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बुआ की बेटी को खेल खेल में चोद दिया

बुआ की दिलकश बेटी को खेल खेल में चोद दिया,, हेल्लो फ्रेंड्स मेरा नाम प्रिंस है। आजमगढ़ में रहता हूँ। मै देखने में खूब गोरा हूँ। मेरी भूरी आँखों को देखकर लडकियां बहोत तेजी से आकर्षित होती हैं। लड़कियों की मटकती बलखाती नागिन जैसी कमर देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता है। मेरा लंड दूध की तरह गोरा है। मेरे लंड ने अब तक कई चूत की खुजली मिटाई है। इससे मैंने अब तक कई सील तोड़ी हैं। मेरे को बचपन से ही चुदाई करने का बहोत शौक था। लड़कियों को लंड चुसाने में मेरे को बहोत मजा आता है। इसी तरह मैंने अपनी बुआ की लड़की को भी अपना लंड चुसाकार चोद दिया। फ्रेंड्स मै अब अपनी कहानीं ओर आता हूँ। ये बात 2015 की है जब मैं 21 साल का था जब मैंने बुआ की बेटी स्वीटी को चोदा था।

स्वीटी एक मस्त माल थी। वो मेरे ही उम्र की थी। देखने में कैटरीना जैसी लगती थी। मेरा लंड अक्सर उसे देखकर आहे भर लेता था। कभी कभी तो मेरे को मुठ मार के ही काम चलाना पड़ता था। जब भी मेरे को उसे चोदने का ख्याल आता था। मेरे हाथ से मेरी रेलगाड़ी निकल पड़ती थी। मै बाथरूम में जाकर खूब मुठ मार मार कर अपना माल निकाल कर लंड को तसल्ली दिलाता था। सर्दियों के दिन थे। स्वीटी बुआ के साथ विंटर की छुट्टी मनाने मेरे घर आई हुई थी। मैं बहोत खुश था। हम लोग रात भर बात करते थे। मै उसे हमेशा ताड़ता ही रहता था। उसके बड़े बड़े दूध मेरे को अपनी तरफ आकर्षित कर रहे थे। वो अक्सर कपड़ा निकाल के ही सोती थी। बचपन से ही उसकी आदत थी। वो कभी टाइट कपड़ा पहनकर सो ही नही पाती थी। मेरे को उसका सेक्सी भरा हुआ बदन इसी बहाने ताड़ने को मिल जाता था। उसकी आँखे बहोत ही नशीली थी। हाथ में उसने लंबे लंबे नाखून भी कर रखे थे। मेरे को उसका दूध पीने का मन करने लगा। जब भी वो मेरी तरफ देखती थी। मेरे जिस्म में आग सी दौड़ जाती थी। मै भी उसी रूम में लेटता था जहां वो लेटती थी। एक दिन मेरे घर कुछ और मेहमान आये हुए थे। बाहर वाले कमरे में जहाँ हम लोग सोते थे। वही उन लोगो का बिस्तर लग गया। हमारा बिस्तर घर के सबसे एकांत वाले कमरे में लगा दिया गया। वो कमरा सबसे पीछे थे। ख़ुशी की बात तो मेरे लिए ये थी की स्वीटी भी मेरे साथ लेटने वाली थी। उसके कपड़ा निकाल के सोने का राज़ सब लोग भूल गए। मेरी तो किस्मत खुल गयी। हम दोनों एक ही बिस्तर में एक ही रजाई में लेटने आये ही थे, तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया। मैंने दरवाजा खोला तो बुआ खड़ी थी।

बुआ स्वीटी को अपने पास लिटाने आयी थी। मैंने स्वीटी को आँखों आँखों से ही मना कर दिया। उसने बुआ से कह दिया। आज मै सो लूंगी किसी तरह से। बुआ भी ठीक है कह कर चली गयी। स्वीटी का मन भी आज मेरे साथ सोने का था। रात के करीब 10 बज गए, बात बात में मेरे को पता ही नहीं चला। हम लोग तकिया से खेल रहे थे। स्वीटी अचानक बेड से नीचे गिरने लगी। मैंने उसे पकड़कर बिस्तर पर खीच लिए। वो मेरे ऊपर गिर गयी। मेरी आँखों में देखने लगी। मै भी उसकी खूबसूरती को निहारने लगा। उसके होंठो को देखकर चूमने का मन हो चला। लेकिन उधर से सिग्नल का इंतजार था। कुछ देर तक देखने के बाद वो उठ गयी। उसने दरवाजा खोला और जाने लगी। मैंने उसे फिर से प्यार से बुला लिया। उसे बिस्तर पर बिठाकर पूंछने लगा।

मै: क्या बात है स्वीटी तुम जा क्यों रही हो??
स्वीटी: पता नहीं क्यों मेरे को बहोत अजीब सा फील हो रहा है।
मै: क्या फील हो रहा है?
स्वीटी: मै तुम्हे नहीं बता सकती!
मै: अच्छा ठीक है चलो सो जाओ अब हम लोग नहीं खेलेंगे।

फ्रेंड्स शुरूवात तो चुदने की यही से शुरू हो गयी थी। अब तो किसी तरह से रोक कर प्रोग्राम आगे बढ़ाना था। वो फिर से आकर रजाई में घुस गयी। मै भी दरवाजा बंद करके वापस बिस्तार पर आ गया। कुछ देर तक तो मैं यूं ही लेटा रहा। स्वीटी को नींद नहीं आ रही थी। वो करवटे बदल रही थी। उसका भी चुदने का मूड बन गया था।

मै: क्या बात है! स्वीटी नींद नहीं आ रही क्या?
स्वीटी: तुम्हे तो पता ही है कि कपडे पहन कर मैं नहीं सो पाती हूँ।
मै: तो कपडे निकाल दो??
स्वीटी: पागल हो क्या तुम्हारे सामने कपडे निकलने में मेरे को शर्म आती है!
मै: तुम्हारी जगह मै होता तो निकाल देता।
इतना कहते ही वो ख़ुशी से कहने लगी।
अच्छा तो अब निकाल दो।

मै: ठीक है मैं भी निकाल देता हूँ तुम भी निकाल दो। लेकिन कोई किसी से बताएगा नहीं की हम दोनों नंगे ही लेटे थे।
स्वीटी ने हाँ में हाँ मिला दी। मैंने अपना पैजामा निकाल कर रख दिया। उसके बाद कुर्ता निकाला और बनियान निकाल कर मैं सिर्फ अंडरबियर में हो गया। उसने भी अपनी टी शर्ट निकाली और नीचे लैगी पहने थी उसे निकाल कर ब्रा पैंटी में हो गयी।

मै: अंडरबियर भी निकाल दूँ!
स्वीटी: नहीं
मै: मैंने जितना पहना है। उतना ही पहनो तुम भी अपनी ब्रा को निकाल दो!
स्वीटी: निकाल देती हूँ!

इतना कहकर वो अपने काले रंग की ब्रा निकाल कर बाहर चुपके से रखने लगी। शर्माते हुए वो मेरे को देखने लगी। मैंने उसके हाथ से ब्रा छीन लिया। वो मेरे से छुडाने लगी। उसके दोनों बूब्स मेरे से चिपक गए। मै अपनी पीठ के पीछे उसकी ब्रा को किये हुए थे। जिससे वो मेरे से चिपक रही थी। जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत में लगा। वो मेरे से दूर हो गयी। शर्माते हुए अपना मुह ढक ली। हम दोनों के जिस्म में आग लगी हुई थी। कही न कही मेरे को सिग्नल दे रही थी। मेरे से चिपकना उसका सिग्नल था। जानबूझकर वो मेरे को अपने बूब्स लगा रही थी। मैं भी जिसका इंतज़ार कर रहा था। मैंने उसे अपनी बाहों में रजाई के अंदर ही अंदर भर लिया।

उसके हाथ में ब्रा देते ही वो खुश हो गयी। हँसते हुए अपना मुह बाहर निकाल ली। उसने बड़े ही प्यार से मेरे गाल पर किस कर लिया। मैने भी उसका जबाब दे दिया। मैंने भी जोर से उसके गालो पर किस किया। हम दोनों के बीच चुम्बन का कॉम्प्टीशन हो गया। न वो मेरा एक भी ज्यादा होने देती और नहीं मैं उसका। मैंने अपना होंठ उसके होंठ पर रख दिया। अब फिर से कॉम्प्टीशन हो गया। मै उसके नीचे के होंठ को चूसता और वो मेरे ऊपर के चूस कर मेरा साथ दे रही थी। हम दोनो का मौसम बनने लगा। मैंने उसके गुलाबी होंठ को चूसते चूसते अपना हाथ उसके बूब्स पर रख दिया। उसने मेरा विरोध नहीं किया। मै समझ गया आज ये भी गर्म है। उसके बूब्स को दबाने में कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था।

मैंने उसके दूध के दर्शन के लिए रजाई को धीरे धीरे नीचे सरकानी शुरू कर दी। रजाई हम लोगो के कमर पर अटकी थी। मैंने उसके दूध का दर्शन किया। हाथो में लेते ही वो मेरे को देखने लगी। वो भी मेरा साथ दे रही थी। मेरे हाथों के ऊपर अपनी हाथो को रखकर वो बहोत ही जोर जोर से दबाने लगी। मैं भी जोर से दबा कर पीने लगा। स्वीटी के गोरे दूध पर काले निप्पल बहोत ही मस्त लग रहे थे। मैंने दोनों को बारी बारी पीना शुरू किया। मेरा लंड उसकी चूत पर रखा हुआ था। मै उसके ऊपर लेटकर उसका दूध निचोड़ कर पी रहा था। वो मेरे से बार बार चिपक कर मेरे को दबा रही थी। साथ ही साथ जोर जोर से“……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की आवाज निकाल रही थी। कुछ देर तक दूध पीने के बाद मैने भी अपना अंडरबियर निकाला।

मेरा लंड उसके शरीर से रजाई के अंदर ही स्पर्श हुआ। वो लंड देख कर चौंक गयी। वो कहने लगी “बाप रे कोई बड़ा सा मोटा गरमा गरम रॉड जैसा लगा है मेरे कमर में” मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपने लंड को स्पर्श कराया। वो मेरे लंड को जकड़े हुए पकडे थी। जैसे सर्दियों के मौसम में हाथ सेक रही हो। मैने अपना लंड उसके मुह के करीब ले जाकर कहा।

मै: जान मेरी इस लंड को तुम चूसो!
स्वीटी: नहीं मेरे को लंड नहीं चूसना! बहोत गन्दा लगता है। मेरे कों उल्टी हो जायेगी।

मैंने भी ज्यादा जबरदस्ती नही की। एक बार मना करने पर मैं मान गया। हम लोगों को ठंडी के मौसम में भी पसीना छूट रहा था। मैंने रजाई को मोड़ कर नीचे कर दिया। मेरे सामने स्वीटी पैंटी में लेटी थी। मैं कुछ भी करता वो मना नहीं कर रही थी। मैंने उसकी पैंटी को खीचकर निकाल दिया। मेरा लंड कड़ा हो रहा था। लोहे की रॉड की तरह टाइट हो गया। मेरे को चोदने की उत्तेजना होने लगी। मैं जल्दी से उसकी टांग को फैलाकर अच्छे से चूत का दर्शन करके उसे पीने लगा। वो मेरे को चूत में दबाकर सिसकने लगी। जोर जोर की आवाज “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…” उसकी मुह से निकलने लगी। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ना शुरू किया।

स्वीटी मेरे लंड को देख कर डर रही थी। उसकी टांगो को फैलाकर उसकी गांड के नीचे तकिया लगा दिया। उसकी चूत अच्छे से खुली हुई थी। मैंने अपना लंड उसकी चूत के छेद पर लगाया फिर जोर का धक्का मार दिया। वो जोर से चिल्लाती उससे पहले मैंने उसका मुह दबा लिया। मेरे लंड का आधा हिस्सा उसकी चूत में घुस गया। वो जोर जोर अंदर ही अंदर चिल्लाने लगी। मुह दबा होने के कारण वो धीरे धीरे सुसुक सुसुक कर “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” की आवाज निकाल रही थी। मैंने जोर का झटका लगाकर अपना पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया। मेरा पूरा लंड खाकर वो जोर जोर से सुसुकने लगी। उसकी चूत फट चुकी थी। मेरे से पहले भी वो किसी और से चुदवा चुकी थी। ऐसा मेरे को लग रहा था। लेकिन उसकी सील टूटने का राज़ बैगन से चुदने का निकला। उसने मेरे को बाद में बताया। उसकी उठी कमर के साथ चूत भी उठी थी। मै अपनी कमर ऊपर नीचे करके पेल रहा था। उसकी चूत को चोदने में मेरे को जितना मजा आया उतना तो मेरे को किसी और चूत को चोदने में नहीं आया था। मै अपनी कमर उठा उठा कर चुदाई जारी रखी। वो अब धीरे धीरे से “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्ह ह..अ ई…अई…अई…..” की आवाज निकाल रही थी। मेरा लंड जड़ तक घुसकर बुआ की लडकी को पूरा मजा दे रहा था।

“ओह्ह ओह्ह ओह सी सी सी fuck me hard प्रिंस!!” स्वीटी भी मेरे को और जोर से fuck करने को कह रही थी। मेरी स्पीड बढ़ गयी। जोर की चुदाई से उसकी चूत का बुरा हाल हो गया वो अपने हाथों से चूत को मसल कर मजा ले रही थी। मै शरीर से हट्टा कट्टा था। मैंने फिर उसे अपनी गोद में उठा लिया। उसकी चूत में अपना लंड सेट करके उसे उछाल उछाल कर चोदना शुरू कर दिया। वो मेरा गला पकडे आराम से झूला झूल कर चुदवा रही थी। मेरे को उसे उछाल कर चोदने में ज्यादा मजा आ रहा था। मेरे को उसकी चूत का भरता लगाना था। मैंने उसकी भोसड़ी की चुदाई और तेज कर दी। वो मेरे लंड की रगड़ को सह नहीं पायी। वो मुह से “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ—ऊँ…ऊँ….” की आवाज के साथ झड़ गयी। मेरी भी स्पीड अब बढ़ रही थी। मैं भी जोर जोर से चोदने लगा। उसकी गीली चूत में लंड अब आसानी से अंदर बाहर हो रहा था।
उसकी चूत ने तो अपना जूस निकाल दिया था। अब बारी थी मेरे लंड की। मैं भी जोर जोर से चुदाई करके रुक गया। मैंने चुदाई रोक के सारे माल को उसको गोद में लिए ही उसकी चूत में गिरा दिया। स्वीटी मेरे माल को अपनी चूत में आभास करके मुस्कुरा रही थी। फिर मैंने उसे नीचे उतारा। उसकी चूत से ढेर सारा माल गिर रहा था। उसने कपडे से साफ़ किया। मैंने अपना लंड भी उसी से साफ़ करवाया। हम लोग रात भर नंगे लेटे रहे। उस रात कई बार चुदाई की। आज भी वो मेरे घर आती है तो एक न एक बार मौक़ा निकाल कर चोद देता हूँ।

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