अंदर से और भी ज्यादा गर्मी निकल जाती। मैं उनके साथ ज्यादा समय तक संभोग नहीं कर पाया लेकिन जितने भी देर मैंने उन्हें चोदा मुझे बहुत मजा आया। मैंने लगभग उन्हें 200 शॉट मारे होंगे। मैने उनकी गांड को पकड़ा हुआ था। उनकी गांड को देखकर मेरे अंदर से सेक्स की भावना और जागने लगी। मैंने अपने लंड को दोबारा खड़ा करते हुए उनकी गांड के अंदर प्रवेश करवा दिया। जैसे ही मेरा लंड उनकी मोटी गांड के अंदर घुसा तो वह चिल्लाने लगे और दीवार के सहारे अपने आपको खड़ा करने की कोशिश करने लगी। मैंने उन्हें इतनी तेजी से धक्के दिए कि उनका शरीर गर्म हो जाता। उनकी चूतडो का रंग पूरा लाल हो जाता लेकिन उन्होंने भी हार नहीं मानी और मै भी हार मानने को तैयार नहीं था। मुझे उनकी गांड मारने में जो आनंद आ रहा था वह उनकी चूत मारने में नहीं आया। जब मेरा वीर्य पतन होने वाला था तो मैंने उनकी बड़ी गांड में अपने वीर्य को गिराया।

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