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चुदाई का मजा तो ग्रुप में आता है

मैं बी ई करने के बाद नौकरी पर लग गई. मेरी पोस्टिंग शहर से दूर एक छोटे कसबे में कांच के उपकरण बनने की फेक्टरी में हुई. मुझे एक कोलोनी एक अलग छोटा सा घर मिल गया. मेरे घर के पड़ोस में शुभ्रा अपने पति रूद्र के साथ रहती थी. रूद्र मेरी ही फेक्टरी में काम करता था.

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मुझे रीडर पहली नजर में ही सेक्सी लगा. मैं उसे देखते ही मुस्कारने जाती. वो मुझसे दूर रहता. मैंने एक और तरीका अपनाया. मैं अब मुस्कुराने के साथ साथ उसे आंख भी मारने लग गई. लेकिन वो नहीं पिघला. मेरा दिल उसके लिए धड़कने लगा था.

एक बार शुभ्रा अपने मामा के लड़के की शादी में गई. रूद्र को छुट्टी नहीं मिली. उस दिन रात को मैं रूद्र के घर में कुछ लेने के बहाने गई. रात के करीब ग्यारह बज चुके थे. रूद्र ने दरवाजा ख़ा. मुझे देखते ही वो घबरा गया. मैंने कहा ” मुझे थोडा दूध और शक्कर चाहिये. मुझे लाना याद ही नहीं रहा.मेरी मदद मरेंगे प्लीज.” रूद्र ने हाँ कहा.

मैं उसके पीछे पीछे रसोई में आ गई. मैंने अचानक उसे अपनी बाहों में ल लिया और बोली ” इतना क्यूँ दूर रहते हो मुझसे. क्यूँ तड़पाते हो मुझे.” रूद्र ने अपने को छुड़ाने की कोशिश की लेकिन मैंने उसे नहीं छोड़ा. मैंने रूद्र के गालों को चूमा. रूद्र मुझसे छूट कर अपने कमरे के तरफ भाग गया. मैं उसके पीछे पीछे आई.

मैंने उसे फिर पकड़ लिया और उसे लेकर पलंग पर गिर गई. अब रूद्र और भी ज्यादा घबरा गया था. इस घबराहट ने उसकी ताकत कम कर दी. मैंने उसे एक बार फिर चूमना शुरू किया. रूद्र की सांस फूलने लगी. उसने कहा ” तुम ऐसा क्यूँ कर रही हो. क्या मिलेगा इस तरह से सम्बन्ध बनाने में.

मैं शुभ्रा के साथ बहुत खुश हूँ.” मैं बोली ” मुझे नहीं पता. शुभ्रा से मेरी कोई दुश्मनी नहीं. लेकिन मैं तुम्हें अपनाकाही रहूंगी.” अब मैंने अपनी नाईटी उतार कर फेंक दी. मैंने नाईटी में केवल पैंटी पहनी हुई थी. ब्रा नहीं पहनी थी. मैंने उसे अपने नंगे सीने से लगा लिया. मैंने रूद्र के कपडे खींच कर खोल दिए.

जो नहीं खुले उन्हें फाड़ दिया. मैं फिर से उसे पकड़कर चूमने लगी. रूद्र ने जोर लगाकर खुद को मुझसे चुदा लिया और बाथरूम में जाकर दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया. इन हार कर घर लौट आई.

शुभ्रा तीन दिन के बाद आनेवाली थी. अगले दिन रात को मैंने फिर रूद्र के घर का रुख किया. उस वक्त रात के बारह बज चुके थे. मेरे पास शुभ्रा ने अपने घर की एक चाबी दे रखी थी. मैं सीधे रदर के बेडरूम में गई. अपने सारे कपडे खोल दिए. कमरे की लाईट जला ली.

मैं अपने साथ एक विडियो केमरा ले गई थी. मैंने कैमरे कोटेबल पर पलंग के हिसाब से सेट का रख दिया और उसे शुरू कर दिया. रूद्र गहरी नींद में था. मैंने उसके कपडे धीरे धीरे खोल दिए और उससे लिपट गई और उसे जोर जोर से आवाज कर चूमने लगी. रूद्र घबराकर उठ गया. लेकिन मेरी पकड़ बहुत मजबूत थी.

उसने बहुत कोशिश की लेकिन मैं उस पर से नहीं हटी और उसे अपने नीचे ही दबाकर रखा. मैंने रूद्र को चूम चूमकर गीला तो किया ही उसे काफ हद तक थका भी दिया. यहाँ मैं यह बता दूँ कि रूद्र दिखने में मेरे से दुबला पतला है. मेरा शरीर रूद्र से ज्यादा मजबूत है. रूद्र के पलंग के पास एक स्टूल पर कुछ केले रखे हुए थे. आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

मैंने उन सभी केलों को छील लिया और उसके गुदे को तहों से मसल मसलकर अपने स्तनों पर लगा दिया और रूद्र को पकड़कर अपने से चिपटा लिया. रूद्र इस हमले के लिए बिलकुल भी तैयार नहीं था.मैंने केले के गुदे को रुद के गालों पर लगाया और उसके गालों को चूमने और चाटने लगी. अब रूद्र थक कर चूर हो गया था.

केले का उड़ा उसके भी जिस्म पर फ़ैल गया था. मैंने रूद्र को केमरा दिखा दिया, रूद्र जबरदस्त डर गया. मैं बोली ” तुम वैसा ही करो जैसा मैं कहती हूँ नहीं तो ये मैं सभी को दिखा दुगी.” रूद्र के पास अब कोई भी रास्ता नहीं बचा था. मैंने देर रात तक रूद्र को अपने साथ चिपकाकर रखा और अपने जिस्म को उससे चुमवाया. बाद में सवेरा होने से पहले मैं अपने घर आ गई.

अब रूद्र मेरे गिरफ्त में आ गया था. शुभ्रा के आने में अभी एक दिन और बाकी था. मैंने देखा शाम को रूद्र घर ही नहीं लौटा.मैं देर तक उसके दरवाजे की तरफ देखती रही. मुझे शक हो गया कि रूद्र हो सके देर रात चोरी छुपे लौटे. मैंने घर की तमाम लाइटें बंद कर दी और मेरे कमरे की खिड़की से उसके दरवाजे की तरफ देखने लगी.

रात के करीब एक बजे के बाद रूद्र लौटा. मैंने तुरंत उसके घर का रुख कर लिया. इससे पहले के वो दरवाजा अन्दर से बंद करता मैंने धक्के से उसका दरवाजा खोल दिया. रूद्र ने थोड़ी तेज आवाज में कहा ” अगर आज तुमने कुछ किया तो मैं पुलिस को खबर कर दूंगा.

” मैं बोली ” कर दो पुलिस को खबर. मैं भी विडियो दिखा दूंगी कल रात वाला.” रूद्र बोला ” तुम ऐसा क्यूँ कर रही ? मैं शुभ्रा के साथ सुखी हूँ. मेरी और उसकी जिंदगी बरबाद क्य्कर रही हो?” मैंने कहा ” मुझे तुमसे और शुभ्रा से कोई दुश्मनी नहीं ह.

मैं बचपन से ही ऐसे जिद्दी स्वभाव की हूँ. जिसे चाहू उसे पाना चाहती हूँ हर तरीके से. तुम शुभ्रा के साथ साथ मुझे भी अपना लो. मैं सच कहती हूँ तुम दोनों को कोई परेशानी नहीं होगी लेकिन तुम्हें हर हालत से पाकर ही दम लुंगी.” रूद्र मेरी बात से घबरा उठा.

मैंने आगे बढ़कर रूद्र को अपनी बाहों लिया और उसके गालों को चूमते हुए बोली ” हम तीनों ही खुश रहेंगे रूद्र.” रूद्र कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं था. मैंने रूद्र को पलंग की तरफ चलने का इशारा किया. रूद्र के पास कोई दुसरा रास्ता नहीं था. मैंने एक बाद फिर रूद्र के कपडे उतार दिए.

मैंने आज भी केमरा पलंग के पास रख कर शुरू कर दिया था. मैंने अपने सारे कपडे उतारे और रूद्र को अपनी आगोश में ले लिया. रूद्र छटपटाने लगा. मैंने रूद्र को खूब चूमा. धीरे धीरे रूद्र को मैंने शांत कर दिया. लेकिन फिर भी वि बिना मन सब कर रहा था.मैंने उसे गुस्से से छोड़ा और कपडे पहनकर घर लौट आई.

मैं अब अगली योजना बनने लगी. मैंने एक दिन शुबरा को शाम को चाय पर बुलाया. मैंने शुबरा को सब कुछ अच् सच बताया और उसे विडियो भी दिखा दिया. शुबरा रोने लगी. लेकिन मुझे उस पर दया नहीं आई. मैंने शुबरा से कहा ” शुबरा मई तुम्हारा दुःख समझ सकती हूँ लेकिन मेरी भी मजबूरी बन चुका है तुम्हारा रूद्र.

शुभ्रा मेरा विश्वास रखो तुम्हारे अधिकार ज्यूँ की त्यूँ रहेंगे. हम दोनों रूद्र के साथ मिलकर .आराम से रहेंगे.” मैंने शुभ्रा को आहूत समझाया लेकिन वो रोते हुए अपने घर चली गई.

सवेरे जब रूद्र चला गया तो मैं शुभ्रा के घर पर गई. शुभ्रा अपने बेडरूम में लेटी हुई थी. मैं चुपचाप उसके करीब पहुँच गई. मैंने शुभ्रा के गाल चूम लिए. शुभ्रा ने घबराकर आँख खोल दी. मैंने मुस्कुराकर उसकी तरफ देखा. शुभ्रा उठने को हुई. मैंने उसे एक बार फिर गालों पर चूमा और उसे लेटे ही रहने दिया. आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

मैं उसके बगल में लेट गई और उसे बाहों में भर लिया. शुभ्रा अब डरने लगी थी. मैंने उसे उसके गालों पर कई बार चूमा और मुस्कुराते हुए बोली ” शुभ्रा डार्लिंग. मुझ से बिलकुल मत डरो.मैं तुम्हारा कुछ नहीं बिगादुंगी. मैंने अब शुभ्रा के होंठों पर अपनी उन्गलीयाँ फिराई.

मैंने अपनी एक उंगली उसके मुंह में डाल दी. शुभ्रा के नाजुक मुंह में गीलेपन से मेरी ऊँगली गरम हो गई. मैंने भी शुभ्रा की एक ऊँगली अपने मुंह में डाली और उसे अपनी जीभ से चूमकर गीला कर दिया.

अब मैंने शुभ्रा की कुर्ती खोल दी. शुभ्रा थोड़ा डर गई.. मैंने अपना टी शर्ट भी खोल दिया. अब मैं उससे लिपट गई. अब मैंने शुभ्रा के होंठों को हौले से चूम लिया. शुभ्रा को शायद यह अच्छा लगा या कोई नशा छा गया. उसने भी चूम लिया. मुझे यही तो चाहिये था. लेकिन यह सब इतना जल्दी मुझे मिल जाएगा मैंने अंदाजा नहीं लगाया था. अब मैंने अपने सभी कपडे उतार दिए और शुभ्रा के भी.

मैं शुभ्रा से लिपट गई और उसके जिस्म को हर हगाह चूम चूमकर उसे आहें भरने पर मजबूर कर दिया.तभी मुझे टेबल पर एक ग्लास में रखा हुआ आम का रस दिखा जो शायद शुभ्रा ने खुद के लिए बनाया था. मैंने वो ग्लास लिया और उसमे से एक घूँट अपने मुंह में भर लिया और शुभ्रा के मुंह इ अपना मुंह सटाकर उसके मुंह में छोड़ दिया.

इस रस ने शुभ्रा को पूरी तरह से मेरे बस में कर दिया. अब मैंने शुभ्रा से मेरे साथ यही दोहराने को कहा जिसे शुभ्रा ने पूरी गरमाहट से दोहरा दिया. इसके बाद मैं और शुभ्रा आम के रस से फैले मीठेपन को अपने होंठों से लगातार कुछ देर तक चूमते रहे. मैंने ग्लास में बचा हुआ आम का रस शुभ्रा के गुप्तांग वाली जगह पर गिरा दिया और अपने हाथ से जननांग तक फैला दिया. शुभ्रा अब तेज साँसें लेने लगी.

मैं अब शुभ्रा के ऊपर लेट गई और अपने गुप्तांग से उसके गुप्तांग के ऊपर टच करते हुए हिलने लगी. शुभ्रा ने मुझे होंठों पर चुम्बन देकर यह संकेत दिया कि अब सब उसे मंज़ूर है. मैंने अब उसके और अपने टांगों में इस तरह से कैंचिनुमा आकृति बनाई कि हम दोनों के ही जननांग आपस में टच हो गए.

अब हम दोनों ही अपने अपने जननांगों को आपस में टच कराकर हलके से मसाज जैसा करना लगे. हम दोनों जब यह लगातार पांच-सात मिनट तक किया तो अचानक ही हमें जननांगों के अन्दर से मलाईदार लिक्विड निकलकर हमें और भी नशे में कर गया. मैंने अंत में शुभ्रा को चूमा और अपने कपडे पहनकर घर आ गई.

अब तो हर दोपहर को मैं शुभ्रा के याहं जाने लगी और उसके साथ हमबिस्तर होने लगी. करीब चार-पांच दिनों के बाद जब हमेशा के तरह मैं और शुभ्रा आपस में लिपटे हुए प्यार कर रहे थे तो मैंने शुभ्रा को होंठों पर चूमते हुए कहा ” अब तो हम दोनों को रूद्र को भी अपने साथ मिला लेना चाहिये.

” शुभ्रा ने मेरे होंठों को जोर से चूसा और बोली ” आज के रात ही तुम आ जाना मैं रूद्र के सात नंगी होकर लेटी मिलूंगी तुम चुपचाप हमारे साथ मिल जाना.” मैं खुश हो घर आ गई.

मुझे अब आज के रात का इंतज़ार था. आज मैं रूद्र को हमेशा हमेशा के लिए अपना बना लेने वाली थी. रात को करीब बारह बजे मैं दबे पाँव शुभ्रा के कमरे में दाखिल हो गई. कमरे में यूँ तो अँधेरा था लेकिन एक छोटासा नाईट लेम्प जल रहा था. मैंने देखा कि रूद्र और शुभ्रा आपस में लिपट कर्प्यार कर रहे हैं और एक दूसरे को चूम रहे हैं. दोनों के बदन पर एक भी कपड़ा नहं है और दोनों ने कोई भी चद्दर अपने ऊपर नहीं डाल रखी है.

तभी शुभ्रा ने मुझे देख लिया और मुझे पलंग पर आ जाने का इशारा कर दिया. मैं धीरे से पलंग पर बैठ गई. रूद्र के पीठ मेरी तरफ थी. शुभ्रा ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मैं रूद्र के पीठ पीछे इस तरह से लेट गई कि रूद्र मेरे और शुभ्रा के बीच आ गया. आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

मैंने एकदम से रूद्र को अपनी बाहों में भींच लिया और उसकी पीठ पर चुम्बनों के बौछार कर दी. उसी वक्त शुभ्रा ने भी रूद्र पर चुम्बनों के बौछार शुरू कर दी. रूद्र हक्का-बका रह गया. जब वो बड़ी मुश्किल से पीछे पलटा तो मुझे देहकर हैरान रह गया.

शुभ्रा ने रूद्र से कहा ” आज से हम तीनों इसी तरह से रहेंगे. मुझे कोई आपत्ति नहीं है. तुम भी कोई आपत्ति नहीं दिखाना.” इससे पहले कि रूद्र कुछ बोलता शुभ्रा ने रूद्र को अपने होंठों से चूमकर चुप ही रहने दिया. जैसे ही शुभ्रा ने अपने होंठ हटाये मैंने रूद्र को अपनी पूरी ताकत से होंठों को चूसते हुए चूम लिया.

रूद्र इस एक चुम्बन में ही जैसे बिना ताकत का हो गया. अब मैंने और शुभ्रा ने आपस में एक दूजे को रूद्र के सामने ही चूमना और चाटना शुरू कर दिया . रूद्र तह सब देखकर समझ गया कि मेरी चाल कामयाब हो चुकी है.

शुभ्रा ने मुझे इशारा किया. मैं रूद्र के सामने से रूद्र से लिपट गई. शुभ्रा ने रूद्र को चूमना जारी रखा. मैंने रूद्र के लिंग को सहला सहलाकर कड़क और लंबा कर दिया. अब मैंने अपनी टांगें फैला दी. शुभ्रा ने मेरे जननांग को अपने हाथों से सहलाया.

शुभ्रा ने इसके बाद ढेर सारा जेल्ली क्रीम रूद्र के लिंग पर लगाया और मेरे जननांग के छेद के आसपास भी लगाया और रूद्र के लिंग को अपने हाथ से पकड़कर मेरे जननांग में धीरे धीरे जोर लगाकर घुसा दिया. मैंने भी अपने निचले हिस्से को रूद्र क्तारफ धकेलते हुए रूद्र के लिंग को अपने जननांग के भीतर ले लिया. शुभ्रा लगातार रूद्र को उत्तेजित्त किये जा रही थी.

मैंने भी अब रूद्र को लों पर ; होंठों पर लगातार गरमजोशी और मुंह से ढेर सारी लार छोड़ छोड़कर चूमना शुरू किया. रूद्र के जिस्म में अब थोड़ी हरकत हुई. मैंने और शुभ्रा ने इस हरकत को और बढाने के लिए एक साथ रूद्र के होंठों को चूमा. जब हम तीनों के होंठ आपस में मिल गए तो रूद्र ने जैसे आत्मसमर्पण कर दिया.

अब रूद्र ने भी बदले में शुभ्रा और मुझे दोनों को ही चूमा. मैं बाजी जीत चुकी थी.मैंने इसी ख़ुशी में रूद्र के लिंगको अपने जननांग में से निकालकर शुभ्रा के जननांग में घुसेड दिया. करीब पांच मिनट के बाद शुभ्रा ने रूद्र के लिंग को खुद के जननांग के भीतर से निकालकर मेरे जननांग में घुसेड दिया.

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यह खेल काफी देर तक चला. आखिर में रूद्र के लिंग ने मेरे जननांग के भीतर अपनी सारी मलाई छोड़ डी. शुभ्रा ने मुझे होंठों से चूम लिया. मैंने रूद्र को होंठों पर चूम लिया. रूद्र ने शुभ्रा को होंठों पर चूम लिया. फिर हम तीनों ने आपस में होंठों से चूम लिया. अब हम तीनों एक हो चुके थे.

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