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सुहागरात को पति ने कुतिया बना के चुत में डाला फिर लगातार तीन घंटे चोदते रहा – मेरी लाल हो गयी ऊऊह्ह्ह्ह आआह्ह्ह

हाय फ्रेंड्स, मेरा Antarvasna नाम सोनल है, मेरी उम्र 26 साल की है और मैं इन्दौर की रहने वाली हूँ. दोस्तों कामलीला डॉट कॉम वेबसाइट पर यह मेरी पहली कहानी है इसलिए आपको पहले मैं अपने बारे में बता देती हूँ। दोस्तों मैं एक बहुत ही अमीर घराने से हूँ और मेरी शादी को हुए 3 साल हो चुके है. शादी से पहले भी मैं 2-3 बार अपनी चुदाई करवा चुकी हूँ, मगर जो वाकया मेरे साथ मेरी सुहागरात की पहली रात को हुआ उसको मैं आप सभी के साथ साझा करने के लिए मैं बहुत बेकरार थी. लिहाजा मैं अपना अनुभव आप सभी की खिदमत में पेश करने जा रही हूँ।

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दोस्तों यह बात आज से 3 साल पहले की है, शादी के लिए हर लड़की की तरह मैंने भी बहुत से ख्वाब सॅंजो कर रखे थे, और फिर वह समय आया जब मेरी शादी तय हो गई थी. मेरा होने वाला पति किसी हीरो की तरह बहुत ही खूबसूरत है, मैं तो उसको पाकर फूली ही नहीं समा रही थी, उनका घराना भी बहुत उँचा है. और फिर वह दिन भी आ गया था जिसका हर चूत को बड़ी ही बेसब्री से इन्तजार रहता है. मैं सुहागरात की सेज पर छुईमुई सी सजकर बैठी हुई थी और अपने सपनों के राजकुमार का इन्तजार कर रही थी. और फिर वह आए और मेरे पास आकर मुझसे जमाने भर की बात करने लगे. लेकिन मुझको तो इन्तजार था कि, कब वह अपना लंड मुझको दिखाए, मगर मैं कैसे पहल कर सकती थी. इसलिए मुझको एक शरारत सूझी और फिर मैंने धीरे-धीरे अपने गहने उतारने शुरू किए और मैंने अपना दुपट्टा भी अपने सीने से हटा दिया था. और फिर मेरे गोरे-गोरे बड़े-बड़े खरबूजों को देखकर मेरे पति की ज़ुबान तब एकदम से रुक गई थी. और फिर उन्होनें मुझे बिना कुछ कहे ही उठाकर अपनी गोद में घसीट लिया था और मेरे लिपस्टिक से रंगे हुए होठों को बिना लिपस्टिक का कर दिया था।

और तब मैं भी पागल सी हो गई थी और अपने हाथ उनकी गर्दन पर फेरने लग गई थी. दोस्तों मुझको तो बिलकुल भी पता भी नहीं चला कि, उन्होनें कब मुझे नंगी कर दिया था. मैं तो उनके होठों में ही गुम हो गई थी की अचानक से एक चटाक से मेरे कूल्हों पर एक चपत सी महसूस हुई. और उससे मैंने बिलबिलाकर उनके होंठ छोड़ दिए थे और फिर मैं उनकी तरफ सवालिया निगाहों से देखने लग गई थी तो वह मेरी तरफ मुस्कुरा रहे थे, और फिर वह मुझसे बोले कि, माफ़ कर देना. दोस्तों मुझको सेक्स करते समय कुछ भी होश नहीं रहता है. और फिर मैंने भी उनकी तरफ मुस्कुरा दिया था और यह भी कहा कि, कोई बात नहीं. मैं सब सहन कर लूँगी। मगर मुझे बिलकुल भी पता नहीं था कि, आगे जो होगा. वह सहन कर पाना सबके बस की बात नहीं है. और फिर मैंने अपने ऊपर ध्यान दिया तो पता चला कि, मैं उनके ऊपर एकदम नंगी बैठी हूँ, और मैंने अपने हाथ उनके सीने पर टिका रखे है। मैं पूरी तरह से नंगी. अपने पति की गोद में किसी बच्चे की तरह बैठी हुई थी. और उन्होनें अपना कुर्ता-पायज़ामा अभी तक पहन रखा था. उनके कसरती बदन की मजबूती मुझको बाहर से ही महसूस हो रही थी. मगर उनका लंड देखने की मेरी चाहत अभी भी बरकरार थी। और फिर मैं उनकी गोद में से उतरने ही वाली थी कि, उन्होनें मुझे अपनी बाहों में भर लिया और फिर वह मुझसे बोले कि, तुम मुझे पॉमेरियन कुतिया की तरह लगती हो. एकदम मासूम सी तो फिर मैंने भी उनसे कहा कि, और तुम मुझे किसी देशी कुत्ते के जैसे लग रहे हो।

तो फिर वह हँस दिए थे. और फिर वह मुझको किस करने लग गए थे और मेरे बब्स को भी पकड़कर सहलाने लग गए थे. और फिर उन्होनें फिर से मेरे कूल्हों पर एक चपत मारी. और फिर वह मुझको अपनी गोद में से उतारकर बिस्तर पर ही खड़े होकर अपना कुर्ता उतारने लगे और फिर बनियान और पायज़ामा उतारकर मुझसे बोले कि, लो. अब तुम्हारी बारी है। और फिर मैं थोड़ी शरमा सी गई थी और मेरा सिर उनकी जाँघों के पास था. और फिर मैं उनसे बोली कि, आज नहीं यह सब कल।

तो फिर उन्होनें मुझसे बिना कुछ कहे ही मेरा सिर पकड़कर अपने लंड पर अंडरवियर के ऊपर से ही रगड़ना चालू कर दिया था. और उससे मेरे दिमाग़ में एक अजीब से गंध भर गई थी, और उससे मैं भी मदहोश सी होने लग गई थी. और फिर मैंने उनका अंडरवियर पकड़कर नीचे किया तो मेरे तो होश ही उड़ गए थे. सिकुड़ा हुआ भी उनका लंड करीब 5” का था. मेरे पति और मेरा हम दोनों का ही रंग एकदम गोरा है. मगर उनका लंड एकदम भुजंग काला था. और फिर मैं उनका लौड़ा देखकर हल्के से चिल्ला पड़ी हाय… यह क्या है?

और फिर वह हँसे मगर बोले कुछ नहीं और फिर वह मेरा सिर पकड़कर अपने लंड पर रगड़ने लग गए थे. मैंने दूर हटने के लिये ज़ोर लगाने की कोशिश करी मगर वह मुझसे ज़्यादा ताकतवर थे. और फिर मेरे होंठ ना चाहते हुए भी उनके काले लंड पर फिर रहे थे. और फिर एक मिनट के बाद मुझे भी वह सब अच्छा लगने लग गया था और मैंने भी ज़ोर लगाना बंद कर दिया था. और तभी उन्होनें मेरे बाल ज़ोर से खींचे तो मेरा मुहँ खुल गया था और फिर जैसे ही मेरा मुहँ खुला वैसे ही उन्होनें अपना लंड मेरे मुहँ के अन्दर करके मेरा सिर अपने लंड पर दबा लिया था और मुझे उस पल तो ऐसा लगा कि, जैसे मेरा मुहँ भर गया हो. और तभी उनके लंड ने अपना आकर बढ़ाना शुरू कर दिया था. और तब मुझे लगा कि, अब मेरा मुहँ फट जाएगा. मैं छटपटा उठी थी और मैं मेरे हाथ-पाँव पटकने लग गई थी मगर उन्होनें मुझे नहीं छोड़ा था।

और मुझको साफ-साफ महसूस हो रहा था कि, उनका लंड मेरे गले से होता हुआ मेरे सीने तक चला गया है, और मेरी आँखों से आँसुओं की धार निकल पड़ी थी. और मैं उनकी जाँघों पर मार रही थी और नाख़ून गाड़ रही थी. मगर उनपर इसका कोई असर नहीं हो रहा था. और वह मेरा सिर अपने लंड पर दबाए हुए थे. और फिर मैंने उनके सामने हाथ जोड़ लिए थे और उनसे लंड निकालने के लिए विनती वाली नज़रों से उनकी तरफ देखा. और फिर मेरी आँखों के आगे अंधेरा छाने लगा था. और फिर इतने में ही मेरे गाल पर एक झन्नाटेदार तमाचा पड़ा. और फिर मैंने तिलमिला कर ऊपर देखा तो मेरे पति अपनी आँखों में कठोरता लिए मुस्कुरा रहे थे। और फिर वह बोले कि, अब बता, जैसे मैं बोलूँगा वैसे ही करेगी ना?

और फिर मैंने भी तुरन्त ही अपनी आँखों से हामी भर दी थी. और फिर उन्होनें मेरा सिर छोड़ दिया था. जिससे मैं बिस्तर पर गिर पड़ी थी. और मेरा दिमाग़ ही काम नहीं कर रहा था, और मैं एक दमे के मरीज की तरह हाँफ रही थी. और फिर इतने में मेरे पति बोले कि हाँ, अब तू पूरी कुतिया लग रही है. और फिर वह मेरे दोनों हाथों को फैलाकर उनके ऊपर अपने घुटने रखकर मेरे सीने पर बैठ गये थे और फिर उन्होनें मुझसे कहा कि, मेरे इस लंड को हड्डी समझ और चाट. अब मेरा दिमाग़ कुछ समझने के काबिल हुआ था. तो उनका इतना बड़ा लंड देखकर मेरी तो आँखें ही फैल गई थी. करीब 7.5” लम्बा और 3.5” मोटा काला लोकी जैसा लंड मेरे मुहँ पर रखा हुआ था. मैं तो उस लंड को देखकर ही हक्की-बक्की रह गई थी।

मेरे पति का लंड मेरे मुहँ पर रखा हुआ था और मैं इतने बड़े लंड को पहलीबार देखकर हैरान थी. और फिर इतने में मेरे गाल पर फिर से एक और जबरदस्त चाँटा पड़ा, और फिर मेरे पति मुझसे बोले कि, चाट इसको जल्दी. और फिर मैंने जल्दी से अपनी जीभ निकालकर उनके लंड को चाटना शुरू कर दिया था. और फिर वह मुझसे बोले कि हाँ, अब तू पूरी कुतिया बनी है. मैं रोती जा रही थी और उनके लंड को चाटती भी जा रही थी. मेरे दोनों हाथ उनके पैरों के नीचे दबे हुए थे. और बीच-बीच में वह अपने लंड को पकड़कर मेरे चेहरे पर मार भी देते थे. मेरे गोरे-गोरे गालों पर उनका भारी लंड किसी मुक्के की तरह पड़ रहा था. और फिर लगभग 5-7 मिनट के बाद वह मेरे ऊपर से उठे और फिर उन्होनें मुझे उठाकर अपनी गोद में बैठा लिया था. और फिर वह मुझसे बोले कि, अब अपने बब्स से मेरे चेहरे पर मसाज कर. और फिर मैं उस समय एक गुलाम की तरह महसूस कर रही थी. और फिर मैंने उनके ऊपर बैठकर अपने दोनों बब्स को पकड़कर उनके चेहरे पर रगड़ना शुरू कर दिया था और उस समय उनका लंड ठीक मेरी चूत के नीचे था. और तब तक मेरा दर्द भी थोड़ा कम हो गया था. और तभी उन्होनें मेरी कमर को पकड़कर एक जोरदार धक्का मारा तो मैं एकदम से उछल पड़ी थी और तब तक मगर उनके लंड का टोपा मेरी चूत में फंस चुका था। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

और उस समय मुझको ऐसा लग रहा था कि, मैं जैसे किसी लोहे की गरम सलाख पर बैठी हुई हूँ. और फिर उन्होनें थोड़ा और ज़ोर लगाया तो मैं एकदम से चिल्ला पड़ी थी. और फिर उन्होनें मुझको किसी खिलोने की तरह उठा लिया था, और फिर खड़े होकर उन्होनें एक और जोरदार झटका दिया तो मुझे तो लगा कि, मैं तो अब मर ही जाऊँगी, क्योंकि इतना अधिक दर्द मुझे पहले कभी भी नहीं हुआ था. मैं तो बेहोश सी होने लग गई थी. और तभी वह मुझे लेकर बैठ गये थे और मेरे होठों को चूसने लग गए थे और फिर लगभग 5 मिनट तक वह वैसे ही बैठे रहे. और फिर 5-7 मिनट के बाद मुझे थोड़ा आराम मिला तो फिर वह मुझसे बोले कि, अब अपनी चूत को ऊपर-नीचे कर। और फिर मैं रोते-रोते अपनी चूत को ऊपर-नीचे करने लगी. और फिर 20-25 बार ऊपर-नीचे करने के बाद मुझे भी कुछ-कुछ अच्छा लगने लगा था. और मेरे पति मुझे ही देख रहे थे, तो फिर वह मुझसे बोले कि, जब तुम्हारा दर्द ख़त्म हो जाए तो बताना. तो फिर मैं उनसे बोली कि, अब मेरा दर्द पहले से हल्का हो गया है. और फिर तो बस यह सुनते ही उन्होनें मेरी कमर को पकड़कर मुझे हल्का सा ऊपर उठाया और नीचे से अपने लंड से ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगे. और उससे मेरे बड़े-बड़े बब्स फुटबॉल की तरह उछाल मार रहे थे. और मेरी चूत भी गीली हो गई थी। और फिर मेरे पति मुझसे बोले कि, चल अब कुतिया बन जा।

और फिर मैं उनके ऊपर से उठकर अपने हाथ-पैरों के बल झुक गई थी. और फिर उन्होनें मेरे पीछे आकर अपने लंड को मेरी चूत पर रखकर ज़ोर से एक झटका मारा और एक ही बार में अपना पूरा लंड मेरी चूत के अन्दर डाल दिया था. और मैं उस पल किसी कुतिया की तरह चुद रही थी. और फिर कुछ ही देर के बाद मैं अब झड़ने वाली थी. तो फिर उन्होनें मुझसे कहा कि, बोल तू मेरी कुतिया है।

मैं भी उस समय चुदाई के नशे में डूबी हुई थी, तो फिर उन्होनें एक करारा चाँटा मेरे कूल्हों पर मारा तो मैं उनसे कहने लग गई थी कि हाँ, मैं आपकी कुतिया ही हूँ, मुझको आज आप एक कुतिया की तरह जी भर के चोदो। मुझे उस पल तो जैसे किसी जन्नत का मज़ा आ रहा था. और फिर मैंने ढेर सारा पानी उनके लंड पर छोड़ दिया था. और फिर 8-10 तगड़े-तगड़े झटकों के बाद उन्होनें भी अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया था और फिर वह मुझे नीचे लेटाकर वह मेरे ऊपर आ गए थे. और फिर वह अपना लंड पकड़कर मेरे मुहँ के पास हिलाने लग गए थे, और फिर वह मुझसे बोले कि, चुप-चाप अपना मुहँ खोलकर लेट जा. और फिर जैसे ही मैंने अपना मुहँ खोला तो उनका भी माल मेरे मुहँ में ही छूट गया था और वह सारा ही मुझे पीना पड़ गया था।

दोस्तों उस रात के बाद तो वह मुझको हमेशा ही अकेले में कुतिया ही कहकर बुलाते है. और मुझको भी उनकी कुतिया बनने में बड़ा मज़ा आता है।

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धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!

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