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कमसिन पड़ोसन की कुंवारी बूर को पेल डाला

मैंने एक कुंवारी बूर को चार साल पहले चोदा था, वो बूर पड़ोस की एक कमसिन जवान जन्नत की परी की थी।

दोस्तो, मेरा नाम अंकित है। मेरी उम्र 23 साल है। मैं एक आकर्षक लड़का हूँ। मैं इस वक्त बीएससी के सेकंड इयर में हूँ।

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4 साल पहले मैं पहली बार पटना आया था। उस समय मैं दसवीं पास करके इंटर की तैयारी करने के लिए आया था। तो मैंने अपने लिए एक छोटा सा फ्लैट लिया। मैं जिस मकान में रहता था उसके बगल वाले फ्लैट में एक गोरी सी लड़की रहती थी। वो एक बहुत मस्त माल थी।

उसकी फिगर का साइज़ 33-28-34 का था। वो बहुत कामुक लड़की थी। उसे देख कर मेरा जी करता था कि उसे अभी जाकर चोद डालूँ, पर ऐसा कर नहीं सकता था।

उसकी 34 इंच की चूचियों को देख कर मेरा जी करता कि इनको इतना मसलूँ कि चूचियों में से दूध निकल कर मेरे लंड को भिगो दे। उसकी उठी हुई गांड का तो कोई जबाव ही नहीं था। वो कोई जन्नत की परी लगती थी।

वो हमेशा मुझको देखती रहती थी। मुझे उससे प्यार होने लगा था। कुछ समय बाद मुझसे रहा नहीं गया और एक दिन मैंने इशारे से उसे छत पर आने को कहा। उसने भी इशारे में ‘हाँ’ कह दी।

उसकी हामी मिलते ही मेरा दिल तो गार्डन-गार्डन हो गया।

मैं तुरंत छत पर गया। कुछ समय बाद वो भी छत पर आ गई। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.. तो वो शरमा गई।

फिर मैंने उसका नाम पूछा.. तो उसने अपना नाम अंजलि बताया।
मैंने कहा- बहुत सुन्दर नाम है।
वो ‘थैंक्स’ बोल कर मेरा नाम पूछने लगी.. तो मैंने अपना नाम बताया।
उसके बाद मैंने उससे कहा- आई लव यू..

इस पर वो मुस्कुराने लगी तो मुझे समझ में आ गया कि हरी झंडी हो गई है।

मैंने तुरन्त उसकी कमर में हाथ डाल कर उसके होंठों पर लम्बा सा किस कर दिया।

वो शर्मा गई और मेरा हाथ छुड़ा कर नीचे भाग गई।

इस प्यार की शुरूआती अगन से मेरी तो हालत पतली हो गई।

जब उस रात मैं स्टडी कर रहा था तो उस वक्त मैं सिर्फ अंजलि के बारे में ही सोचता रहा। तभी अचानक उसने छत के रास्ते से आकर मेरे कमरे का दरवाजा खड़काया.. मैंने खोला तो वो तुरंत अन्दर आ गई। उस समय मैं सिर्फ़ चड्डी पहने हुए था। वो मुझे देखकर शर्मा गई।

मैंने सबसे पहले दरवाज़ा लॉक किया और उसका हाथ पकड़ कर अपने बिस्तर बैठा लिया। इसके बाद मैं खुद भी उससे सट कर बैठ गया। मैं उसके साथ यूं ही बात करने लगा फिर उसके साथ माहौल को हल्का बनाने के नजरिए से उसकी फैमिली के बारे में पूछा।

वो बोली- पापा हर 6 महीने में केवल एक हफ्ते के लिए आ पाते हैं। उनके बिना अच्छा तो नहीं लगता है पर क्या करें.. हम लोग यहाँ सिर्फ स्टडी के लिए रह रहे हैं।

मैंने जानबूझ कर उसके बालों को सहलाने लगा। मैंने पूछा- हम लोग से मतलब?

वो बोली- हम सब से मतलब.. मैं और मेरा भाई.. वो अभी 6वीं में है.. मेरी मम्मी के साथ ही यहाँ रहते हैं।
मैंने कहा- अच्छा.. तो आज मम्मी कहाँ गई हैं।
वो बोली- मेरे मामा जी की तबीयत खराब हो गई है.. तो मम्मी उन्हें देखने गई हैं.. और मेरा भाई सो रहा है।

ये सुनकर मैं समझ गया कि अंजलि की बूर में खुजली हो रही होगी, सो ये अपने आप इधर मेरे पास आ गई है। ये सोच कर मेरा लंड 90 डिग्री का कोण बनाने लगा। मैंने बिना देर किए उसके होंठों को पीना शुरू कर दिया, वो भी मचलते हुए मेरा साथ देने लगी।

मैंने उसका हाथ अपने लंड पर रख दिया.. तो वो मेरे लंड को ऊपर से ही दबाने लगी।

मैंने उसके होंठों को चूस-चूस कर एकदम लाल कर दिया। वो भी अकड़ कर एकदम हॉट हो चुकी थी। उसने मेरी चड्डी में अपना हाथ डालकर लंड को बाहर निकाल लिया।

‘ओह्ह ये बहुत बड़ा है।’

वो जोर-जोर से मेरे लंड को मसलने और दबाने लगी। मैंने भी उसका टॉप उतार दिया फिर स्कर्ट को भी खोल दिया।

अब वो मेरे सामने सिर्फ पिंक ब्रा और ब्लैक चड्डी में थी। उसकी चूचियां एकदम तने हुए संतरे जैसी लग रही थीं। उसकी चूचियां बिल्कुल ठोस थीं। मैंने उसकी ब्रा को भी अलग कर दिया। फिर मैंने उसकी पेंटी को भी खींच कर उतार दिया।

आह्ह.. वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी।

मैं उसकी चूचियों को चूसता रहा और उसकी जाँघों को सहलाते हुए उसकी बूर तक हाथ ले गया। वो अजीब-अजीब तरह की आवाज निकाल रही थी ‘प्लीज़.. ऐसा मत करो.. मुझसे अब बर्दाश्त नहीं होता.. ऊओईईई.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… कुछ करो..’

उसकी ऐसी कामुक आवाजों से पूरा कमरा गूँज रहा था। वो पूरी तरह से बूर चुदवाने के लिए तैयार हो चुकी थी।

मैंने उसकी बूर को अपने होंठों से चूसना शुरू कर दिया। वो मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। उसका पूरा मुँह मेरे लंड से भर चुका था। वो पूरी तरह से मेरे बस में आ चुकी थी।

पूरा कमरा चुदास से भरी सीत्कारों से गूँज रहा था। मैं उसके ऊपर 69 के पोज़ में था।

अब वो झड़ने वाली थी। मैं उसकी बूर की खुशबू में पागल सा हो रहा था। मैं उसकी बूर में अपनी जीभ को अन्दर-बाहर कर रहा था। वो अब सिर्फ़ अपनी सीत्कारों में खुद को चोदने के लिए कहे जा रही थी।

‘फक मी फक मी.. अंकित अब और मत तड़ापाओ.. फक मी.. चोद डालो मुझे.. बनो दो मुझे औरत.. अपनी पत्नी बना कर चोद दो फाड़ डालो मेरी बूर को.. प्लीज़ मत तड़पाओ..’

तभी वो एकदम से अकड़ गई और झड़ने लगी। मैं उसकी बूर के पूरे पानी को पी गया।

हम दोनों को ऐसा करते हुआ काफी देर हो चुकी थी। वो झड़ने के बाद अब थोड़ी शांत हो गई थी और मेरे लंड को चूस रही थी। अब मैं भी झड़ने वाला था।

वो मेरे लंड को बड़ी बेरहमी से चूस रही थी। मुझे ऐसा लग रहा था कि आज ये लंड खा जाएगी।

तभी मैंने उसके मुँह में ही अपना पूरा रस छोड़ दिया। वो झड़ते हुए लंड को चूस कर पूरा वीर्य पी गई।

अब वो फिर से गर्म हो चुकी थी। उसने खुद से मेरा लंड अपने चूचों के बीच में फंसा कर रगड़वाने लगी। इससे मेरा भी जोश फिर से चढ़ने लगा।

मैं तुरंत उसके चूचों को दोनों हाथों से पकड़ कर उसकी चूचियों को चोदने लगा।

वो एकदम पागल हो चुकी थी।

‘आह्ह.. अंकित प्लीज़ मुझे चोद दो.. अब मत तड़फाओ।’

अब मुझको भी लगने लगा था कि ये चोदने का सही समय है।

मैंने उसकी बूर को फिर से एक बार देखा। बूर पूरी तरह से खुशबूदार पानी से लबरेज लग थी। ऐसा लग रहा था कि गुलाब की पंखुरियां खिल चुकी हों।

मैंने तुरंत अपने लंड में क्रीम लगाई और थोड़ी सी क्रीम उसकी बूर पर भी मल दी। जैसे ही मैंने अपना लंड उसकी बूर पर रखा.. वो सिहर गई।

अब मैंने देर न करते हुए उसकी बूर में एक झटका दे डाला। वो चिल्लाने लगी मैंने तुरंत उसके मुँह पर हाथ रख दिया वो थोड़ी देर के दर्द के बाद वो कुछ शांत हुई तो मैं उसकी बूर में लंड को अन्दर-बाहर करने लगा। लंड अभी पूरा बूर के अन्दर नहीं घुसा था।

मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और कसके एक झटका और दे दिया। अब वो एकदम अकड़ने लगी।

वो बोल रही थी- आह्ह.. छोड़ दो.. बहुत दर्द हो रहा है।

शायद इसी लिए वो हमेशा लंड पकड़ कर कह रही थी कि ये बहुत बड़ा है। आखिर लंड था भी लम्बा।

वो लंड से हुए दर्द से तड़फ रही थी। लेकिन अब कोई उपाय नहीं था।

वो रोने लगी.. मैंने फिर एक बार धक्का दे दिया.. वो बुरी तरह से रोने लगी थी और छटपटाए जा रही थी।

लेकिन मुझको तो ज्यादा मजा इसी समय आ रहा था। मैं लगातार उसकी बूर में धक्का मार रहा था। वो रो रही थी.. उसकी छूट से खून की धार छूट गई थी। मेरा पूरा चादर पर खून के छींटे आ गए थे।

अब वो भी कुछ शांत हो रही थी। मैं भी उसे और तेजी से चोदने लगा। कुछ पल बाद वो भी मेरा साथ देने लगी।

मैं उसे लगातार चोदता रहा। वो भी मेरा साथ देती रही। अब तक वो दो बार झड़ चुकी थी।

मैं भी दो बार झड़ चुका था। तब हम दोनों उसी तरह मेरा लंड उसकी बूर में ही घुसा रहा। हम लोग कुछ देर बाद फिर से चुदाई में लग गए। लेकिन अब वो उठने की हालत में नहीं थी।

मैं तुरंत जाकर फ्रेश हुआ और अपनी फर्स्ट एड बॉक्स से उसको कुछ दर्द की गोली दी।

फिर मैंने एक घाव सूखने वाली क्रीम अपने लंड पर लगा कर उसकी बूर में लंड डाल कर लगा दी।

अब वो कुछ ठीक महसूस कर रही थी। मैंने उसके लिए चाय बनाई और उसे सुला दिया।

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दोस्तो, आपको कुंवारी बूर की ये कहानी कैसी लगी आप मुझे मेल जरूर कीजिएगा।

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