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एंटरटेनमेंट का एक अनोखा त्रिभुज

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम अभिषेक और मेरी उम्र २६ साल है। दोस्तों मुझे मस्तराम और अन्तर्वासना-स्टोरी डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ना बहुत अच्छा लगता है और में मस्ताराम डॉट नेट का बहुत बड़ा दीवाना हूँ और मैंने इस वेबसाइट बहुत सी कहानियाँ पढ़ी है और मुझे हर एक कहानी बहुत अच्छी लगी। दोस्तों आज में अपनी एक सच्ची कहानी आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ..

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यह कहानी आज से ४ साल पुरानी है। दोस्तों यह बात उन दिनों की है.. जब मेरे पापा ने मेरी पढ़ाई पूरी होने के बाद मुझे डिग्री मिलते ही मुझे उनका बिजनेस संभालने के लिए दिल्ली भेज़ दिया। फिर में वहाँ पर अकेला रहता था और ५-६ साल से मेरी कोई गर्लफ्रेंड भी नहीं थी.. क्योंकि में काम के सिलसिले में हमेशा ही बहुत व्यस्त रहता था। मेरे घर पर एक नौकरानी आकर मेरा सभी छोटा मोटा काम किया करती थी.. उसका नाम शन्नो था और उसकी शादी ३-४ महीने पहले ही हुई थी और उसकी उम्र करीब २४ साल थी। वो एक नौकरानी थी.. लेकिन उसके चहरे से वो बिल्कुल भी नहीं लगती थी और वो बहुत सेक्सी थी। उसका गौरा रंग, फिगर करीब ३६-२८-३८ होगा और उसकी २ बहने थी शबाना और आशिया। उसकी बहनें उसके साथ ही रहती थी.. लेकिन उनकी हालत बहुत खराब थी क्योंकि घर में सिर्फ़ शन्नो कमाने वाली थी | आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | उसका पति कुछ काम नहीं करता था। वो सिर्फ दारू पीकर सब उड़ा देता था और वो शन्नो को हमेशा मारा करता था और फिर वो कभी कभी कई दिनों तक काम पर नहीं आती थी और उसकी जगह उसकी बहनें आती थी। आशिया सिर्फ़ 18 साल की थी और शबाना एक महीने पहले ही 22 साल की हुई थी और उन दोनों बहनों का रंग काला था.. लेकिन फिगर बहुत मस्त था और वो दोनों भी दिखने में बहुत सेक्सी लगती थी। तो दोस्तों अब में अपनी कहानी शुरू करता हूँ। तो उस दिन रविवार था और में सुबह से ही घर पर ही था.. शन्नो और उसकी दोनों बहनों में से कोई भी बहुत दिनो से काम पर नहीं आई थी। तो सुबह करीब 8 बजे एकदम से दरवाज़ा खोलकर शबाना रोती हुई आई और मेरे पास आकर बोली कि साहब हमारी मदद कर दो.. फिर मैंने पूछा कि क्या हुआ?
शबाना : साहब शन्नो के पति ने उसे तलाक़ दे दिया है और हमें मारकर घर से निकाल दिया। हमारे सारे पैसे और सामान सब उसने हमसे छीन लिया। अब हम सड़क पर आ गये है साहब।
में : देखो में कुछ नहीं कर सकता यह आपके घर का मामला है इसे आप ही सम्भालो।
शबाना : साहब अभी मदद कर दो.. हम सब काम करके चुका देंगे।
में : ठीक है यह लो कुछ पैसे और कुछ टाईम के लिए तुम यहाँ पर रह सकती हो.. ऊपर वाला कमरा वैसे भी खाली है और हाँ में कुछ दिनों के लिया मदद कर सकता हूँ.. बाद में मुझे भी मेरे पैसे वापस चाहिए।
शबाना : बहुत बहुत शुक्रिया साहब।
फिर वो तीनो बहनें ऊपर वाले कमरे में रहने लगी 2-3 दिन बाद मैंने शन्नो से कहा कि अब मेरा कमरा खाली कर दो.. इससे ज्यादा में कोई मदद नहीं कर सकता बस।
शन्नो : साहब हमारे पास पैसे नहीं है ऐसा मत करो।
में : तो में और क्या करूं?
शन्नो : साहब हम आपका सारे दिन काम कर देंगे फुल टाईम हमें यहीं पर रख लो।
में : लेकिन मेरे पास बाकी का काम करने के लिए और भी नौकर है मुझे तुम्हारी ज़रूरत नहीं है।
शन्नो : लेकिन साहब जो में कर सकती हूँ वो बाकी नौकर नहीं कर सकते। आप एक बार कह कर तो देखो। दोस्तों ये कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पड़ रहे है।
फिर में शन्नो का इशारा समझ गया और में करता भी क्या? वो थी ही इतनी सेक्सी और मेरी बहुत सालों से कोई गर्लफ्रेंड भी नहीं थी। तभी मैंने उसका हाथ पकड़ते हुए उसे कहा कि अच्छा ठीक है तुम आज से मेरी फुल टाईम नौकर.. तुम यहीं पर रह जाओ और तुम्हारा सारा खर्चा में उठाऊंगा लेकिन मेरी कुछ शर्तें है? पहली यह कि जो भी में कहूँगा वो तुम करोगी और तुम कुछ मना नहीं कर सकती और दूसरी की तुम्हारे साथ तुम्हारी बहनों को भी अपनी चूत मेरे हवाले करनी होगी।
शन्नो : ठीक है साहब.. आज से आप हमारे राजा और हम आपकी दासियाँ। शबाना को में मना लूँगी.. लेकिन आशिया अभी बहुत छोटी है। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
में : ठीक है तुम कहती हो तो आशिया की चुदाई नहीं होगी.. लेकिन बाकी सभी काम उसे भी करने होंगे।
शन्नो : ठीक है शुक्रिया साहब।
में : ठीक है चलो अब अपनी बहनों से बात करो और फिर मेरे कमरे में लाओ उन्हें।
फिर शन्नो बहुत खुश हो गयी और वहाँ से चली गयी.. लेकिन पता नहीं शन्नो ने उन दोनों को कैसे मनाया और वो आशिया और शबाना को दो मिनट बाद ही मेरे कमरे में ले आई। फिर मैंने शन्नो को कहा कि इन्हें सब समझा दिया।
शन्नो : हाँ जी साहब।
में : एक बार तीनो फिर सोच लो.. कोई ज़बरदस्ती नहीं है अभी भी तुम जा सकती हो.. अगर मंज़ूर नहीं है तो।
शबाना : आप हमारे राजा है साहब.. अब आप जो भी आदेश करोगे हमे मंज़ूर है।
में : ठीक है.. आशिया तू साईड में बैठ जा और चाहे तो बाहर जाकर काम कर ले.. लेकिन आशिया वहीं पर साईड में बैठ गयी।
में : आशिया क्या अपनी बहनों की चुदाई देखोगी?
फिर वो शरमा कर बोली कि नहीं सीख लूँगी साहब.. बाद में पूरी जिन्दगी भर मुझे भी यही करना है।
में : चलो अब शन्नो और शबाना तुम दोनों एक दूसरे को किस करो और एक दूसरे को धीरे धीरे नंगा करो।
तभी मेरे कहते ही झट से शबाना ने शन्नो को पकड़ा और किस करने लगी.. फिर मेरा 7.5 इंच का लंड स्टील की पेंट में तरह तनकर टेंट बन गया। आशिया साईड में बैठी पागलों की तरह मेरे लंड को घूर रही थी। तभी थोड़े टाईम बाद दोनों ने एक दूसरे की सलवार कमीज़ को उतार दिया और अब दोनों सिर्फ़ पेंटी में थी। फिर मैंने कहा कि अब तुम दोनों यहाँ बेड पर आ जाओ और 69 पोज़िशन में आकर एक दूसरे की चूत चाटो। फिर शन्नो बोली कि जी साहब आपका हुक्म सर आँखों पर और दोनों 69 पोज़िशन में आ गयी.. बस अब मेरा कंट्रोल खत्म हो गया और मैंने झट से अपने सारे कपड़े उतार दिए और शन्नो को शबाना के ऊपर से हटाया और अपना लंड उसके मुहं में दे दिया और आशिया साईड में बैठे बैठे गरम होने लगी और उसने अपना एक हाथ अपनी सलवार में डाल लिया और वो अपनी चूत सहलाने लगी।
तभी मैंने शन्नो को हटाया और शबाना के मुहं में अपना लंड डाल दिया.. वाह शबाना क्या गरम थी। मुझे ऐसा लगा कि जैसे मैंने लंड आग के गोले में डाल दिया हो और में अब पूरा गरम हो गया था। फिर मैंने झट से शन्नो को बेड पर लेटाया और मैंने अपना पूरा 7.5 इंच का लंड एक बार में ही उसकी चूत में जोर से धक्का देकर घुसा दिया और जोर जोर से झटके मारने लगा और फिर शबाना के बूब्स चूसने लगा.. लेकिन शन्नो पागल हुई जा रही थी और ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी अह्ह्ह ऊफफ्फ साहब.. मेरे राजा साहब ऊहह। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | फिर मैंने शबाना से कहा कि तू इसके मुहं पर अपनी चूत रख दे जिससे इसकी आवाज थोड़ी कम होगी.. नहीं तो सभी पड़ोसी सुन लेंगे कि अंदर क्या हो रहा है। तभी शबाना ने उसके मुहं पर अपनी चूत रख दी और मुझे किस करने लगी और हम तीनो ने त्रिभुज बना दिया। शन्नो सीधी लेटी थी और शन्नो के मुहं पर शबाना अपनी चूत रखकर बैठी थी और शन्नो की चूत को में चोद रहा था और शबाना और में किस कर रहे थे। फिर मैंने उसकी चूत से लंड बाहर निकाल कर उसकी गांड में लंड डाल दिया और थोड़े टाईम बाद के बाद में अपना वीर्य छोड़ने वाला था। तभी आशिया आई और मेरे लंड के पास मुहं खोलकर बैठ गयी और में उसका ईशारा समझ गया और मैंने सारा वीर्य आशिया के मुहं में छोड़ दिया। आशिया एकदम सारा वीर्य आम की तरह चूस चूस कर पी गयी और पूरा लंड साफ कर दिया। फिर शबाना बोली कि मेरे लिए तो छोड़ देती साली.. तभी में बोला कि रुक शबाना में तुझे और देता हूँ। फिर शन्नो ने इतने में सारा वीर्य चाटकर आशिया के मुहं पर लगा सारा वीर्य साफ कर दिया। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | तभी मैंने अब शबाना को लेटा लिया और उसकी चूत पर लंड रखकर घुसाने की कोशिश की.. लेकिन उसकी चूत बहुत टाईट थी। फिर शन्नो बोली कि कुँवारी चूत है साहब.. जरा ज़ोर से झटका मारो धीरे धीरे धक्को से इसकी चूत में कोई असर नहीं होगा। फिर मैंने एक ज़ोर से झटका मारा और लंड आधा अंदर चला गया और शबाना की चूत से खून आने लगा। तभी शन्नो बोली कि मुबारक हो तेरी चूत का उदघाटन हो गया.. लेकिन शबाना ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी.. क्योंकि उसकी यह पहली चुदाई थी। तो शन्नो ने उसे किस करके चुप करवा दिया और मैंने जोर जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए और लंड पूरा का पूरा चूत के अंदर कर दिया.. लेकिन दोस्तों शबाना की चूत शन्नो की गांड से भी बहुत टाईट थी। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

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 फिर मैंने एक घंटे तक लगातार उसकी ताबड़तोड़ चुदाई की और धीरे धीरे उसे भी चुदाई का मजा आने लगा। फिर आखरी के तीन चार धक्को के बाद में झड़ने लगा और मैंने अपना सारा वीर्य शबाना के बूब्स पर डाल दिया। फिर शन्नो और शबाना ने सारा वीर्य चाट लिया.. लेकिन हम सब अब थक चुके थे और में शबाना के ऊपर ही लेट गया और शन्नो साईड में और मुझे किस करते करते हम तीनो सो गये। आशिया रात भर अपनी चूत अपनी उँगलियों से चोदती रही और सुबह हो गयी और हम अगले दिन

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