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ननदोई ने नन्द की गैर मौजूदगी में मुझे मजे लेकर चोदा

मैं दिल्ली के साउथ ऐक्सटेंशन में रहती हूँ। यहाँ मेरे पति एक प्राइवेट कम्पनी में नौकरी करते है। दिल्ली में मेरा और कोई नही रहता। बस एक नन्द है तो नेताजी सुभास प्लेस में रहती है। मेरे बच्चो की स्कुल की छुटियाँ हो गयी थी। बच्चे बहुत दिनों से शोर मचा रहे थे की बुआ के यहाँ चलेंगे ….बुआ के यहाँ चलेंगे। तो मैंने कहा चलो बच्चो को घुमा देती हूँ। मेरे पति तो प्राइवेट नौकरी करते है, इसलिए उसके पास वक्त नही था, इसलिए मैं अपने बच्चों बबली, पिंटू और रोहन में लेकर अपनी नंद के घर चली गयी।

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जब मैं नन्द के घर पहुची तो वो शौपिंग करने गयी थी पड़ोस की किसी लेडीज के साथ में। मेरे ननदोई मुझे घर पर मिले। आपको बता दूँ की मेरे ननदोई बहुत मजाकिया और ठरकी टाइप के आदमी है। जवान सुंदर औरतों को देखकर वो फिसल जाते है और उसे पटाने में लग आते है। शादी से पहले मेरे ननदोई एक नम्बर के सीटियाबाज आदमी थी। खूबसूरत औरत देखी नही की लाइन मारना शुरू कर दिया। जैसे ही मैं उनके घर पहुचे वो मुझे लाइन देने लगे। वैसे भी मैं उनकी सरहज लगती थी, ननदोई लोग तो अपनी सरहज से मजाक करते ही है।

“कैसी हो तारा???….अरे तुमको एक नजर देखने को तो मेरी आँखे ही तरस गयी। आओ आओ…..बैठो भाई. कमला [मेरी नन्द का नाम] अभी शोपिंग करने गयी है!!” मेरे ननदोई बड़े मजाकिया अंदाज में बोले। फिर जल्दी से पास की मिठाई की दुकान से समोसा, कचोड़ी, जलेबी और तरह तरह की मिठाइयाँ ले आए। मेरे ननदोई खाने पीने के बड़े शौक़ीन थे। मेरे बच्चे बबली, पिंटू और रोहन उनके घर में धमा चौकड़ी मचाने लगे और बहुत शोर मचाने लगे।

“बच्चो …..हल्ला मत मचाओ, आराम से खेलो!!” मैंने कहा। उसके बाद मुझे थोड़ी गर्मी लग रही थी, इसलिए मैंने सोचा की क्यों ना नहा लूँ। पर जब मैं बाथरूम में गयी तो पानी नही आ रहा था। आपलोग तो जानते है की दिल्ली में पानी की कितनी किल्लत होती है।

“ननदोई जी…मुझे नहाना है और बाथरूम में पानी नही आ रहा है!!” मैंने कहा

“सरहज जी….आप तो वैसे ही इतनी फ्रेश माल लग रही है, आप नहाकर क्या करेंगी??” मेरे इश्कबाज और चूत के प्रेम पुजारी ननदोई बोले

“आप बाते न बनाइये और मोटर चालू कर दीजिये!!” मैंने कहा

“ठीक है….तो मैं भी आपके साथ ही नहाऊँगा और मजे लूँगा” एक बार फिर से मेरे चूत के पुजारी ननदोई बोले। शर्म से मेरा चेहरा लाल लाल हो गया। उन्होंने मोटर चला दी। मैं बाथरूम में नहाने चली गयी और मैंने ठन्डे पानी से बड़ी देर तक नहाया। जब मैं बाहर निकली तो मैंने अपने दूध पर सफ़ेद टॉवल बाँध ली थी। मैं बहुत गोरी और सेक्सी माल लग रही थी। मैं बिलकुल चोदने लायक सामान लग रही थी। मेरे ३ बच्चे थे, पर इसके बावजूद मैं कोई कच्ची कलि लग रही थी। मैं अपनी नन्द के कमरे में चली गयी और कोई आराम दायक मैक्सी दूंढने लगी, पर मुझे कोई मैक्सी नही मिली। मजबूरी में मुझे अपने ननदोई को बुलाना पड़ा। दोस्तों, इतनी गर्मी थी की साडी पहनकर बैठना तो नामुमकिन था। इसलिए मुझे हर हालत में कोई हल्की सूती मैक्सी चाहिए थी। मैंने ननदोई को आवाज लगाई।

“ननदोई जी……मुझे कोई हल्की मैक्सी नही मिल रही है., प्लीस आप ढूढ़ दे!” मैंने कहा

मैं उनके सामने सिर्फ सफ़ेद टॉवल में ही खड़ी थी। मेरा गोरा बदन अभी भी सूख नही पाया था। मेरे बालों से पानी अभी भी टपक रहा था। मेरे ननदोई चोर निगाहों से मेरे गोरे चिकने और बेहद सेक्सी नंगे कंधे बार बार ताड़ रहे थे। मेरे ३८” के दूध पर तौलिया बंधी हुई थी, पर मेरे रसीले मम्मो का आकार तो वो तौलिया के उपर से देख ही रहे थे। फिर उनकी नजर मेरे घुटनों और टांगो पर पड़ी। सायद मेरे प्रेम और चूत के पुजारी ननदोई मुझे चोदना चाहते थे। जिस तरह से वो मुझे ताड़ रहे थे उससे तो यही लगता था।

“सरहज….जी बस अभी आपको निकालकर देता हूँ” ननदोई बोले

वो वार्डरोब के पास खड़े होकर मेरे लिए मैक्सी ढूढ़ने लगे। इतने में पता नही कहाँ से एक बड़ा सा चूहा मेरी तरह बढ़ने लगा और मेरे पैर पर चढ़ गया। “आआअह्हह्हह….” मैंने बहुत तेज चिल्लाई और ननदोई की तरह भागी। वो बड़ा सा जंगली चूहा मेरी तरह आ रहा था। ननदोई भी डर गये और भागने लगे। हम दोनों एक मेज पर चढ़ गये इसी भागम भाग में मेरी टॉवल खुल गयी और नीचे फर्श पर जा गिरी। मैं इस समय पूरी तरह से नंगी थी और मैंने पेंटी भी नही पहनी थी। अचानक मेरे गोरे और संगमरमरी जिस्म को देखकर मेरे ननदोई की नियत खराब हो गयी। उन्होंने मेरा हाथ कसकर पकड़ लिया और सिने से लगा दिया। वो चूहा फिर किसी दूसरे कमरे में भाग गया।

पर ननदोई ने मुझे नंगे नंगे की बाहों में भर लिया और इससे पहले मैं कुछ बोल पाती वो मेरे ओंठ पीने लगे। वो सब इतना जल्दी हो गया की मैं भी कुछ नही कर पायी। उन्होंने मेरे ३८” के बड़े बड़े दूध पर अपने हाथ रख दिए और दबाने लगे। कुछ देर बाद मेरा भी चुदवाने का मन करने लगा। पिछले साल भी जब मैं गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को लेकर आई तो तो मेरे ननदोई ने मुझे चोदा था। इस बार भी लग रहा था की मैं उनका मोटा लौड़ा खा जाउंगी।

“सरहज जी….आज चूत दे दो…कमला[ मेरी नन्द] अभी ३ ४ घंटे तक मार्केट में ही रहेगी…..उसे पता नही चलेगा…आज आज मुझे अपनी रसीली बुर के दर्शन करवा दो” मेरे प्रेम और चूत के पुजारी ननदोई बोले। दूसरी तरफ मेरा भी चुदवाने का दिल कर रहा था। अपने पति का वही पुराना लौड़ा खा खाकर मैं वैसे भी बोर हो चुकी थी।

“ननदोई जी….मेरा भी आपसे चुदवाने का बड़ा मन है, पर अगर मेरे बच्चों को पता चल गया तो??” मैंने कहा

“अरे, वो तो खेल रहे है….उन्हें क्या पता चलेगा” ननदोई बोले

मैं कुछ बोल नही पाए। ननदोई समझ गये की सरहज चुदवाने को रेडी है। उन्होंने दरवाजे की कुण्डी भीतर से लगा ली और मेरी नन्द के कमरे में उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और अपने सारे कपड़े निकाल दिए। अब वो भी नंगे हो गये और मेरे ओंठ पीने लगे। मेरा भी चुदवाने का बड़ा दिल कर रहा था, इसलिए मैंने भी उनको बाहों में भरकर उनके लगे लग गयी। वो बड़े जोश से मेरे रसीले होठ पी रहे थे। आज एक गैर मर्द को पाकर मेरी वासना जाग उठी थी, मैं ननदोई से कसकर और खुलकर चुदवाना चाहती थी। हाँ, मैं एक बहुत बड़ी अल्टर थी और ननदोई का मोटा लौड़ा मैं अपनी चूत में लेना चाहती थी। मेरे भीगे खुले बालों से अभी भी साबुन की बहुत अच्छी महक आ रही थी, मेरे ननदोई उसका लुत्फ़ उठा रहे थे।

वो मेरे गाल को मजे से दांत से सेक्सी अंदाज में काट रहे थे। आज मैं पराये मर्द का लौड़ा खाने वाली थी। फिर ननदोई मेरे ३८” के दूध पीने लगे और मुंह से मेरी काली काली सेक्सी निपल्स को बड़े कामुक अंदाज में चूसने लगी। दोस्तों मैं ३ बच्चो की माँ थी, इसी से आप अंदाजा लगा सकते है की मैं कितनी बार अपने पति से चुदी हुंगी। पर जिस गर्मागर्म तरीके से मेरे ननदोई मेरी निपल्स चूस रहे थे, उससे तो यही लग रहा था की आज वो मुझे कसकर रगड़ कर चोदेंगे। आज ननदोई पूरे मूड में थे। मेरी नन्द बजार में कपड़े खरीद रही होगी और मैं यहाँ उसके पति का लंड खरीद रही हूँ, कितनी दिलचस्प बात है ना। मैं सोचने लगी।

मेरे सेक्सी प्रेम पुजारी और चूत पुजारी ननदोई ने आधे घंटे तक मेरे सेक्सी बूब्स को मुंह में लेकर किसी मीठे आम की तरह चूसा और दांत से काटते रहे। उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी…. ऊँ..ऊँ…ऊँ…मैं इस तरह की कामुक सिसकारियाँ लेने लगी। ननदोई जो जैसे आज पागल हुए जा रहे थे। मुझे पूरा विश्वास था की आज वो मुझे बिस्तर पर पटक पटककर चोदेंगे। आज मेरी रसीली मुनिया रानी, मेरी चूत को फाड़कर रख देंगे, मुझे पूरा विश्वास था। उधर मेरे बच्चे हाल में ननदोई के बच्चो के साथ मजे से खेल रहे थे। उनको जरा भी नही खबर थी की उसकी मम्मी उनके फूफा से कमरे में चुदवा रही है। मैंने हाथ में लाल चूड़िया, गले में मंगल सूत्र, कमर में करधन और पैर में चांदी की पायल पहन रखी थी। मैंने मत्थे पर बड़ी से लाल बिंदी लगा रखी थी, को मेरे सुहाग की निशानी थी।

पर आज इस कमरे में छुपकर मैं अपने सुहाग ने नही बल्कि पराये मर्द से चुदवाने जा रही थी। जैसे जैसे ननदोई मेरे दोनों मम्मो को चूस रहे थे, मेरी चूत की खुजली बढती जा रही थी। फिर वो मेरी सेक्सी नाभि को चूसने लगी तो मैं अपनी गांड उपर हवा में उठाने लगी। क्यूंकि मुझे बहुत जादा उतेज्जना महसूस हो रही थी। ननदोई बेहद सेक्सी अंदाज में मेरी गहरी नाभि में अपनी नुकीली जीभ डाल रहे थे और चूस रहे थे। वो मुझे seduce करके चोदना खाना चाहते है। मैं उनकी सब चाले समझ रही थी। फिर ननदोई मेरी सपाट पेडू को जीभ से चाटने लगे तो मेरी चूत तो बहने ही लगी। अंत में ननदोई मेरे लाल गुलाबी भोसड़े पर पहुच गयी। मैं ३ बार माँ बन चुकी थी, इसलिए मेरी चूत का चौराहा बन चूका था। ३ ३ बच्चे पैदा होने से मेरी कमर और चुतड पर stretching मार्क्स पढ़ चुके थे जो ननदोई को बहुत सेक्सी लग रहे थे।

“सरहज जी…अच्छा सही सही बताइए की ३ बच्चों पैदा करने में आपको कितनी बार चुदवाना पड़ा??” ननदोई हंसकर पूछने लगे

“……यही कोई ३ या ४ हजार बार” मैंने कहा

“ओह माई गॉड…..इसका मतलब आप ४ हजार बाद अपनी रसीली चूत में लौड़ा खा चुकी है” ननदोई हसंकर बोले

उनको ये जानकर बहुत जादा मजा आ रहा था। उसके बाद वो मेरी चूत का रसपान करने लगे और मजा लेने। मेरी चूत को वो हाथ से खोल खोलकर पी रहे थे। कुछ देर बाद उनका लंड पूरी तरह से खड़ा था और मुझे चोदने को पूरी तरह से तैयार था। मेरे प्रेम पुजारी और चूत पुजारी ननदोई में आखिर अपना १०” लम्बा लौड़ा मेरे भोसड़े में डाल दिया और मुझे मजे लेकर चोदने लगे। मैंने भी उनकी कमर में अपनी दोनों नंगी टाँगे फंसा दी और मजे से चुदवाने लगी। वो जोर जोर से गहरे धक्के मेरी चूत में मारने लगे। मेरे नंगे भीगे जिस्म का एक एक रोंगटा खड़ा हो गया।

ननदोई मुझे जल्दी जल्दी ठोकने और बजाने लगी। मेरी बुर से पट पट की आवाज आने लगी। जैसे गैस पर रखा पानी उबल रहा हो। वो अपनी पूरी शक्ति और ताकत से मुझे चोद रहे थे जैसे मैं उनकी सरहज नही बीबी हूँ। मैं चुद रही थी और मेरे दोनों हाथों में पड़ी लाल रंग की कई चूड़ियाँ टूट गयी थी और बिस्तर पर गिर गयी थी। उधर मेरे पैरों में पड़ी चांदी की पायल भी जोर जोर से हिल रही थी क्यूंकि ननदोई बहुत तेज तेज हौंक हौंक कर मुझे पेल रहे थे। मेरी पायल से कई घुंघरू भी टूट कर कमरे में इधर उधर बिखर गये थे। मेरा जिस्म बहुत ही भरा हुआ और बेहद सेक्सी था। आज तो मेरे ननदोई ने मुझे चोद चोदकर मेरे साथ हनीमून ही मना लिया था। मुझे उन्होंने ५० मिनट चोदा और पानी मेरे फटे भोसड़े में ही गिरा दिया। मैं आआआआअह्हह्हह… अई…अई…. .ईईईईईईई..करने लगी।

कुछ देर बाद मेरे बच्चे मुझे बुलाने लगे और उस कमरे तक आ गये जहाँ मैं ननदोई से चुदवा रही थी।

“मम्मी…..मम्मी….कहाँ हो तुम??” मेरे बच्चे बबली, पिंटू और रोहन चिल्लाने लगी

“छोड़िये ननदोई जी, बच्चे मुझे बुला रहे है” मैंने कहा

“सरहज जी…..कैसे आपको जाने दे…..आप इतना करारा माल है की आपको देखकर ही मैं पागल हो जाता हूँ” ननदोई मेरी चिकने पुट्ठे सहलाते हुई बोले। मैं इतनी बेशरम और बेहया औरत थी की चुदवाने के बाद भी मैं किसी चुदासी कुतिया की तरह पूरी तरह से नंगी दोनों टांग फैलाकर लेती हुई थी। ननदोई अब भी मेरी चूत सहला रहे थे।

“प्लीस….मत जाओ जान!!” ननदोई बोले

मैंने उनको दूर किया और नन्द की हल्की मैक्सी जल्दी से पहन ली और दरवाजा खोला। मेरे ननदोई, यानी बच्चो के फूफा नंगे बिस्तर पर पड़े थे। उन्होंने अपने लंड पर चादर डाल ली थी।

“मम्मी…..तुम फूफा के साथ कमरे में क्या कर रही थी??” बबली, पिंटू और रोहन पूछने लगे

“वो …..अचानक फूफा के बदन में बहुत तेज दर्द होने लगा तो मैं उनका बदन दबा रही थी” मैंने हकलाते हुए कहा

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शायद मेरे बच्चो को भी हल्का हल्का शक हो गया था की मैं उनके फूफा से चुदवा रही थी। फिर कुछ देर में मेरी नन्द मेरे बच्चो के लिए ढेर सारे खिलौने लेकर आ गयी। मेरे और ननदोई की चुदाई के बारे में किसी को कुछ नही मालुम पड़ा। दोस्तों, मैं १५ दिन अपनी नन्द के घर रुकी और रोज रात में चुपके से ननदोई से चुदवा लेती थी।

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