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जांच के नाम पर चुदाई

दोस्तों मै पेशे से एक होमियोपैथ का डॉक्टर हूँ मस्ताराम की कहानिया मुझे बहुत पसंद है जब मेरी क्लिनिक में कोई

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नही रहता है तो बस टाइम पास के लिए मस्ताराम.नेट पर कहानिया पढता रहता हूँ एक बात बता दू आप लोगो को पेशाब और अन्य जांच की व्यवस्था गांव में कहा होती है, इसलिए लड़कियां कुछ भी करवाने को तैयार हो जाती हैं। मैं होम्योपैथ का डाक्टर हूं और आए दिन गांवों में मीठी गोलियां खिलाकर लड़कियों और महिलाओं को बेवकूफ बनाता रहता हूं, किसी को पेशाब की बीमारी किसी को चूत में खुजली, किसी की गांड में फोड़ा तो किसी की चूंची छोटी। तमाम दिक्कते हैं गांव में महिलाओं को और मैं कहता हूं कि उन्हें दवाईयों की चौबीसों घंटे जरुरत रहती है। इसलिए मेरी क्लिनिक में हर उमर की लौंडियों की भीड़ लगी ही रहती है, चूत और गाँड का दरबार हमेशा लगा रहता है। वैसे भी मैंने बाहर लिखवा रखा है साईनबोर्ड पर कि – पेट रोग विशेषज्ञ। तो यह कहानी एक १९ साल की लौँडिया की है जिसको पेशाब में सफेद सफेद धाध या वीर्य आ रहा था। उसने बड़े परिशानी से एक दिन क्लिनिक में प्रवेश किया। और बताने लगी – डाक्टर साहब, मुझे न पेशाब करने पर सफेद सफेद निकलता है। मैने मजा लेना शुरु किया, मेरी नजर उसके छत्तीस के चूंचों पर थी, वो कमाल के थे और उसकी सलवार में छुपाए न छुप रहे थे। उसने कहा कि यह पंद्रह दिनों से हो रहा है। मैंने पूछना शुरु किया – ये बताओ कोई और बात तो नहीं। तो वो बोली मतलब? मैने कहा मतलब कोई यार दोस्त, कोई गड़बड़? उसने नजरें झुका के शरमाते हुए कहा आप भी ना डाक्टर साहब, क्या बात करते हो। फिर मैने पूछा अच्छा फीस लाई हो कि नहीं। अक्सर गांव की औरतें फीस नहीं लातीं और कोई ना कोई बहाना बना देती हैं। मैं भी कम कमीना थोड़े ही हूं जो उन्हें दवाईयां देता फिरुं इसलिए तो मैं उन्हें मीठी गोलियां देता था बस। प्लेसबो इफेक्ट काम करता है दवा लेने के नाम पर ही पचास प्रतिशत महिलाएं ठीक हो जाती हैं। उसने कहा नहीं जी पैसे तो नहीं है मेरे पास। तो मैने कहा अभी जाओ और शाम को क्लिनिक बंद होने के बाद मेरे कमरे पर चली आना, वहीं आराम से तुम्हें देख लेंगे।

गांव वाले मेरा बहुत भरोसा करते थे इसलिए कोई भी मेरे कमरे पर चला आता था, वहां मैने पेशाब, खून जांच का एक झूठा कमरा भी बना रखा था। तो वो शाम को आई, एक दम बन संवर कर अपना टू पीस लहंगा पहन कर। पैसे तो मैं जानता था कि वो अब भी नहीं लाई थी तो मैने कहा चलो बैठ जाओ, और अपना थर्मामीटर ले कर उसके कांख, बाजू के बगल में दबाने को कहा। उसने अपना ब्लाउज सरकाया, तो उसके मोटे चूंचे एकदम से मेरे हाथ में छू गए, मैने उसके कांख से थर्मामीटर सटाए अपनी मुठ्ठी को उसके मोटे स्तनों से सटाए रखा और झूठ मूठ का अभिनय करता रहा। थोड़ी देर बाद मैने यही काम उसके दूसरे बाजू में किया और इस प्रकार दोनों ही चूंचों का आनंद लिया, इन डाइरेक्टली। पेशाब जांच के बहाने टार्च जलाके चूत का मुआयना फिर क्या था मैने उसे पेशाब जांच के लिए कमरे में ले जाकर चोदने के बारे में सोच लिया था। मैं उसे अंदर ले गया और कहा कि पेशाब करो हम देखते हैं कि कैस्से उजला उजला धाध निकलता है तेरा। वो शर्माके बोली तो आप जाइये ना हम कर लेंगे। मैने कहा रानी जब मेरे सामने करोगी तभी तो मैं जानूंगा कि सच में तुम्हें समस्या क्या है। उसने कहा कि ठीक् है और अपना लहंगा नीचे सरकाया। साली चौबीस की कमर एकदम उजली उजली, दूधिया माल की। सरकते ही काले झांटों के जंगल मुझे दिखे और फिर चूत की गहरी घाटी के सरसरे तौर पर दर्शन कराती हुई वह वहीं बैठ कर मूतने लगी। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | मैं टार्च जलाकर उसके पेशाब की धार देखने के बहाने से उसके पास जाकर उसकी चूत का मुआयना कर रहा था। मैने पेशाब में एक उंगली डालकर ये देखने की कोशिश की कि कहीं सच में उसे धाध तो नहीं आ रही, तो ऐसा कुछ मेरी उंगली में नहीं लगा। इसी बहाने मुझे कुछ करने का मौका मिला तो मैने उसकी चूत में उंगली डाल दी और अंदर करने लगा। तो वो बोली ये कैसा चेकप कर रहे हो, छी छी तुम डाक्टर नहीं सैतान हो। मैने कहा, अरे देखो मैं ये देख रहा हूं कि चूत में अंदर कोई फोड़ा वगैरा तो नहीं है। और मैने उसकी भगनाशा को मसल दिया। वो सीत्कार उठी। मैने उसे उठ कर चेकप बेड पर लेटने को कहा। और वो उसपर नंगे लेट गयी। मैने उसकी चूत में थर्मामीटर डालकर तापमान नापा और कहा अरे इसका तो बुखार बढ्ता जा रहा है लगता है कि कोई अंदर में परेशानी है। वो चुप थी, सच में मुझे याद आया वो गांव की सबसे छिनाल लड़कियां थी और सब जानबुझ कर कर रही थी। मैने अपना लंड निकाला, अब माहोल गरम हो चुका था, वो आंखे मूद के गरम सांसे ले रही थी और मेरा गद्दह लंड फनफना चुका था। चुदने को आयी थी साली अब पता चला मैने उसके हाथ में लंड पकड़ा दिया और उसके ब्लाउज के बटन एक एक करके खोलने लगा। वो चुप मजे ले रही थी। वाह क्या सीन था चोदवाने के लिए मरीज खुद मेरे पास आया था। बस मैने उसके छत्तीस के चूंचों को आजाद करते ही पकड़ के दबाना शुरु किया। वो मस्ता रही थी। मैने उसे जमीन पर नीचे घुटनो बल बिठा कर उसके मुह में चोदना शुरु किया और उसके चूंचे दबाता रहा। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

फिर उसे बेड पकड़ा के चौपाया बनाया और पीछे से उसकी गांड और चूत चाटनी शूरु कर दी। वाह मस्त पेशाब लगी चूत किसी बर्गर और कोल्ड ड्रिं क का मजा दे रही थी। मैने उसे चाटने के बाद उसमें अपना लड़ डाला, अंदर टेलते ही वह चिचियाने लगी आह्ह्ह आह्ह दर्द हो रहा है मैं पहली बार ये सब कर रही हूं। लड़के तो सिर्फ चूंचिया दबाते हैं आह आराम से करो, प्लीज मैं मर जाउंगी हे उपर वाले बचाओ, आह्ह आह्ह। मैने कहा रुको तुम्हारा दर्द दूर करता हूं और पास ही रखी ग्लिसरिन उठा कर उसकी गांड और चूत में लगा दी। अब चूत और गांड एक दम फिसलन भरे हो गए थे मैने अपना लंड चूत में एक ही झटके में ठोक दिया। और चार इंच अंदर जाकर वह रुक गया। धक्का दूसरा और पचाक से अंदर जड़ तक लंड उसकी चूत में। वह कहने लगी, आह मजा आ रहा है, अब मत निकालो अंदर ही थोड़ी देर रहने दो। लगता है कि तुम्हारा लंड मेरे पेट में घुस गया है। मैने अंदर बाहर करना शुरु किया। वह कराहती रही। चोदते हुए मैने उसे उसके पीठ और गर्दन पर चुम्मा की बौछार जारी रखी और वो सिस्कारियां मारती रही। आखिर में मैने उसकी चूत में अपना माल छोड़ दिया और फिर वीर्य से लिप्टा हुआ लंड उसकी मुह में डालकर अंदर पेशाब कर दिया। वो पेशाब को गटागट पी गयी। और फिर उस दिन चुदने के बाद अपने घर चली गयी और दुसरे दिन फिर से आ गयी मैंने पूछा अब भी प्रॉब्लम है क्या तो बोली नही डॉक्टर साहब अब सब ठीक है पर आज एक बार और कर दो न कल जैसे किया था आज थोडा और अच्छे से कर दो फिर क्या मैंने इस बार उसकी चूत और गांड दोस्तों अच्छे से बजायी |

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