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स्कूल की गर्लफ्रेंड की शादी के बाद चुदाई की देसी कहानी

यह देसी कहानी मेरे और मेरी बचपन की दोस्त पूनम (काल्पनिक) की है. वो एक सांवली सी देसी लड़की थी और उसके चूचे छोटे छोटे नींबू जैसे लेकिन बहुत सख्त थे. हम दोनों एक ही स्कूल से पढ़े हैं और एक दूसरे से बहुत प्यार भी करते थे. स्कूल के दिनों में हम रोज किस किया करते थे पर कभी आगे कुछ नहीं कर पाए. मैं हमेशा उसको चोदने के सपने देखा करता था. स्कूल के बाद मैं आगे की पढ़ाई के लिए देहरादून आ गया.

यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप SexKahani.Desi पर पढ़ रहे हैं!

लेकिन हम फोन पर रोज बात और सेक्स चैट किया करते थे. फिर एक दिन उसकी शादी हो गई और हमारी बातें बंद हो गई. पर मैं रोज उसकी तस्वीर देख कर मूठ मारा करता था.

फिर एक दिन अचानक व्हाट्स ऐप पर उसका मैसेज आया. हमारी बातें फिर से रोज होने लगी. मेरे मन में उसको चोदने के खयाल फिर से आने लगे. बातों से पता चला कि वो अपने पति से खुश नहीं थी.

 

मैं इस बार मौका नहीं चूकना चाहता था इसलिए उसका कंधा बन गया. एक दिन पुरानी बातों को याद करते करते हम सेक्स की बातें करने लगे. फिर हमने सेक्स चैट किया और उसने अपनी नंगी तस्वीरें भेजी.

खुदा कसम क्या माल बन गई थी. उसके सांवली चूचियों पर काले निप्पल देख के मन कर रहा था कि काट के खा जाऊँ. उसकी चूत पर हमेशा बाल होते हैं. मुझे चूत पर झाँटे बहुत पसंद हैं और उसी कारण से वो हमेशा झाँटे रखती थी.

मेरा हमेशा से फैन्टेसी है शादीशुदा औरतों को नंगी करके मंगलसूत्र और सिंदूर के रहते हुए चोदना. मैं हमेशा इंटरनेट पर भी मंगलसूत्र और सिंदूर में देसी औरतों की नंगी तस्वीरें ढूंढा करता हूँ. मुझे दूसरों की बीवी चोदने का बहुत शौक है.

खैर अब कहानी पर वापस आते हैं.

एक दिन उसने कहा कि उसके पति अपने ऑफिस के काम से देहरादून आ रहे हैं. चूंकि देहरादून एक हिल स्टेशन है तो वो भी उनके साथ आ रही है.
मेरी उम्मीद और मजबूत हो गई. इस बार मैंने फैसला कर लिया कि उसको कैसे भी चोदना है.

जब वो देहरादून आई तो मैंने उसे मिलने के लिए बुलाया. जब उसके पति काम के लिए होटल से निकले तो वो भी मार्केट घूमने का बहाना बना कर होटल से निकल गई. हम दोनों पैसिफिक मॉल में मिले.

मैं उसको देखता रह गया. ग्रीन कलर की साड़ी में वो सेक्स बॉम्ब लग रही थी. साड़ी को उसने नाभि से काफी नीच बांध रखा था, ब्लाउज से उसके आधे चूचे बाहर आ रहे थे. मेरा मन तो उसको वहीं चोदने का हो रहा था लेकिन मैं उसे पहले अपने रूम लेकर आया.

रूम का दरवाजा बंद करते ही मैंने उसको गोद में उठाया और दीवार से लगा कर अपने हाथों से उसके दोनों हाथ ऊपर की तरफ दीवार से चिपका दिया और उसको चूमने लगा.
अचानक हुए इस हमले से वो घबरा गई और छूटने की कोशिश करने लगी.
पर मैंने उसे पकड़े रखा और उसकी होंठों को चूसता रहा. थोड़ी देर में उसने अपने होंठ खोल दिए और मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दिया. अब वो छूटने की कोशिश नहीं कर रही थी तो मेरे दोनों हाथ फ्री हो गये, मैंने उसके चूचे दबाने शुरू कर दिए.
वो भी अपने हाथ नीचे ले जाकर मेरे लंड दबाने लगी.

हमेशा से उसको चोदने का मेरा सपना आज पूरा होने वाला था. मैंने उसे पीछे की तरफ घुमाया और फिर से दीवार से लगा दिया और उसके बाल हटा कर गले पर किस करने लगा. बीच बीच में मैं उसके कान के पीछे जीभ घुमा देता था. वो अब ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ ले रही थी. मैं उसके पीछे ऐसे खड़ा था कि मेरा लंड उसकी उभरी हुई गांड की दरार के बीच में घुसा हुआ था. एक हाथ मैंने आगे ले जा कर उसकी चूत पर रख दिया और सहलाने लगा.

वो मदहोश हो चुकी थी.

अब मैंने अपना हाथ साड़ी के अंदर डाला तो पाया कि वो पूरी गीली हो चुकी थी. मैं उसकी चूत के अंदर अपनी एक उंगली डाल कर अंदर बाहर करने लगा. वो अब फिर से मेरा लंड दबाने लगी. थोड़ी ही देर में उसका बदन अकड़ने लगा और वो थोड़ी देर में झड़ गई.

हम जैसे ही अलग हुये, वो पलट कर मुझसे लिपट गई. इस बार उसने मेरा सर पकड़ा और अपने होठों को मेरे होठों से लगा दिया. हमने बहुत देर तक किस किया. पर पहले किस में जहाँ सिर्फ हवस थी, इस किस में मुझे बहुत प्यार लगा. ये किस पहले किस से ज्यादा अच्छा था. अपने होठों को उसके होठों से हटाने का मन ही नहीं हो रहा था.

खैर हम अलग हुए. ऐसा लग रहा था कि मुझे भी उससे प्यार हो गया है. उसकी आँखों में प्यार साफ झलक रहा था. हम बस आज एक दूसरे में खो जाने को बेताब थे.

फिर कुछ ऐसा हुआ जो मैं सोच भी नहीं सकता था. वो नीचे बैठी और पैंट से मेरा लंड बाहर निकाल लिया. मैं उसको देखे जा रहा था, उसने भी मेरी आँखों में देखते हुए मेरा लंड अपने मुख में डाल लिया.
आज से पहले सेक्स चैट में भी वो लंड चूसने से मना कर देती थी यह बोल कर कि उसे ये सब पसंद नहीं है.

मैं मानो जन्नत में था. वो कभी अपनी नर्म गुलाबी होठों से मेरे लंड को चूसती थी तो कभी जीभ से चाटती थी, कभी लंड को हाथ से हिलाते हुए टट्टे चाटती थी. मैं पागल हुए जा रहा था. फिर मैंने उसके बालों को पकड़ा और अपने लंड को उसके गले तक डाल दिया और जोर जोर से चोदने लगा.
उसने मुझे रोकने की कोशिश की लेकिन मैं नहीं रुका. मैं झरने वाला था. मैंने उसके मुंह में लंड को पूरा अंदर तक डाल दिया. वो लंड बाहर निकालने की कोशिश करने लगी लेकिन वो निकाल नहीं पाई.

मेरे लिए वक़्त मानो रुक गया हो, मैं उसके मुंह में ही झड़ गया और लंड को तब तक नहीं निकाला जब तक उसने मेरा रस पी नहीं लिया.

उसकी आँखों से आँसू आ रहे थे. उसको शायद मेरे ऐसा करने की उम्मीद नहीं थी पर उसने कुछ नहीं कहा. लेकिन मुझे खुद अपनी गलती का एहसास हुआ और मैंने माफी मांग ली.

अब मैं उसे बहुत प्यार करना चाहता था, उसको सेक्स के सारे मजे देना चाहता था. मैंने उससे आँखें बंद करके खड़ी होने के लिए कहा और उसने वैसा ही किया. फिर धीरे धीरे मैंने उसकी साड़ी निकाल दी और उसकी नाभि को चाटने लगा. उसकी साँसें तेज़ चल रही थी. साथ ही साथ मैं उसके पेटीकोट के अंदर हाथ डाल कर उसकी मांसल जांघों को सहला रहा था.

फिर मैं उसके पीछे खड़ा हो गया और उसके गले को चूमते हुए उसका ब्लाउज खोलने लगा. उसकी साँसें इतनी तेज़ चल रही थी कि उसके चूचे को ऊपर नीचे होते देख मेरा लंड खड़ा हो गया फिर से.

ब्लाउज और ब्रा के निकलते ही उसके विशाल चूचे आज़ाद हो गए. उसकी साँवली सी चूचियाँ देखते ही मैं उन पर टूट पड़ा. उसके गले को चाटते हुए ही मैं उसकी चूचियाँ दबा रहा था और वो तेज़ तेज़ सांसें ले रही थी. फिर मैं अपना एक हाथ उसके पेटीकोट तक ले गया और पेटीकोट को खोल दिया, सरक कर पेटीकोट नीचे जा गिरा.

अब वो सिर्फ मंगलसूत्र और पैंटी में मेरे सामने थी. मैंने उसको अपनी तरफ घुमाया और पैरों से लेकर सर तक उसके हर अंग को चूमने लगा. उसकी मांसल जांघों को चूमने और चाटने में बहुत मजा आ रहा था.
वो अब भी आँखें बंद किए खड़ी थी और मजे ले रही थी. उसकी आह आ आ आह उउहहह उह आह से मेरा जोश और बढ़ रहा था.

मैंने अपने होंठों से उसकी पैंटी पकड़ी और उतारने लगा. मेरे होंठों का स्पर्श चूत पर होते ही वो काँप गई. पैंटी खुलते ही ऐसा लगा सपना साकार हो गया हो. हमेशा से जिसे सपनों और तस्वीरों में नंगी देखा था आज वो जन्मजात नंगी मेरी नजरों के सामने खड़ी थी. मांग में सिंदूर, गले में मंगलसूत्र, चूत पर झाँटे, बड़ी बड़ी चूचियाँ, आँखें बंद किए खड़ी वो साक्षात काम की देवी लग रही थी.

अब मैंने उसको आईने के सामने ले जा कर खड़ा किया और आँखें खोलने को कहा. वो आँखें खोलते ही खुद को इस रूप में देख कर शर्मा गई और फिर से आँखें बंद कर ली. तब तक मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए. थोड़ी देर में जब उसने खुद से आँखें खोली, मुझे नंगा खड़ा देख मुझसे लिपट गई. उस एहसास को मैं कभी ना भूला पाऊंगा.

उसकी चूचियाँ मेरे छाती से दबी थी, मेरा लंड उसकी चूत को छू रही थी और हम एक दूसरे की पीठ को सहला रहे थे.

उसी तरह मैंने फिर उसको गोद में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया और उसके सर पर चूम लिया. फिर चूमते हुये नीचे की तरफ बढ़ने लगा, उसके गालों को चूमा, होठों को, चूचियों को, नाभि को चूमते हुए मैं उसके पैरों के बीच में आ कर रुक गया. अपनी उँगलियों से उसकी देसी चूत की फांकों को खोला और अपनी जीभ अंदर डाल दी.
उसकी तेज़ सिसकारी निकल गई और वो अपनी गांड उछालने लगी. मैं कभी उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदता तो कभी उसको चूसता और चाटता. साथ ही साथ मैं अपनी उंगलियों से उसकी भगनासा को छेड़ रहा था. उसे बहुत मजा आ रहा था.

थोड़ी देर में उसका बदन अकड़ने लगा और उसने मेरे सर को अपनी चूत पर दबा दिया और जांघों से पकड़ लिया. उसकी चूत से पानी बहने लगा और मैं उसका सारा पानी पी गया.

अब वो चुदाई की उम्मीद से मुझे देख रही थी, वो कुछ नहीं बोल रही थी पर उसकी आँखें उसकी चूत का हाल ब्यान कर रही थी.

मैं उसके ऊपर लेट गया और उसके होठों को चूमने लगा. एक हाथ से मैं उसके चूचे दबा रहा था. फिर उसने मुझे अलग किया. अब वो होने वाला था जो मैंने हमेशा सपनों में देखा था. मैं उठा और अपने लंड को उसकी चूत के मुख पर सेट करने लगा. उसने खुद से मेरे लंड को अपनी चूत के मुहाने पर लगा लिया. वो भी जल्दी से जल्दी चुदना चाहती थी.

मैंने एक जोर का धक्का दिया तो मेरा लंड सीधा एक बार में ही अंदर चला गया. मुझे यह बात थोड़ी अजीब लगी क्योंकि उसने कहा था कि उसके पति का लंड बहुत छोटा है और वो चोद नहीं पाता और उसको खुश नहीं कर पाता है.
खैर मैं ये सब पूछ कर सेक्स का मजा खराब नहीं करना चाहता था.

मैं उसको कभी तेज तो कभी धीरे चोद रहा था और वो सिसकारियाँ लिए जा रही थी. आज उसके पूरे जिस्म को भोगना चाहता था और देर तक सेक्स करना चाहता था. इसलिए 10 मिनट उसको उसी पोजीशन में चोदने के बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और फिर से उसकी चूत चाटने लगा. उसकी चूत बहुत गीली थी, मैं सारा रस पी गया.

अब मैं खड़ा हुआ और उसको बेड के किनारे तक ले आया और वहीं खड़ा हो कर उसकी चूत में लंड डाल दिया. उसके दोनों पैरों को मैंने अपने कंधे पर रख लिया. अब उसकी कमर के ऊपर का भाग बेड पर था और दोनों पैर मेरे कंधों पर. मैंने फिर से धक्के लगाने शुरू कर दिए. अपने दोनों हाथों से चूचियाँ मसल रहा था.
पूरी चूदाई के दौरान उसने आह ओह उहहह उम्म्ह… अहह… हय… याह… आहह के अलावा कुछ नहीं बोला था.

उसकी सिसकारियाँ और तेज हो गई और उसने अपनी टांगें मेरे कंधों से उतार कर मेरे कमर को अपनी टांगों से जकड़ लिया, उसका बदन अकड़ने लगा, वो झड़ने वाली थी इसलिए मैंने भी धक्के तेज कर दिए. मैं उसकी चूत में उसके साथ ही झड़ गया.

वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. मैं भी मुस्कुरा दिया और हम फिर से लिपट गये. हम एक दूसरे से लिपटे हुए ही बातें करने लगे.

मैंने उससे पूछा कि उसकी चूत इतनी खुली हुई कैसे है जब उसका पति उसको चोद नहीं पाता.
उसने बताया कि उसका पति उसके जिस्म की जरूरत को पूरा नहीं कर पाता इसलिए उसने अपनी जिस्म की भूख मिटाने के लिए मुहल्ले के बहुत से लोगों से संबंध बनाया है.

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मैंने उस दिन अलग अलग पोजीशन में दो बार और चोदा और वो जब तक देहरादून में रही, हमने बहुत चुदाई की.

यह मेरी पहली देसी कहानी थी. अपना फीडबैक जरूर दें. आप लोगों को अगर मेरी कहानी पसंद आई तो मैं इसके बाद हुई घटनाओं की भी कहानी लिखूँगा.

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