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रबीना को पटा कर चोदा

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम अश्वनी है और मैं आज जो आपके लिए कहानी वो मेरी जिन्दगी की सच्ची कहानी है | ये मेरी पहली कहानी है मुझे आशा है की आपको ये कहानी अच्छी लगेगी | मेरी उम्र 26 साल है और मैं दिखने में काफी हैण्डसम हूँ | अब मैं आप का ज्यादा समय ना बर्बाद करते हुए सीधे कहानी पर ले चलता हूँ |

मैं एक बहुत ही छोटे से गाँव का रहने वाला हूँ | मेरी एक छोटी इलेक्ट्रोनिक की शॉप है | मैं रोज वही बैठा करता था मैं आप लोगो को बता दूं की एक लड़की थी जो रोज मेरी शॉप के पास से ही गुजरा करती थी | मेरी शॉप के पड़ोस में एक स्कूल था वो वहीँ पढने जाती थी | मैं हमेशा उसको देखता था तो उसको पटाने के बारे में सोंचता था | वो भी मुझे लाइन देती थी और रोज जब मैं उसे देखता था तो वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा देती थी | उसकी उम्र लगभग 22 साल होगी और उसका फिगर 30-28-34 का था | मैं जब भी उसकी मटकती हुई गांड को देखता था तो मेरा लंड हमेशा खड़ा होने लगता था | एक दिन की बात है वो मेरी शॉप पे कुछ सामान लेने आई तो मैं उसको देखकर बहुत ही खुश हो गया | मैंने उससे उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम रबीना बताया | मैंने थोड़ी सी उसकी तारीफ करते हुए कहा की आप बहुत खूबसूरत है उसने एक प्यारी सी स्माइल दी और चली गयी |

मैं समझ गया की उसके दिल में भी मेरे लिए कुछ तो जरूर है | जब वो अपने स्कूल जाती थी तो मैं रोज उसको अपनी शॉप से देखता था कुछ दिन सिलसिला ऐसे ही चलता रहा | एक दिन मैंने बड़ी हिम्मत करके उसको एक लेटर लिखा की मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो फिर मैं उसके इन्तजार में बैठ गया | मैंने सोंच लिया था की आज मैं मामला फाइनल ही करके रहूँगा | वो मेरी शॉप के सामने से निकली तो मैंने उसको आवाज दी | मेरी आवाज सुनकर वो मेरी शॉप पर आई | मैंने उससे कहा की रबीना मैं तुमसे एक बात कहना चाहता हूँ अगर तुम बुरा ना मनो तो | उसने कहा की तुमको जो भी कहना है वो मैं स्कूल से आने के बाद में सुनूगी मुझे देर हो रही है | फिर वो चली गयी मैं उसकी छुट्टी होने का इन्तजार करने लगा | जब उसकी छुट्टी हुई तो मैं रास्ते पर नजरे गडाए हुए बैठा था | थोड़ी देर बाद वो मेरी दुकान पर आई और मुझसे कहने लगी की अब बताओ तुमको जो भी कहना है | मैंने उसको वो लेटर दिया और कहने लगा की मैं जो भी कहना चाहता हूँ वो इस लेटर में लिखा है अगर तुमको पसंद आये तो जवाब जरूर देना | उसने मेरे हाँथ से वो लेटर ले लिया और चली गयी |

अगले दिन सन्डे था जिसके कारण वो स्कूल नहीं आई और मैं पूरा दिन उसका इन्तजार करता रहा | वो पूरा दिन उसके इन्तजार में निकल गया और मेरे मन में हलचल मची हुई थी की ना जाने उसको मेरी बात अच्छी लगी की नहीं कहीं ऐसा ना हो की वो मन कर दे | पूरे दिन मैं उसके बारे में सोंचता रहा और उस दिन मैं रात को भी नहीं सो पाया उसका ही ख़याल मेरे मन में बसा हुआ था | अगले दिन मैं सुबह जल्दी ही तैयार हो गया और मैंने जाकर दुकान खोली | मैं बैठ कर उसका इन्तजार करने लगा | जब उसके स्कूल का टाइम हो गया तो मैंने देखा की वो आ रही थी और उसके हाँथ में एक लेटर था | मैंने सोंचा क्या हुआ कहीं वो मेरा लेटर लौटाने तो नहीं आ रही है पर जब वो मेरे पास आई तो उसने मुझको वो लेटर दिया और मुझसे कहने लगी की अश्वनी तुम्हारे लेटर का जवाब मैंने इसमें लिख दिया है पढ़ लेना | वो मुझे लेटर देकर चली गयी मैंने उसका लेटर खोलकर देखा तो मैं ख़ुशी से पागल हो गया | उसमें लिखा हुआ था की मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ पर तुमसे कहने की हिम्मत नहीं कर पायी |

मैं बहुत खुश था छुट्टी के समय वो मेरी शॉप पे आई और मुझसे कहने लगी की तुमने मेरा जवाब पढ़ लिया | मैंने कहा हाँ जानू मैंने पढ़ लिया है मैंने उससे कहा रबीना तुम्हारे पास मोबाइल है तो उसने कहा नही मेरे पास मोबाइल नहीं है | मैंने उसको अपना मोबाइल देते हुए कहा की तुम मेरा मोबाइल लेती जाओ मुझे तुमसे बात करनी है | पहले तो उसने कहा की नहीं मैं तुम्हारा मोबाइल नहीं ले सकती पर मेरे बहुत कहने पर वो मान गयी और मेरा मोबाइल ले लिया | उसने जाते समय मेरे गाल पर एक किस किया फिर वो चली गयी | मैं बहुत खुश था मैंने जाकर एक नया मोबाइल खरीदा और मैंने उसके पास फोन मिलाया | उसने फोन उठाया और वो बहुत ही धीमी आवाज में बात कर रही थी | उसने कहा की अभी मेरे अब्बू घर पर है वो चले जाये फिर मैं तुमसे बात करूंगी | लगभग एक घंटे बाद उसने फोन किया और कहने लगी की मेरे अब्बू चले गए है और फिर हम ने बहुत सी प्यार भरी बातें की | अब हम रोज बातें करने लगे | एक दिन मैंने उससे कहा की रबीना मुझे तुमसे मिलना है | उसने कहा की मैं घर से सिर्फ स्कूल जाने के लिए ही जाती हूँ और कहीं मुझे घर वाले जाने नहीं देते है और घर पर तुम आ नहीं सकते अगर किसी ने देख लिया तो गड़बड़ हो जायेगी |

मैंने कहा ठीक है मैं कोई जुगाड़ करता हूँ अगले दिन मैंने मेडिकल से जाकर नींद की गोलियां खरीदी और जब रबीना स्कूल से वापस आई तो मैंने उसको दे दी और कहा की ये नींद की गोलियां है तुम इनको चाय में मिलाकर अपने घर वालों को पिला देना और फिर मुझे फोन करना मैं तुमसे मिलने आऊंगा | उसने कहा ठीक है फिर वो गोलियां लेकर चली गयी | शाम हो चुकी थी मैंने शॉप बंद की और अपने घर फोन करके कह दिया की आज मेरे एक फ्रेंड का जन्मदिन है मैं देर से घर आऊंगा | फिर मैं रबीना के फोन का इन्तजार करने लगा | लगभग 9 बजे रात को उसका फोन आया उसने कहा की सब सो चुके है तुम आ जाओ | मैंने कहा की इतनी देर क्यूँ कर दी उसने कहा की मैंने दवा चाय की जगह खाने में मिलकर खिलाई है वरना सब चाय पीकर सो जाते तो सब को शक हो जाता | मैंने कह ठीक है | फिर मैं उसके घर पहुंचा उसने दरवाजा खुला ही रखा था | मैं अन्दर पहुंचा तो रबीना मेरे सामने खड़ी थी | मैं तो उसको देखता ही रह गया क्या कमाल लग रही थी वो उसने पीले कलर का सूट पहन रखा था | मैंने उसको अपनी बाँहों में भर लिया और उसकी गर्दन को चूमने लगा | उसने मुझे रोकते हुए कहा की यहाँ नहीं बेडरूम में चलते फिर हम दोनों उसके बेडरूम में पहुंचे | वहां पहुँचते ही उसका मिजाज कुछ बदल सा गया था | वो मुझे कातिल निगाहों से घूर रही थी फिर वो मुझपर झपट पड़ी और मुझे किस करने लगी | मैंने कभी नहीं सोंचा था की वो इतनी गरम है उसने मुझे बेड पर गिरा लिया और मुझे चूमने लगी |

उसने मेरी शर्ट निकाल दी और मेरे पूरे बदन को चूमने लगी मुझे भी जोश आ रहा था मैं उसके बूब्स को मसलने लगा और उसका कुरता निकाल कर फेंक दिया और मैंने उसकी सलवार भी उतार दी अब वो मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी | काले रंग की ब्रा और पैंटी में उसका गोरा बदन और भी मस्त लग रहा था मैं उसके पूरे बदन को चूमने लगा | मैंने उसकी ब्रा को निकाल दिया और उसके बूब्स को आजाद कर दिया | मैं उसके बूब्स को अपने मुहँ में लेकर चूसने लगा साथ मैं मैंने उसकी पैंटी में हाँथ डाल दिया और उसकी चूत को सहलाने लगा वो गरम हो रही थी | उसके मुहँ से अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह की आवाजे निकने लगी थी | फिर उसने मुझसे कपडे निकालने को कहा | मैंने अपने कपडे निकाल दिए और उसने मेरी अंडरवियर को निकाल दिया और मेरे लंड को बाहर निकाल कर उसने अपने मुहँ में ले लिया और चूसने लगी मुझे बहुत मजा आ रहा था | अब मैंने उसकी पैंटी निकाल दी और उसकी दोनों टांगो को फैलाकर उसकी चूत पर अपना लंड रख दिया | मैंने उसकी चूत में अपना लंड घुसाया पर मेरा लंड अन्दर नहीं जा रहा था क्यूंकि उसकी चूत बहुत टाइट थी मैंने जोर से धक्का लगाया तो मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया | वो दर्द से चीखने लगी मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसको किस करने लगा | उसकी चूत से खून निकल रहा था क्यूंकि वो अभी तक वर्जिन थी | कुछ देर बाद वो नार्मल हुई फिर मैंने धीरे से धक्के लगाने सुरु किये | उसका दर्द कुछ कम हुआ तो वो भी मेरा साथ देने लगी | मैंने उसकी मस्त चुदाई की वो बहुत खुश थी और फिर मैं अपने घर चला आया | उस दिन के बाद जब भी मुझे मौका मिलता मैं उसकी चुदाई करता था |

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