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पति के दोस्त को सेक्स की गोली दे के चुदवाया

मुनीश ने मुझे एक तिरछी नजर से देखा, चूत के बाल के साथ साथ मेरी चुचियों के अग्रभाग में भी जलन सी दौड़ उठी. मैंने मुनीश के सामने अपने बूब्स को हिलाए और गांड भी बहुत मटकाई लेकिन वो मेरे हाथ नहीं आ रहा था. पति का ये दोस्त मुझे भाभी कहते हुए थकता नहीं था. लेकिन अपनी इस प्यासी भाभी की चूत में लंड घुसाने की औकात नहीं दिखा रहा था. वो मेरे पति से 7 8 साल छोटा था पर दोस्ती काफी थी दोनों में. मैं मचल रही थी उसका लौड़ा लेने के लिए! लेकिन वो था की कभी गन्दी नजर से देखता ही नहीं था.

 

मैं मौके की तलाश में थी की कब उसे अपनी बाहों में ले के अपनी चूत चटवाऊ और उसका लौड़ा खड़े खड़े अपनी बुर म डलवाऊ. और वो मौका मुझे पुरे 1 साल की तपस्या के बाद मिला. पति अपनी कम्पनी की कोंफेरेंस के लिए मुंबई जा रहे थे. उन्होंने मुझे भी साथ में जाने के लिए कहा. लेकिन मैने कहा नहीं जी मैं वहां पर बोर होती हूँ इसलिए नहीं आना मुझे. मैंने कहा की मैं अपने पापा के घर चली जाउंगी दो दिन के लिए. पति ने कहा ठीक है. वो मुझे छोड़ के गए और मैंने जाने का फैसला बदल लिया.

मैं वही अपर रुकी शाम को मैंने मुनीश को कॉल किया. और उसको बताया की आप के भाई मुंबई गए हैं. वो बोला हां मुझे पता हैं बताया था मुझे. मैंने कहा मुझे पापा के घर जाना था लेकिन कुछ तबियत खराब थी इसलिए गई नहीं.

वो बोला, ओह!

मैं कहा, एक काम करोगे आप मेरा?

वो बोला, हां बोलो ना भाभी.

मेरे लिए खाना दे जाओगे आप, होटल से.

वो बोला हां स्योर.

मैंने कहा, आप का भी पार्सल करवा लेना, साथ में बैठ के खायेंगे, मुझे अकेले खाने में मजा नहीं आएगा.

वो कुछ बोला नहीं और उसने फोन काट दिया.

उसके आने से पहले मैं नहाने गई मैंने अपनी सब से सेक्सी नाइटी डाली जिसके अन्दर मेरी चुचिया कुछ एक्स्ट्रा ही बड़ी दिखती थी. और निचे की और बगल की झांट साफ़ कर दी. मैं बाथरूम से निकली ही थी की घंटी बजी दरवाजे की. मुनीश ही होगा वो मैं जानती थी. गिले बालों को मैंने अपने शोल्डर पर रख दिया जिसके अन्दर से अभी भी पानी टपक रहा था. मैंने नाइटी के अन्दर ना ही ब्रा पहनी थी ना ही पेंटी. और मैं जानती थी की मेरी नाइटी गांड की फांक में फसेगी और मुनीश वो देखेगा जरुर.

नहाने जाने से पहले मैं ओरेज ज्यूस बनाया था और एक ग्लास के अंदर मेल सेक्स की दवाई घोल दी थी. आज मैं मुनीश से कुछ भी कर के चुदवाना ही चाहती थी.

दरवाजा खोला तो उसने मुझे ऊपर से निचे देखा. मैंने उसके हाथ से पार्सल लिया और आगे आगे चली. मैं गांड में फंसी हुई नाइटी उसे दिखाना चाहती थी. वो आ के सोफे पर बैठ गया. मैं किचन से दो ग्लास ज्यूस ले आई. मुनीश को पूरा निचे झुक के ग्लास दिया. बिना ब्रा के मेरा क्लीवेज और बूब्स उसके सामने थे. उसने वहां देखा लेकिन फिर नजरें हटा दी, भोंदू कही का!

वो ओरेंज ज्यूस पी रहा था और मैं उसे ही देख रही थी. मेरा पति उम्र में पकने लगा था और बिस्तर में उसका दम अब कम हो चला था. मुनीश के मजबूत कंधे और मस्त बॉडी को देख के मेरी चूत में पानी चूत रहा था. मुनीश ने ज्यूस पिने के बाद 10 मिनिट में ही खाने के लिए कहा. मैं जानती थी की 10-15 मिनिट और में तो उसका लंड खड़ा होना ही होना था.

खाने के दौरान मैंने उसे बहुत जिद्द की और जिद्द के अन्दर थोड़ी खिंचातानी भी. मैंने जानबूझ के उसके लौड़े को टच कर लिया. मुनीश ने मुझे देखा और फिर मेरी बूब्स की गली को. मैंने सेकंड के फ्रेक्सन जितना हाथ उसके लंड पर रखा और फिर उसे हटा लिया. लेकिन उतना टच उसे गरम करने के लिए काफी था. वो अब उठा और उसने मुझे कमर से पकड लिया. मैं भी कुछ ऐसा ही चाहती थी उस से. उसका लंड मेरी नाइटी से मेरी गांड को टच हो रहा था. अंदर पेंटी नहीं थी इसलिए लौड़े का गरम गरम टच एकदम करीब लग रहा था. मुनीश ने हाथ आगे कर के मेरे बूब्स मसल दिए. मैं तो जैसे कब से अपनी बाहों को उसके लिए खोल के बैठी थी. आज मुझे उसे इनटोक्सीकेट कर के अपना काम करवाना पड़ा!

मुनीश ने मुझे अपनी तरफ घुमा लिया. मैं उसकी आँखों में देखने लगी. उसकी आँखों में हवस भरी हुई थी. उसने मुझे कान के पास धीरे से कहा, आई लव यु भाभी.

मैंने उसके लंड को हाथ में पकड़ लिया. और कहा, आई लव यु टू मुनीश.

वो बोला: कम ओन मेरे लंड को बहार निकालो जल्दी से.

मैंने उसकी पेंट की क्लिप को खोला और फिर ज़िप को निचे किया. अन्दर हाथ डाल के जब उसके लौडे को बहार निकाला तो मेरी आँखे खुली की खुली रह गई. उसका लंड पुरे 7 इंच का था और चमकदार भी.

मैंने उसे हाथ में भर के ऊपर निचे स्ट्रोक किया. वो बेताब था. उसने मेरी नाइटी को डोरी को पकड़ के खिंच दिया. मेरी नाइटी एक ही सेकंड में निचे गिर गई. और उसको मेरी चूत को देख के चुदाई का अलग ही नशा चढ़ गया. उसने हाथ से मेरी मखमली क्लीन शेव्ड चूत को पकड़ा और हिलाने लगा मेरी चूत की फांके एकदम गीली थी.

और फिर उसने मुझे अपनी बाहों में उठा लिया. और मुझे एकदम होर्नी फिल हुआ जब उसने एकदम मजबूती से मुझे पूरा उठा के अपने कंधो के ऊपर बिठा दिया. मेरा बुर उसके मुहं के सामने था. मैंने हाथ से उसके बालों को पकडे हुए थे. और वो मेरी चूत चाटने लगा.

सच में देर आये दुरस्त आये, सब्र का फल मीठा होता हैं वो दोनों कहावतो का सच होने का अनुभव हुआ मुझे. मुनीश एकदम होर्नी था और ऐसे चूत चाटने से उसने ये भी दिखा दिया था की आज मुझे एक अलग ही सेक्स का अनुभव होना था.

उसने मुझे दिवार की तरफ बढ़ा दिया. मेरी कमर दिवार को टच हो रही थी. और मुनीश बड़े ही सेक्सी ढंग से मेरी चूत को चाट रहा था. अरे चाटना क्या वो तो अपनी जुबान से मेरी चूत को चोद ही रहा था. पूरी जबान अन्दर डाल के वो मुझे मजे दे रहा था. और अपने हाथ से मेरे मम्मे भी मसल रहा था.

और फिर 10 मिनट तक उसने मेरी चूत को ऐसे ही चाटी. एक बार मेरे झड़ने के बाद उसने चूत को चाट के साफ़ कर दिया. और फिर मुझे निचे उतारा. मैंने भी उसके लंड को उसी वक्त अपने मुहं में ले लिया और चूसने लगी. उसका लौड़ा एकदम सख्त था. और उसने भी आजकल में ही झांट बनाई थी ऐसा लग रहा था. हलके हलके उगे हुए बाल मुझे फिल हो रहे थे.

मैंने लौड़े को गले तक भर के मुनीश को बड़ा ही मजा करवाया. मैं जानती थी की उसका लौड़ा सेक्स के पावर की गोली की वजह से जल्दी खाली नहीं होगा. इसलिए मैं बिंदास्त चुस्ती रही.

कुछ देर के बाद मुनीश ने मेरे बाल पकडे और ऊपर किया. फिर उसने मेरे बूब्स को अपने मुहं मेंले लिया. वो बूब्स को लिक कर रहा था और उसके हाथ मेरी गांड की फांक में थे. वहां से हाथ को वो अन्दर ले गया. और मेरी गांड के होल को और चूत के होल को अपने हाथ से हिलाने लगा. मैं तो जैसे मदहोश होने लगी थी. मैंने उसके लंड को हाथ से पकड़ा और हिलाते हुए कहा, कम ओन फक मी नाऊ.

ये सुन के मुनीश ने मुझे घोड़ी बना दिया. पीछे से मेरी गांड को खोल के एसहोल को और चूत को हलके से लिक किया. और फिर अपने लौड़े को उसने मेरी चूत में घुसा दिया अह्ह्ह्हह क्या फिलिंग थी इतना बड़ा लंड पहली बार लेने की! मेरे मुहं से कराहने का आवाज निकल गई. मुनीश ने मुझे कंधे से पकड लिया और वो मुझे आगे पीछे कर के मस्त मौला चुदाई करने लगा. उसका बड़ा लंड बड़ा ही बवाल मचा रहा था.

मुनीश मुझे धक्के देते हुए आगे पीछे कर रहा था और उसका लंड मजे से मेरी चूत में अन्दर बाहर हो रहा था. मुझे बहुत ही मजा आ रहा था उस गर्म गर्म लंड को मेरी बुर में घिसवाने का.

कुछ देर तक मुनीश ने मुझे खूब चोदा. और फिर हम दोनों अलग हुए. अब वो निचे बैठ गया और मुझे अपनी गोदी में चढ़ा दिया. मैं बूब्स को हिलाते हुए उसके ऊपर उछल उछल के चुदवा रही थी. और मुनीश जोर जोर से धक्के दे के मेरी चूत को मजे से पेलता जा रहा था.

10 मिनिट और चुदवाने के बाद मैंने अपने चूत का पानी एक बार फिर से मुनीश के लोडे पर बहा दिया. और अब की उसके लौड़े ने भी मेरे साथ बहना मुनासिब सा समझा. हम दोनों एक दुसरे से चिपक के सो गए.

मुनीश का लंड अभी भी ठंडा तो नहीं हुआ था. मैंने उसको एक रात के लिए मेरे साथ ही रुकने को कह दिया. अब वो खड़े लंड के साथ थोड़े ही अपने घर जाता!!!

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