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नौकरानी ने प्यार का पाठ पढाया

मेरा नाम रोहन है मैं बेंगलुरु में रहता हूं। मैं पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं और पिछले 7 वर्षों से यही काम कर रहा हूं। मैं जिस कंपनी में जॉब करता हूं यह मेरी दूसरी कंपनी है। इससे पहले मैं किसी और कंपनी में जॉब करता था लेकिन जब मुझे इस कंपनी ने अच्छी सैलरी पर रखा तो मैंने उसके बाद अपनी पुरानी कंपनी छोड़ दी और अब इसी कंपनी में काम कर रहा हूं। इस कंपनी में मुझे काम करते हुए 4 वर्ष हो चुके है। मेरा नेचर बहुत कम बातें करने का है और शायद इसी वजह से मेरी पत्नी मुझे हमेशा कहती है कि तुम लोगों के सामने बिल्कुल ही चुप रहते हो। तुम उनसे ज्यादा बातें नहीं करते। मैंने अपनी पत्नी सोनिया से कहा क्या मैंने तुम्हें आज तक कभी कोई कमी होने दी। तुमने जब भी मुझसे जो भी डिमांड किया मैंने तुम्हें वह समय पर लाकर दे दिया उसके बाद भी तुम मुझसे इस तरीके की बात कर रही हो। यह तो बिल्कुल उचित नहीं है।

मैंने उसकी बातों को बिलकुल ही नकार दिया और उसके बाद उसने मुझसे बात करना ही कम कर दिया और ना जाने वह किस व्यक्ति के चक्कर में पड़ गई। मैंने जब यह बात पता करवाई तो मुझे मालूम पड़ा कि सोनिया का अफेयर किसी और व्यक्ति से चल रहा है। मैंने उसे कुछ भी नहीं कहा मैंने सिर्फ उससे एक शाम बैठ कर बात की और उसे समझाने की कोशिश की। कि यदि तुम इस प्रकार से करोगी तो इसका असर हमारी छोटी बच्ची पर पड़ेगा। अभी वह स्कूल में जा रही है। मैं नहीं चाहता कि हम दोनों के झगड़ों की वजह से उस पर कोई भी बुरा असर पड़े। वह कहने लगी कि मुझे तुम्हारे साथ रहना पसंद नहीं है लेकिन मैं जबर्दस्ती तुम्हारे साथ अपना समय बिता रही हूं क्योंकि मेरे माता-पिता ने तुम्हारे साथ मेरी शादी करवा दी थी। मुझे नहीं पता था कि तुम इतने बुरे होंगे। मैंने उसे कहा मैंने तुम्हारी हर जरूरतों को पूरा किया है लेकिन उसके बाद तुम यदि मुझसे इस प्रकार की बात कर रही हो तो मैं बिल्कुल भी इन बातों को बर्दाश्त नहीं करूंगा और यदि तुम्हें लगता है कि तुम्हें मेरे साथ नहीं रहना तो तुम अपना डिसीजन खुद ही ले सकती हो। वह मुझे कहने लगी ठीक है तुमने मुझे जब यह बात कह दी तो मैं अपना डिसीजन स्वयं ले लूंगी।

उसके बाद वह मुझे छोड़ कर उस व्यक्ति के पास रहने के लिए चली गई। मैं इतना ज्यादा शर्मिंदा हो चुका था कि मैं किसी को भी यह बात नहीं बता पा रहा था और मैं अंदर से घुटने लगा। मैं सोनिया से इस बारे में बात नहीं कर रहा था और मेरी बच्ची मेरे साथ ही थी मैं उसकी सही तरीके से देखभाल भी नहीं कर पा रहा था लेकिन कुछ दिनों बाद मेरे मम्मी पापा को यह बात पता चल गई। वह लोग हैदराबाद में रहते हैं और वह लोग मेरे पास बेंगलुरु आ गए। मेरे पापा मुझे समझाने लगे कि तुमने हमें यह बात पहले क्यों नहीं बताई। मैंने पापा से कहा कि मैं आपको बताना चाहता था लेकिन मुझे अभी डर था कि कहीं आप लोग मुझे ही गलत ना समझे। पापा ने सोनिया को फोन किया और उसे घर आने के लिए कहा लेकिन वह घर आने को तैयार नहीं थी। उसने मुझसे अब सारे संबंध ही खत्म कर लिए थे। मैंने उसे फोन किया तो उसने मेरा फोन रिसीव कर लिया और कहने लगी की मैंने तुमसे डिवॉर्स लेने का मन बना लिया है और कुछ समय बाद मैं दूसरी शादी कर लूंगी। मैंने उसे कहा कि फिर हमारी बच्ची का क्या होगा। वह कहने लगी कि तुम ही उसे अब देख लेना। मेरे तो जैसे पैरों तले जमीन खिसक गई और मैं अपने आप को बहुत अधूरा सा महसूस करने लगा। मैंने सोचा कि मैंने ऐसी क्या गलती कर दी जो सोनिया मेरे साथ इस प्रकार का व्यवहार कर रही है जैसे वह मेरे साथ कभी रहती ही ना हो। मेरे मम्मी पापा ने मुझे बहुत सहारा दिया। वह कहा कि तुम अब सोनिया को भूल जाओ और अपने आगे के जीवन के बारे में सोचो। मैंने भी इस बारे में सोचना छोड़ दिया और कुछ समय तक तो वह लोग मेरे पास ही थे जब तक मेरी जिंदगी पूरी पटरी पर नहीं आ गई। जब मैं इन चीजों को भूल गया तो मेरे मम्मी पापा कहने लगे कि बेटा अब तुम बच्ची की देखभाल के लिए कोई नौकरानी रख लो। मैंने भी एक नौकरानी रख ली उसका नाम सावित्री है। मैंने सावित्री को पहले ही सब कुछ समझा दिया था कि तुम्हें जितने पैसे चाहिए तुम्हें पैसे मिल जाएंगे लेकिन तुम मेरी बच्ची का ध्यान अच्छे से रखो कि वह कहने लगी साहब आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए मैं आपके बच्चे को अपनी बच्ची की तरह समझ कर रखूंगी।

मेरे मम्मी पापा भी मेरे साथ रहने लगे थे और सावित्री मेरी बच्ची की देखभाल करने लगी थी। सोनिया और मेरा भी डिवोर्स होने ही वाला था। हम दोनों का केस कोर्ट में चल रहा था। मैं भी नहीं चाहता था कि मैं उस औरत का चेहरा दुबारा कभी अपने जीवन में देखूं या फिर उसकी परछाई मुझ पर कभी भी पडे। मैंने अब सोनिया से अपने आप को पूरी तरीके से अलग कर लिया था। मेरे मम्मी पापा भी मुझे कहने लगे कि बेटा अब सब कुछ पहले जैसा ही होने लगा है। हम कुछ दिनों के लिए हैदराबाद जा रहे हैं। तुम अपना ध्यान रखना। मैंने उन्हें कहा ठीक है आप हैदराबाद हो आइये। वह लोग हैदराबाद चले गए और सावित्री मेरी बच्ची का ध्यान अच्छे से रखने लगी। मैं भी अपने काम पर पूरा ध्यान दे रहा था अब मैं पहले की सारी चीजों को भूल गया था। मैं जिस दिन घर पर था। उस दिन सावित्री घर का सारा काम कर रही थी और मैं भी अपने लैपटॉप पर बैठकर अपना काम कर रहा था।

वह मेरे सामने पोछा लगा रही थी। उसके स्तन मुझे दिखाई दे रहे थे। मैंने उसे अपने पास बुलाया और कहा क्या तुम्हारा पति तुम्हें खुश रखता है। वह कहने लगी हां साहब वह मुझे बहुत खुश रखता है। उसे मेरे बारे में सब कुछ पता था वह मुझे समझाने लगी कि साहब प्यार बहुत बड़ी चीज होती है यदि आप सोनिया मैडम को खुश रखते तो वह आपको छोड़कर नहीं जाती। उसने उस दिन मुझे प्यार का पाठ पढ़ाया। सोनिया तो मेरे हाथ से जा चुकी थी मैंने सोचा आज सावित्री से ही काम चला लिया जाए। मैंने उसे अपने पास बैठा लिया। उसे कहा मैं तुम्हारी चूत मारना चाहता हूं। वह कहने लगी नहीं साहब यह मैं नहीं कर सकती। मैंने उसे कहा तुम्हें मुझे खुश करना ही होगा तुम्हें पता है मेरे साथ कितना बुरा हुआ है। वह मेरी बातों से पिघल गई। वह मुझे कहने लगी ठीक है साहब मैं  आपकी इच्छा पूरी कर देते हू। उसने मेरा लंड को बाहर निकाला और घपा घप मेरे लंड को चूसने लगी। वह इतनी तेजी से मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले रही थी मेरा लंड आज तक किसी ने इतनी तेजी से अपने मुंह में नहीं लिया था। मेरा लंड भी एकदम टाइट और सीधा खड़ा हो गया। जैसे ही मैंने सावित्री के कपड़े खोले तो वह मुझे कहने लगी साहब आप मेरी गांड मार लीजिए। मैंने उसे घोड़ी बनाया हुआ था पहले तो मैंने उसकी चूत बहुत देर तक मारी। जब उसकी चूत मारकर मेरा मन भर गया तो मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड पर तेल लगा दो। उसने मेरे लंड पर तेल की मालिश की और मेरे पूरे बदन को भी उसने अच्छे से मालिश किया। जब मैंने उसकी गांड मे अपनी उंगली डाली तो वह कहने लगी आप मेरी गांड के अंदर अपने लंड को डाल दीजिए। मैंने भी अपने लंड को उसकी गांड के अंदर डाल दिया। जैसे ही मेरा मोटा लंड उसकी गांड के अंदर प्रवेश हुआ तो उसके मुंह से आह की आवाज निकल आई। वह मुझे कहने लगी आपका तो बहुत मोटा लंड है यदि आप सोनिया मैडम को लगातार डोज देते तो वह आपको छोड़कर कभी नहीं जाती। वह बार बार सोनिया का नाम ले रही थी। मेरे अंदर भी गुस्सा जाग रहा था। मैंने उसकी चूतड़ों को कसकर पकड़ लिया और उसे इतनी तेज गति से झटके मारे की उसकी चूतड़ों से खून बाहर आने लगा। मेरा लंड भी पूरी तरीके से छिल चुका था और मेरे लंड से भी खून निकल रहा था। जब मेरे लंड से खून निकलता तो मैं उसे और भी तेजी से धक्के मारता। वह मुझे कहने लगी आपने मेरी गांड फाड़ दी लेकिन मुझे उसकी गांड मार कर वाकई में मजा आ रहा था। मैंने काफी देर तक उसकी गांड मारी। जब उसकी चूतडे लाल हो गई तो उसके कुछ ही समय बाद मेरा भी वीर्य पतन हो गया। जब मेरा वीर्य पतन हुआ तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ। मैं अपने आप को अंदर से बहुत हल्का महसूस करने लगा। उसके बाद सावित्री मेरी इच्छा को हमेशा पूरा करने लगी।

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