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मुझे भी चोदो ना

मैं प्राइवेट स्कूल में टीचर हूं मैं प्राइवेट स्कूल में काफी समय से नौकरी कर रहा हूं लेकिन मुझे हमेशा यही लगता है कि मैंने अपने इतने साल एक ही स्कूल को दिया लेकिन वेतन में हमें कभी इतनी ज्यादा वृद्धि नहीं हुई,

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दिन-ब-दिन खर्च बढ़ते जा रहे थे जिस वजह से मुझे भी बहुत परेशानी होती और मैं हमेशा ही सोचता कि मैं इतने पैसों में अपना घर कैसे चला पाऊंगा मेरे बच्चे भी अब बड़े होने लगे थे और उनके खर्चे भी दिन ब दिन बढ़ते जा रहे थे लेकिन मेरी एक नौकरी में शायद उनके लिए मुझे सब कुछ कर पाना बहुत ही मुश्किल था इसलिए मैंने घर में ट्यूशन पढ़ाना भी शुरू कर दिया, मैं घर में ट्यूशन पढ़ाने भी लगा उससे थोड़े बहुत पैसे आ जाते जिससे कि मुझे थोड़ी बहुत राहत मिल जाती लेकिन मेरे लिए अब इतने पैसे का शायद कोई मोल नहीं था मुझे और भी पैसे चाहिए थे मैं जितना भी कमाता हूं वह सब मेरे ऐसे ही चले जाते लेकिन मुझे भी अब कुछ करना ही था जिससे कि मेरी सारी मुसीबत दूर हो जाये लेकिन मुझे ऐसा कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए, तब मुझे मेरे एक दोस्त की पत्नी ने कहा कि भैया आप मेरे कोचिंग सेंटर में पड़ा लिया कीजिए।

मेरे दोस्त का नाम दीपक है और उसकी पत्नी का नाम कल्पना है उन लोगों का कोचिंग सेंटर है और मैंने अपनी स्थिति के बारे में उन्हें सब कुछ बता दिया था और मैंने उन्हें कहा की मुझे आपके कोचिंग सेंटर में पढ़ाने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन मैं जिस जगह पढ़ाता हूं वहां पर मेरी तनख्वाह बहुत कम है और मैं शायद अब इतना कम पैसों में काम नहीं करना चाहता हूं और मैं वह नौकरी भी नहीं छोड़ सकता,  उन्होंने मुझे कहा कि हम आपको उसके बदले अच्छे पैसे दे देंगे आप उसकी बिल्कुल भी चिंता ना करें। मुझे भी अब थोड़ी बहुत मदद मिल चुकी थी और मैं कोचिंग सेंटर में पढ़ाने लगा उन्हें मुझ पर पूरा भरोसा था और इसी वजह से उन्होंने मुझे रखा भी था, उनके कोचिंग सेंटर में ज्यादा बच्चे नहीं आते थे लेकिन जब से मैंने वहां पढ़ाना शुरू किया तो वहां पर बच्चों की संख्या भी बढ़ने लगी और इस बात से दीपक और कल्पना भी खुश है उनके कोचिंग सेंटर को करीब 5 वर्ष होने वाले थे लेकिन इससे पहले जो टीचर वहां पर पढ़ाते थे उन्होंने सब को वहां से हटा दिया था और अब पूरा ही नया स्टाफ रख दिया था हम लोग बड़े अच्छे तरीके से मेहनत करते हैं, कोचिंग सेंटर भी अब अच्छा चलने लगा वहां पर काफी भीड़ भी होने लगी और नए नए बच्चे भी आने लगे जिससे कि दीपक और कल्पना भी बहुत खुश थे।

एक दिन दीपक ने मुझे अपने घर पर बुलाया और कहा देखो सोहन मैं चाहता हूं कि तुम अब हमारे साथ ही जुड़ कर काम करो तुम्हें तो मालूम है कि मेरे पास समय होता नहीं है और मेरे पास पैसों की कोई कमी नहीं है मैंने तो यह कल्पना की वजह से खोला था क्योंकि कल्पना को बच्चों को पढ़ाने का बड़ा शौक था वह पहले स्कूल में पढ़ाती थी मैंने तो सिर्फ उसके शौक के चलते ही कोचिंग सेंटर खोल दिया था मैंने कभी भी उस में कोई प्रॉफिट मिलने की उम्मीद नहीं की थी लेकिन जब मुझे उसमें नुकसान होने लगा तो उसके बावजूद भी मैं उसे चला रहा था परंतु जब से तुमने वहां पर काम करना शुरू किया है और काम को संभाला है तो बच्चे भी काफी बढ़ने लगे हैं और मैं यह सोच रहा हूं कि दूसरी जगह पर हम अपना दूसरा कोचिंग सेंटर खोल दें, मैंने दीपक से कहा लेकिन हमें अभी इतनी जल्दी बाजी नहीं करनी चाहिए हमें थोड़ा और समय रुकना चाहिए दीपक कहने लगा देखो सोहन मुझे तो इन सब चीजों के बारे में ज्यादा पता नहीं है लेकिन तुम इतने सालों से बच्चों को पढ़ा रहे हो तुम बच्चों को बहुत अच्छे तरीके से पढ़ाते भी हो इसलिए यह सब तुम्हें पता है कि कैसे करना है तुम ही अब सारा काम संभालोगे मैंने दीपक से कहा तुम मुझ पर पूरा भरोसा कर सकते हो, दीपक मुझे कहने लगा मैं तुम्हें बचपन से जानता हूं तुम बड़े ईमानदार हो और तुम्हारी ईमानदारी की वजह से ही तो मैंने कल्पना से कहा था कि वह एक बार तुमसे बात करें और जब कल्पना ने तुम से बात की तो तुमने भी कल्पना के सामने अपने काम को लेकर सारी बात रख दी जिससे की कल्पना भी बहुत खुश थी और उस दिन मुझे कल्पना ने कह दिया था की सोहन भैया बड़े ईमानदार है और वह बहुत अच्छे भी हैं।

उसे तुम पर पूरा भरोसा था और अब जब बच्चों की संख्या भी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है तो मैं भी तुम्हारे काम से बहुत खुश हूं, मैंने दीपक से कहा तो फिर हम लोग कुछ समय बाद ही दूसरे कोचिंग सेंटर के बारे में सोचते हैं। दीपक के पास भी ज्यादा समय नहीं होता क्योंकि उसका अपना प्रॉपर्टी का काम है और वह बहुत बड़ा बिल्डर भी है इसी वजह से वह हर जगह समय नहीं दे पाता, कुछ ही समय बाद दूसरा कोचिंग सेंटर भी खोलने की तैयारी हो गई थी दीपक ने मुझे ही सारी जिम्मेदारी दी थी और हम लोगों ने जो जगह देखी थी वह जगह कुछ समय बाद दीपक ने खरीद लिया और वहां पर काम करवाना शुरू कर दिया। काम भी पूरी तरीके से हो चुका था और जिस दिन कोचिंग सेंटर की ओपनिंग थी उस दिन दीपक ने पार्टी भी रखी थी और उसके बाद वहां पर स्टाफ भी रख दिया कुछ समय बाद वह कोचिंग सेंटर भी अच्छे से चलने लगा मेरे ऊपर ही सारी जिम्मेदारी थी और मैं पूरी मेहनत के साथ काम किया करता, दीपक ने मुझे कभी पैसे की कमी महसूस नहीं होने दी मुझे जब भी पैसों की आवश्यकता होती तो मैं दीपक से कह दिया करता।

कल्पना भी अपना पूरा समय कोचिंग सेंटर में दिया करती थी और उसे यदि कोई भी डिसीजन लेना होता तो वह सबसे पहले मुझसे ही पूछा करती क्योंकि वह मुझ पर बहुत ज्यादा भरोसा करती थी। बच्चे भी काफी बढ़ चुके थे और मेरी भी सारी समस्या लगभग खत्म ही हो चुकी थी मैं बहुत ज्यादा खुश था क्योंकि मैंने इतने साल जिस प्राइवेट स्कूल में पढ़ाया है वहां पर ना तो मुझे ज्यादा पैसा मिला और ना ही मुझे वह सम्मान मिल पाया जिसके बारे में मैं हमेशा सोचा करता कि मुझे स्कूल में मिलेगा लेकिन कभी भी मेरे स्कूल ने मुझे वह सम्मान नहीं दिया, जब मैं बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था उससे भी ज्यादा पैसे मुझे मिल नहीं पाते थे। मेरी पत्नी के चेहरे पर अब मुस्कुराहट देखकर मैं खुश हो जाता हूं और सोचता हूं कि यदि दीपक और  कल्पना मुझे पहले मिल जाते तो शायद मेरी स्थिति कुछ और ही होती लेकिन जब मैं यह सोचता हूं कि चलो जो होना था वह तो हो चुका है पर अभी समय निकला नहीं है और अब भी मैं आगे मेहनत कर सकता हूं इसलिए मैं पूरी मेहनत के साथ काम करता जिससे कि दीपक और कल्पना भी खुश थे और मैं भी खुश था। दीपक के घर में जब भी कोई प्रोग्राम या कोई जरूरी काम होता तो वह मुझे बुलाना कभी नहीं भूलता था दीपक की दोस्ती मुझसे बचपन से हैं लेकिन मैंने दीपक से कभी भी मदद नहीं मांगी थी परंतु जब से मैंने दीपक और कल्पना के साथ काम करना शुरू किया है तब से वह मेरी मदद कर दिया करते हैं और मुझे भी उनसे बोलने में कोई दिक्कत नहीं होती क्योंकि मैं उनके साथ ही काम करता हूं और अपना पूरा सौ प्रतिशत काम को देता हूं। कल्पना और मेरे बीच में अब अच्छे रिश्ते बन चुके थे वह मुझे हमेशा ही कहती आप बडे समझदार है। एक दिन हम दोनों साथ में बैठे हुए थे और बात कर रहे थे तभी  दीपक भी आ गया, हम तीनों बैठकर बात करने के लिए कुछ देर तक हम तीनों बैठकर बात करते रहे लेकिन  दीपक कुछ ही समय बाद कहने लगा मुझे किसी काम से कहीं जाना है और वह चला गया। कल्पना मुझसे कहने लगी दीपक मुझे बिल्कुल भी समय नहीं दे पाते हैं। मैं और कल्पना साथ में बैठे हुए थे मैंने कल्पना से कहा देखो एक समय पर एक ही चीज मिल सकती है या तो पैसा ही मिल सकता है या फिर तुम्हें प्यार मिल सकता है।

कल्पना मुझसे कहने लगी क्या तुम भी अपनी पत्नी को प्यार देता हो। मैंने कल्पना को कहा मैं तो बहुत टेंशन में रहता था इसलिए अपनी पत्नी के साथ समय नहीं बिता पाता था। अब मै अपनी पत्नी के साथ समय बिताता हूं अब हम दोनों के बीच सब कुछ ठीक चल रहा है। कल्पना मेरी बातों से शायद कुछ ज्यादा ही इंप्रेस हो गई थी वह मेरे पास आकर बैठ गई और मेरी बाहों में आने की कोशिश करने लगी। मैंने कल्पना को अपनी बाहों में ले लिया पहले तो मुझे यह सब ठीक नहीं लगा लेकिन जब मैंने उसके गदराए हुए बदन को अपने शरीर से महसूस करने की कोशिश की तो मुझे उसके साथ सेक्स करने की इच्छा होने लगी। जैसे ही मैंने उसके बदन से सारे कपड़े उतार कर एक किनारे में रख दिए तो उसने भी मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर हिलाना शुरू किया उसे बहुत अच्छा लगा मुझे भी बहुत मजा आने लगा।

उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग करना शुरू किया तो कुछ समय बाद मेरे लंड ने पानी छोडना शुरू किया। वह मेरे लंड को अपनी चूत मे लेने लगी, वह बहुत ज्यादा खुश थी वह मुझे कहने लगी तुम्हारे साथ सेक्स करने में बड़ा आनंद आ रहा है ना जाने दीपक के साथ कितने समय से मैने सेक्स नहीं किया है। मुझे भी कल्पना की मोटी गांड को अपने हाथों में पकड़ कर मजा आ रहा था, कल्पना कहने लगी और तेज चोदो। कुछ देर बाद कल्पना की योनि के अंदर माल गिर गया जैसे ही मेरा वीर्य योनि में गिरा तो उस दिन के बाद वह मुझसे ही सेक्स की डिमांड करने लगी। मेरा भी मन नहीं भरता उसके गदराए बदन को मुझे चोदने मे हमेशा मजा आता। मैं अब भी उसके साथ सेक्स करता हूं वह मेरे साथ सेक्स कर के बहुत खुश रहती है। दीपक उसकी हर एक बात को मानता है और वह मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए हमेशा तैयार रहती है।

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इस प्रकार से मेरा जीवन भी अच्छा चल रहा है और मैं पहले से बहुत ज्यादा खुश हूं क्योंकि मुझे अब कुछ भी कमी नहीं है।

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