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भाभी ने अपनी नशीली आंखों से मुझे अपने प्यार में फसाया

मेरा नाम संजय है मैं दिल्ली में एक टूरिस्ट गाइड हूं और मैं काफी सालों से यह काम कर रहा हूं। मेरी उम्र 35 वर्ष है और मेरी शादी को भी 7 वर्ष हो चुके हैं, मेरा शादीशुदा जीवन भी अच्छा चल रहा है। एक दिन मुझे एक व्यक्ति का फोन आया और वह कहने लगा कि क्या आप संजय बोल रहे हैं, मैंने उन्हें कहा हां मैं संजय बोल रहा हूं, वह कहने लगे मैं अंकित बोल रहा हूं, मैं अमदाबाद का रहने वाला हूं। मैंने अंकित से कहा कि हां जी बोलिये आपको मेरा नंबर किसने दिया, वह कहने लगे मुझे आपका नंबर मेरे एक मित्र ने दिया है और उन्होंने ही मुझे कहा कि हम लोग आपसे संपर्क कर लें। वह मुझे कहने लगे कि हम लोग कुछ दिनों के लिए उत्तर भारत के दौरे पर हैं तो क्या आप हमें पूरे उत्तर भारत की सैर करवा देंगे, मैंने उन्हें कहा सर बिल्कुल आप चिंता मत कीजिए मैं आपको अपनी प्रोफाइल भी भेज देता हूं और आप उसमें देख लीजिएगा। वह कहने लगे नहीं उसकी आवश्यकता नहीं है क्योंकि मुझे मेरे मित्र ने आपके बारे में बता दिया था और मैं उस चीज से बिल्कुल ही निश्चिंत हूं।

मैंने उनसे पूछा कि आप कितने लोग हो,  वह कहने लगे हम लोग दो फैमिली हैं और मेरे मम्मी पापा भी साथ में हैं। मैंने उनसे पूछा आप टोटल लोग कितने है, वह कहने लगे हम लोग टोटल 10 हैं, मैंने उन्हें कहा कोई बात नहीं सर मैं आपको दिल्ली एयरपोर्ट से रिसीव कर लूंगा। जब कुछ दिनों बाद वह लोग दिल्ली एयरपोर्ट पर आ गए तो मैं उन्हें रिसीव करने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पर चला गया, मैंने उन्हें रिसीव किया। उन्होंने अपना होटल एयरपोर्ट के पास ही लिया हुआ था जब वह लोग मुझसे मिले तो अंकित जी ने मुझे सब लोगों से परिचय करवा दिया, जब मेरा उन सब से परिचय हो गया तो अंकित जी मुझसे कहने लगे मेरे मित्र आपकी बड़ी तारीफ कर रहे थे इसीलिए मैंने आपको फोन किया क्योंकि मैं ज्यादा उत्तर भारत नहीं घुमा हूं। मैंने अंकित जी से कहा सर आप बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए, मैं आपको अच्छे से घुमा दूंगा, आप चिंता मत कीजिए।

मैं अब उनके होटल में चला गया और अंकित जी ने मुझे कहा कि हम लोग 10 दिन के टूर पर हैं, अब आप पूरा प्लान बना लीजिए, उस हिसाब से हम लोग घूमने के लिए चल पड़ेंगे। मैंने उन्हें कहा सर हम लोग कल दिल्ली से आगरा के लिए निकल पड़ेंगे, वह कहने लगे ठीक है हम लोग किस समय आगरा के लिए निकले, मैंने उनसे कहा सर हम सुबह ही निकल जाए तो ज्यादा अच्छा रहेगा। वह कहने लगे ठीक है आज आप चले जाइए, कल आप सुबह ही हमें मिल लीजिएगा मैंने कहा ठीक है आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए, मैं सुबह ही जल्दी आपके पास आ जाऊंगा। उन्होंने मुझे कुछ पैसे एडवांस भी दे दिए और मैं अब घर आ गया। जब मैं घर पहुंचा तो मेरी पत्नी मुझसे कहने लगी क्या आप कल कहीं जा रहे हैं, मैंने अपनी पत्नी से पूछा तुम्हें कैसे पता चला वह कहने लगी जब आप फोन पर बात कर रहे थे तो मैंने सब कुछ सुन लिया था और आपने अपना सामान भी पैक कर लिया है। मैंने उसे बताया हां मैं कुछ दिनों के लिए बाहर जा रहा हूं क्योंकि कोई टूरिस्ट आए हुए हैं और उन्हें लेकर ही मुझे टूर पर जाना है। मेरी पत्नी कहने लगी ठीक है आप कब तक लौटेंगे, मैंने उसे बताया कि मैं 10 दिन बाद ही लौटूंगा। मेरी पत्नी मुझसे बहुत प्रेम करती है और वह कहने लगी 10 दिन मैं आपके बिना कैसे रहूंगी,  मैंने उसे कहा कि काम भी जरूरी है यदि मैं कुछ करूँगा नहीं तो घर का खर्चा कैसे चलेगा। वह कहने लगी यह तो आप सही बात कह रहे हैं लेकिन मैंने भी सोचा था कि इस बीच हम लोग कहीं घूमने चलते हैं या फिर मेरे माईके चलते हैं, मेरी मम्मी भी काफी समय से मुझे बुला रही है लेकिन मैं भी वहां नहीं जा पाई। मैंने अपनी पत्नी से कहा तुम एक काम करना कल तुम अपने मायके चले जाना,  मैं वैसे भी 10 दिनों बाद ही लौट आऊंगा तो तुम घर पर भी क्या करोगी। वह कहने लगी कि ठीक है मैं देख लेती हूं यदि मेरा मन हुआ तो मैं चली जाऊंगी, मैंने उसे कहा यदि मैं तुम्हे सुबह तुम्हारे घर छोड़ दूं तो कैसा रहेगा, वह कहने लगी ठीक है आप सुबह ही मुझे मेरे घर छोड़ दीजिएगा।

अगले दिन मैंने सुबह सुबह ही अपनी पत्नी को उसके घर छोड़ दिया। उसका घर भी मेरे घर से कुछ दूरी पर ही है लेकिन उसके बावजूद भी हम लोग कभी भी नहीं जा पाते, मेरी बच्ची की उम्र 3 वर्ष है। मैंने अपनी पत्नी से कहा मुझे लेट हो रही है मैं भी निकलता हूं क्योंकि मुझे अंकित जी को भी रिसीव करना है, मैं सीधा वहां से होटल चला गया और जब मैं होटल पहुंचा तो वह लोग भी तैयार होकर बैठे थे, उन्होंने दो कार बुक की हुई थी। मैं अंकित के साथ ही बैठा हुआ था और अपने एक्सपीरियंस को उनके साथ शेयर कर रहा था, वह भी बड़े खुले तरीके से बात कर रहे थे और हम दोनों ही काफी सारी चीजे एक दूसरे से शेयर कर रहे थे। मुझे भी उनके साथ अच्छा लग रहा था, वह बड़े ही बिंदास किस्म के व्यक्ति हैं, मैंने उन्हें कहा सर आप तो बड़े ही बिंदास किस्म के व्यक्ति हैं। वह कहने लगे मेरा नेचर ही ऐसा है। वह कहने लगे मेरे दोस्त तुम्हारी बड़ी तारीफ करते हैं और वह कहते हैं कि हम जब संजय के साथ घूमने के लिए गए तो संजय ने हमें कहीं पर भी कोई दिक्कत नहीं होने दी, मैंने अंकित से कहा सर यह तो उनका बड़प्पन है जो वह मेरी इतनी तारीफ कर रहे हैं। जब मैं और अंकित जी साथ में बैठे हुए थे तो उनकी पत्नी भी मुझे बड़े ध्यान से देख रही थी। उनकी पत्नी की नशीली आंखों को देख कर मुझे ऐसा लग रहा था जैसे वह मुझसे कुछ कहना चाहती हो।

जब हम लोग आगरा पहुंच गए तो मैंने उस दिन उन्हें आगरा में अच्छे से घुमाया लेकिन जब उनकी पत्नी को मौका मिलता तो वह मुझ पर अपने स्तन टच कर देती। मै समझ चुका था कि उन्हें भी मेरा मोटा लंड चाहिए, मैंने सोचा मेरे 10 दिन भी अच्छे से कट जाएंगे। उन्होंने मुझे एक छोटे से पेपर में अपना नंबर लिख कर दे दिया। मैंने रात को उन्हें फोन किया और अपने रूम में बुला लिया। हम लोग जिस होटल में रुके हुए थे मेरा रूम अंकित जी के बिल्कुल सामने ही था। भाभी मेरे कमरे में आ गई जब उन्होंने अपने कपड़े खोले तो उन्होंने नाइटी पहनी हुई थी उसमें वह बड़ी सेक्सी लग रही थी। मैंने भाभी से कहा मैं आपको देखते ही समझ गया था कि आपके अंदर मेरे लिए प्यार है।

वह मुझसे आकर लिपट गई और वह मेरे लिए तड़पने लगी भाभी जब मुझसे चिपकी तो मुझे बहुत गर्म महसूस होने लगा। मैंने उनके मुह के अंदर अपने लंड को डाल दिया, उन्होंने  मेरे लंड को अपने अंदर तक लेना शुरू कर दिया। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत आनंद आ रहा है जब आप मेरे मुह मे लंड को डाल रहे हो। मैं बहुत ज्यादा खुश था, भाभी भी बहुत खुश हो रही थी। मैंने बड़ी तेज उनके गले के अंदर तक अपने लंड को धक्का मारना शुरू किया जिससे कि उनकी चूत से पानी निकलने लगा। जब मैंने उनकी चूत को देखा तो मैंने उसको अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। जैसे ही मैंने अपने लंड को उनकी चूत मे लगाया तो वह मेरा लंड लेने के लिए तैयार हो चुकी थी। मैंने भी तुरंत अपने लंड को उनकी योनि के अंदर डाल दिया। जब मेरा गर्मा गर्म लंड उनकी मुलायम योनि में घुसा तो उन्होंने अपने दोनों पैर छोड़ कर लिए मैंने भी बड़ी तेजी से उन्हें प्रहार करना शुरू कर दिया। वह मुझे कहने लगी तुम्हारा लंड तो बहुत ही कठोर है मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है जब तुम मुझे इस प्रकार से धक्के दे रहे हो। मैं भी बहुत ज्यादा खुश था और मैंने भी उन्हें बड़ी तेज गति से धक्के देने जारी रखा। वह इतनी ज्यादा मूड में आ गई वह मादक आवाज मे मुझे अपनी तरफ आकर्षित करने लगी। मैंने इतन तेज झटके दिए की मेरा लंड बुरी तरीके से छिल चुका था लेकिन जैसे ही मेरा माल भाभी की रसभरी चूत मे गिरा तो मुझे अच्छा लगा हम दोनों को ही बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। जितने दिन में उन लोगों के साथ रहा उतने दिन भाभी के यौवन का सुख भोगता रहा मैं बहुत ही खुश था। मैंने उन्हें 10 दिन बड़े अच्छे से घुमाया और मुझे बिल्कुल भी पता नहीं चला कब 10 दिन हो गए।

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