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अपनी 19 साल की फूल जैसी भांजी को चोद चोदकर पेट से कर दिया

मैं पिछले कई सालों से नॉन वेज स्टोरी का नियमित पाठक रहा हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती तब मैं इसकी रसीली चुदाई कहानियाँ नही पढ़ता हूँ। आज मैं आपको अपनी स्टोरी सूना रहा हूँ। में उम्मीद करता हूँ कि यह कहानी सभी लोगों को जरुर पसंद आएगी।

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मैं इलाहाबाद का रहने वाला हूँ। मैं शुरू से ही बहुत ठरकी आदमी था और जब बात चूत मारने की होती थी तो मैं खून के रिश्ते नाते भी भूल जाता था। मैं अपनी २ छोटी बहनों- पिंकी और ममता को चुपके चुपके घर वालो की नजर से बचकर अपने घर में ही चोद लेता था। मैं २८ साल का आदमी हो गया था, पर कोई नौकरी ना होने की वजह से मेरी शादी नही हो पा रही थी। अब मेरी शादी हो या ना हो, पर लंड तो रोज खड़ा होता ही था। इसलिए मैं कहीं न कहीं चूत की तलाश में रहता था। अब क्या मैं सारी जिन्दगी मुठ ही मारता रह जाता, इसलिए मैं अपनी सगी बहनों को चोद लिया करता था।

कुछ दिन बाद रक्षाबंधन पड़ने वाला था। मेरी दीदी का फोन आगरा से आ गया।

“निशांत तुम ही घर आ जाना…मैं नही आ पाउंगी। तुम्हारे जीजा जी कुछ दिनों के लिए बंगलौर जा रहे अपने ऑफिस के काम से” दीदी बोला

“ठीक है दी {मैं प्यार से सिर्फ उनको दी कहकर बुलाता था} मैं रक्षाबंधन में आ जाऊँगा” मैंने कहा

कुछ दिनों बाद मैं इलाहाबाद से ट्रेन पकड़कर आगरा चला गया। मेरी मुलाकात अपनी भतीजी रिनी से हुई। जाते ही वो मेरे गले लग गयी। “मामाजी…. आ गये!!” रिनी चिल्लाकर बोली और मेरे गले लग गयी

“अरे मेरी भांजी कितनी बड़ी हो गयी है!!” मैंने हैरानी से कहा

दोस्तों, रिनी पहले १० १२ साल की बच्ची हुआ करती थी। पर अब तो कायाकल्प ही हो गया था। उसका जिस्म अब पूरी तरह से भर गया था और अब वो एकदम जवान और कडक माल लग रही थी। जैसे डिग्री कॉलेज में जाने वाली जवान लड़कियाँ। मैं तो अपनी भांजी को आँखे फाड़ फाड़कर देख रहा था। इतनी ही नही जब वो मेरे गले लगी तो उसके ३४” के दूध मेरे सीने में गड़ने लगे। इस बात में कोई आश्चर्य नही था की मेरी भांजी रिनी अब चोदने खाने लायक सामान हो गयी थी। रक्षाबंधन का त्योहार अच्छे से निपट गया। मेरी दीदी तो खाना बनाकर सो जाती और रिनी मेरे ही कमरे में रहती। मेरा उसे चोदने का बड़ा दिल कर रहा था। मैंने रिनी के मोबाइल फोन को चेक किया तो उसके बॉयफ्रेंड के साथ कई फोटो थे। मैंने उसे अपने पास बुलाया।

“क्या है मामाजी????” वो हसंकर बोली

“भांजी……ये सब क्या है???” मैंने उसे बॉयफ्रेंड के साथ वाली फोटो दिखाते हुए पूछा

“मामा…..वो….वो…..वो…” रिनी के होठ तो जैसे सिल गये थे।

“तेरे बॉय फ्रेंड ने तुझे चोदा भी है क्या???” मैंने पूछा

“नही….अभी तो हमारा नया नया प्यार है!” वो बोली

मैं बिलकुल कपटी कंस मामा बन गया था। इसका मतलब की मेरी भांजी अभी एक बार भी नही चुदी है। मेरा लंड ये सोचकर खड़ा हो गया। मैंने झूठ मुठ का नाटक फैलाया।

“मैं जा रहा हूँ…..तेरी मम्मी को ये फोटो दिखा रहा हूँ!!” मैंने बहाने मारते हुए कहा

“नही मामा जी नही…..आपको मेरी कसम!! आप जो कहेंगे वो मैं करुँगी पर मम्मी पर ये फोटो मत दिखाओ!!” रिनी बोली

“भांजी …..बुर देगी????” मैंने प्रेम चोपड़ा के अंदाज में अपने ओठ घुमाते हुए कहा

वो मेरी तरफ नफरत भरी नजरो से देखने लगी। सायद उसके दिल में मेरे लिए जो प्यार था वो अब खत्म हो चुका था। कुछ देर तक वो खड़ी रही। उसके समझ नही आ रहा था की क्या बोले।

“ठीक है दूंगी….पर प्लीस मम्मी को ये फोटो मत दिखाना मामा जी!” रिनी बोली

मेरी दी तो अपने कमरे में सो रही थी। मैंने रिनी को अपने कमरे में बुला लिया और दरवाजा बंद कर दिया। उसने लाल टॉप और सफ़ेद लोवर्स पहन रखे थे। मैंने उसको अपने बिस्तर पर बुला लिया और उसे बाहों को भर लिया। “वाह…..मेरी किस्मत तेज थी जो मैं राखी बंधने आगरा आ गया। अब जी भरकर अपनी भांजी को चोद चोदकर इसके यौवन रस को लूटूंगा, मैंने खुश होकर सोचा। मैंने अपनी भांजी को बाहों में भर लिया और उसके नये नये होठ जो अभी अभी जवान हुए थे, मैं उनको चूमने लगा। उफ्फ्फ्फ़…मेरी भांजी रिनी कितनी मस्त माल लग रही थी। उसके होठ नही जैसी किसी शराब के प्याले थे। मैं उसके मुंह पर मुंह रखकर उसके लब चूसने लगा और मजा लेने लगा।

कहाँ मैं २८ साल का आदमी था, और कहाँ ये १९ साल की कच्ची कली। आज इस बहन की लौड़ी को अपने लौड़े से रगड़कर चोदूंगा, मैंने सोचा। फिर मैंने रिनी का लाल टॉप और लोअर निकाल दिया। वो काली ब्रा और पेंटी में आ गयी। क्या महकता हुआ जिस्म था उसका। अब वो बच्ची नही रही थी। वो १९ साल की हो चुकी थी और चुदवाने को तैयार हो चुकी थी। उसकी छाती तो अब बहुत ही विशाल हो गयी थी और उसके ३४” के मम्मे तो मुझे ललचा रहे थे। भतीजी का जिस्म तो कैटरिना कैफ जितना मस्त लग रहा था। सर से पाँव तक भरा हुआ जिस्म था मेरी भांजी का।

मैंने अपनी टी शर्ट और जींस निकाल दी और अपना अंडरविअर भी निकाल दिया। मैं रिनी के उपर लेट गया और उसके होठ पीने लगा। वो भी जवान थी, इसलिए उसे भी काफी अच्छा लग रहा था। मैंने उसके मम्मे पर हाथ रख दिया और तेज तेज से उसके होठ पीने लगा। कुछ देर में हम दोनों का अच्छा ताल मेल बैठ गया और अब रिनी खुलकर अपने मामा के यानी मेरे लब चूस रही थी। फिर हम दोनों ने एक दूसरे के मुंह में अपनी अपनी जीभ डाल दी और मजे से चूसने लगे। धीरे धीरे रिनी पूरी तरह खुल रही थी। कई मिनटों तक तो हम दोनों का ओंठो का गरमागर्म चुम्बन ही चलता रहा। रिनी सायद खुद ही कसकर चुदवाना चाहती थी। उसके खुद ही अपने हाथ से अपनी ब्रा के हुक खोल दिए और ब्रा निकाल दी।

उफफ्फ्फ्फ़…उसके गजब के सफ़ेद और उजले भरे भरे आम जैसे दिखने वाले दूध मेरे सामने थे। “मेरी भांजी इतनी गजब की माल हो गयी” मैं सोचा और फिर मैंने अपने दोनों पंजे उसके दूध पर रख दिए और दबाने लगा। मैंने आजतक ५ ६ लौंडिया चोद रखी थी, पर शायद रिनी सबसे मस्त माल थी। मैं उसके दूध को कस कसकर दबाने लगा। उसके चुचचे बेहद खूबसूरत थे, दिल कर रहा था की रिनी को चोदूँ नही बस उसके मम्मे ही ताड़ता रहू। मैं जोर जोर से अपने पंजे से उसके दूध दबाने लगा।“….हाईईईईई, उउउहह, आआअहह” रिनी कसमसाने लगी। मैंने लेटकर अपनी भांजी के स्तनों का पान करने लगा। उफ़ मैं कितना किस्मत वाला हूँ की एक १९ साल की कुवारी लौंडिया आज चोदने को मिल रही है। मैं मन ही मन में इश्वर को धन्यवाद करने लगा। मैंने रिनी के बाए मम्मे को मुंह में भर लिया और चूसने लगा। हाय…कितनी मीठी और नर्म नर्म छातियाँ थी मेरी भांजी की। निश्चित ही आज इसे अपने मोटे लंड से मैं चोदूंगा और आज इसका यौवन रस मैं लूट लूंगा। मैं प्लान बनाया।

रिनी“आआआआअह्हह्हह….ईईईईईईई.. .ओह्ह्ह्हह्ह…अई..अई..अई…. अई..मम्मी…..” करके चिल्ला रही थी। वो कसक रही थी। उसकी हालत बता रही थी की उसे भी मेरी तरह पूरा मजा मिल रहा था। मैंने उसके बाए दूध को पूरा का पूरा अंदर तक भर रखा था। मैं अपना मुंह चला चलाकर मजे से चूस रहा था। इतने मस्त रसीले आम मैं आजतक नही चुसे थे। फिर मैं उसका दायाँ दूध मुंह में भर लिया और मजे लेकर चूसने लगा। कुछ देर में मेरी भांजी ने खुद अपनी काली पेंटी निकाल दी।

“भांजी….आ लौड़ा चूस आकर!!” मैंने कहा और बिस्तर पर लेट गया।

“मामाजी….मुझे ये गंदा लगता है!!” रिनी बोली

“अरे भांजी शुरू शुरू में हर लौंडिया यही बात कहती है….पर धीरे धीरे उसको आदत हो जाती है…चल आ ना” मैंने कहा

बेमन से रिनी मुझ पर झुककर मेरा लौड़ा हाथ में लेकर फेटने लगा। मुझे इस बात की बहुत खुसी थी की उसकी रसीली चूत की सील मैं ही तोडूंगा और उसका उदघाटन मैं ही करूँगा। बड़ा मुंह बनाकर रिनी ने मेरा मोटा ८ इंच का लौड़ा अपने मुंह में ले लिया और किसी तरह चूसने लगी। मैंने उसके दूध को हाथ से दबाने लगा और उसकी कुवारी निपल्स को मैं ऊँगली से मसलने लगा। धीरे धीरे ऐसा करने से उसे जोश चढ़ रहा था और वो चुदासी होती जा रही थी। कुछ देर बाद उसे लंड चूसने में मजा मिलने लगा और वो दिल लगाकर लौड़ा चूसने लगी। मेरा लौड़ा अब पूरी तरह से खड़ा हो गया था और बहुत ही सख्त हो गया था। रिनी के रसीले होठ मेरे लौड़े पर जल्दी जल्दी उपर नीचे दौड़े जा रहे थे। मैं जवानी का मजा उठा रहा था। मेरी भांजी ने करीब ४० मिनट मेरे लंड मुंह में लेकर चूसा और हाथ से उपर नीचे करके फेटा। फिर मैं उसके उपर लेट गया और उसकी चूत पर मैंने अपना मुंह रख दिया।

रिनी की चूत बिलकुल कुवारी और बालसफा थी। उसने अपनी झांटो को अच्छी तरह से बना रखा था। वैसे भी मुझे झाटों में बुर चोदना पसंद नही है। मैं बड़ी देरतक अपनी भांजी की चूत का दर्शन करता रहा। बताओ मेरे जीजा ने मेरी दी को चोद चोदकर रिनी की पैदा किया और आज वो भी चुदवाने जा रही है। कितनी अच्छी बात है ये, मैं सोचने लगा। मैने उसकी बुर पीने की शुरुवात उसके चूत के दाने को पीने से की। मैं सिद्दत से रिनी के चूत के दाने को पीने लगा।“……मम्मी…मम्मी….सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ..ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” वो सिसकने लगी। मैंने अपनी भांजी के यौवन और जवानी को देखकर पूरी तरह से पागल हो गया था। मैं रीनी के चूत के दाने को पूरी तरह से खा जाना चाहता था। फिर मैं नीचे की तरह बढ़ गया और उसकी फुद्दी के होठ चूसने लगा। उफ्फ्फ…कुवारी अनचुदी लौंडिया की चूत के कुवारे होठ।

“……उई..उई..उई…. माँ….माँ….ओह्ह्ह्ह माँ…. .अहह्ह्ह्हह..” रिनी अपनी गांड उठाने लगी।“ मामा उ उ उ…चूसो चूसो…..और चूसो…मेरी चूत को….अच्छे से पियो मेरी बुर मामा जी” रिनी बोली। मुझे ये सुनकर खुशी हुई की उसे भी पूरा मजा मिल रहा था। मैं वासना की आग में इतना अंधा हो गया था की मैं अपनी खून की रिश्तेदार को आज चोदने जा रहा था। मेरे होठ रुकने का नाम नही ले रहे थे, मैं तो बस अपनी आँखे बंद करके रिनी की बुर को पिए ही जा रहा था। वो बार बार अपनी गांड हवा में उपर उठा देती थी।

फिर मैंने उसे जादा तड़पाना सही नही समझा। और अपना मोटा ८” का लौड़ा मैंने उसकी कुवारी चूत के दरवाजे पर रख दिया और जोर का धक्का मारा। पहली कोहिश में मुझे सफलता मिल गयी और मेरा लंड ३ इंच अंदर किसी ड्रिल मशीन की तरह अंदर घुस गया।“आऊ….. आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह….सी सी सी सी.. हा हा हा..” रिनी चिल्लाई। उसे काफी दर्द हो रहा था। मैं उसके दर्द को देखते हुए कुछ देर के लिए रुक और और ५ मिनट बाद मैंने फिर से एक करारा धक्का मारा और लंड सीधा चूत में ८ इंच अंदर।“……मामा उ उ उ उ ऊऊऊ ….ऊँ..ऊँ…ऊँ अहह्ह्ह्हह सी सी सी सी.. हा हा हा.. ओ हो हो….” रिनी जोर से चिल्लाई। मैंने नीचे नजर दौड़ाई तो मेरे लौड़े ने भांजी की चूत को फाड़के रख दिया था।

मेरा लौड़ा रिनी की चूत के खून में सन चुका था। वो दर्द से तडप रही थी। मैंने उसके दर्द को कम करने के लिए रुक गया और उसके मुंह पर मैंने अपना मुंह रख दिया और उसके होठ चूसने और पीने लगा। उसके दर्द को देखते हुए मैं उसकी चुदाई कुछ देर के लिए रोक दी थी। ८ १० मिनट बाद मेरी भांजी का दर्द कम हो गया था मैं धीरे धीरे कमर हिलाकर उसे पेलने लगा। उसकी आवाजे मुझे दीवाना बना रही थी। वो उ उ की आवाज निकाले जा रही थी। धीरे धीरे मैं अपनी भांजी को तेज तेज भांजने लगा। रिनी ने अपनी जांघो को मोडकर घुटनों को उपर तक उठा लिया था। मैंने उसकी कमर को दोनों तरह से हाथ से पकड़कर उसे ठोंक रहा था।

“…उई उई उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी…. ऊँ..ऊँ…ऊँ” की तेज आवाजे वो लगातार निकाले जा रही थी। मैं भांजी की कमर को कसकर पकड़कर उसे सम्भोग का मजा दे रहा था। धीरे धीरे मेरा लौड़ा उसकी बुर में तेज तेज सरकने लगा। उसकी चूत अब खुल गयी थी और मेरे लौड़े को आराम से ले रही थी। मैं तेज तेज धक्के देने लगा तो रिनी के दूध बड़ी जल्दी जल्दी हिलने लगे, पर नीचे होने लगा। ये सब देककर तो मैं और भी जादा कामोतेज्जक हो गया और जल्दी जल्दी उसकी चूत में फटके मारने लगा।“उ उ ….अअअअअ आआआआ… मामा…सी सी …. ऊँ..ऊ.. फक माय पुसी!!…..फक इट रियली हार्ड मामा जी!!” रिनी किसी चुदासी कुतिया की तरह चिल्लाई।

उसकी सिस्कारियां मुझे पागल कर रही थी। मैं बिना रुके तेज तेज उसे किसी रंडी समझकर चोद रहा था। रिनी की कमर बहुत पतली और सेक्सी थी, मेरे दोनों हाथों में आराम से आ रही थी। सच में उस जैसी कच्ची कली को चोदने का मौक़ा उपर वाला सिर्फ कुछ ही लोगो को देता है। इश्वर मेरे उपर महरबान था जो उस जैसी मस्त माल को चोदने का मौका उसने सिर्फ मुझे दिया था। मैं अपनी पूरी ताकत से रिनी की चूत से भीड़ गया और अपनी लंड रूपी तलवार मैं उसकी चूत में जल्दी जल्दी चलाने लगा। कुछ देर में मेरी भांजी रिनी अपनी गांड हवा में उपर उठाने लगी।“….आआआआअह्हह्हह… अई…अई…….ईईईईईईई मर गयी….मर गयी…. मामा जी…..मैं तो आजजजजज!!” वो चिल्लाई। इसी बीच मैं तेज धक्के मारते मारते उसी बुर में ही झड़ गया और मैंने माल उसकी चूत में ही छोड़ दिया।

अपनी सारी ताकत खर्च करने के बाद मैं भांजी पर गिर गया और उसके होठ फिर से चूसने लगा।

“भांजी ….कैसी लगी मामा की ठुकाई???” मैंने हाफ्ते डापते हुए पूछा

“मस्ततत……!!!” वो बोली

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इस महाचुदाई में हम दोनों के पसीने छूट गए थे। हम दोनों प्यार करने लगे। आधे घंटे बाद मेरा रिनी की गांड मारना का बड़ा दिल कर रहा था। मैंने उसे कुतिया बना दिया। बड़ी देर तक मैं उसकी चूत और गांड पीता रहा। फिर मैंने लंड में थूक लगाकर सवा घंटे रिनी की गांड मारी और गांड का छेद बड़ा कर दिया। उसे मैंने ६ दिन रगड़कर चोदा और इलाहाबाद वापिस लौट आया। १ हफ्ते बाद उसका फोन आया। उसके बताया की वो पेट से हो गयी है।

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