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भाबी की चूत और चूची की मसाज

मेरा नाम रवि हैमें मुंबई में अपने बड़े भाई राजन उम्र 35 साल और भाभी रागिनी उम्र 32 साल और में रवि उम्र 30 साल उनके साथ रहता हूँ. मेरे भैया की शादी 6 महीने पहले रागिनी भाभी से हुई, में शादी में शामिल होने के लिए छुट्टी लेकर आया था, में कॉलेज के बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए बाहर चला गया था और जब में शादी में आया, तब तक मुझे भाभी के बारे में कुछ भी नहीं पता था कि भैया का रिश्ता किसके साथ तय हुआ है.

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जब शादी में आया, तो पता चला कि भाभी का नाम रागिनी है और वो लोग यहीं 4-5 किलोमीटर की दूरी पर रहते है. अभी तक मैंने भाभी की कोई फोटो भी नहीं देखी थी, शादी के समय जब पहली बार मैंने अपनी भाभी को देखा, तो मेरे तो होश ही उड़ गये, इसलिये नहीं कि वो बहुत सुन्दर थी, बल्कि इसलिये कि में भाभी को बहुत अच्छे से जानता था, क्योंकि वो मेरे साथ कॉलेज में पढ़ती थी और हम दोनों सहपाठी रह चुके थे और एक दूसरे को अच्छे से जानते थे.
में ही नहीं बल्कि वो भी मुझे देखकर घबरा गई थी और बाद में उन्हें पता चला कि में ही उनका इकलौता देवर हूँ. रागिनी मेरी क्लासमेट ज़रूर थी, लेकिन हम दोनों फ्रेंड्स नहीं थे, क्योंकि रागिनी बहुत ही खूबसूरत मस्त फिगर वाली बिंदास लड़की थी और उसके बहुत सारे बॉयफ्रेंड थे.
कॉलेज में वो अक्सर कॉलेज बंक करके अपने बॉयफ्रेंड के साथ घूमती रहती थी और कॉलेज में 1-2 बार फेल भी हो चुकी थी. रागिनी बहुत खुले विचारो वाली लड़की थी और ये बात लगभग पूरे कॉलेज को पता थी कि रागिनी के बॉयफ्रेंड उसे ले जाकर चोदते भी थे और उसके बॉयफ्रेंड लोग ही बाहर आकर रागिनी की तारीफ करते नहीं थकते थे कि क्या सुपर माल है.
रागिनी 34-28-36 की साईज़ है और अंदर से एकदम कसी हुई है और चुदवाने में उसका जवाब नहीं, उछल-उछल कर ऐसे चुदती है कि रंडिया भी शरमा जाये और लंड तो ऐसा चूसती है कि लगता है कि सारा रस निचोड़ लेगी और सारे कॉलेज के लड़के मज़ा लेकर सुनते और आहें भरते थे कि काश एक बार उन्हें भी रागिनी चोदने को मिल जाये और कई बार तो रागिनी ने कॉलेज बंक करके ग्रुप में भी चुदवाया था. ये सारी बातें उनके बॉयफ्रेंड से ही पता चलती थी.
फिर में भी इन सब बातों को बड़े मज़े लेकर सुनता और सुनकर मेरा लंड भी अकड़ जाता और रागिनी को चोदने की मेरी भी इच्छा होती थी, यूँ कहे तो पूरा कॉलेज आहें भरता था और रागिनी के नाम की मुठ मारता था, लेकिन रागिनी को कोई फ़र्क नहीं पड़ता था. उसे जो पसंद आता, बस उसी को ही अपना बॉयफ्रेंड बना लेती थी और उन्ही से चुदवाती थी. वो भी शौक से यूँ कहे कि चुदाई का बहुत शौक रखती थी रागिनी, लेकिन कॉलेज तक तो ठीक था.
मुझे रागिनी से कुछ लेना देना नहीं था, कॉलेज के बाद आगे की पढ़ाई के लिए में बाहर चला गया और अब सीधे शादी में आया और जब रागिनी को भैया के बगल में उनकी दुल्हन के रूप में देखा, तो आश्चर्य का ठिकाना ही नहीं रहा. अब कुछ हो भी नहीं सकता था. फिर मैंने चुप रहना ही ठीक समझा और पछताने लगा कि काश एक बार फोटो ही मांग कर देख लेता, तो ये सब नहीं होता. शादी अच्छे से निकल गई और रागिनी मेरी भाभी बनकर मेरे घर आ गई.
हम दोनों में कोई बात नहीं होती थी और कोशिश करते थे कि एक दूसरे के सामने कम ही जाये, बस काम की ही बातें होती थी और कॉलेज की बातें दूर की बात थी. सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था और ऐसे ही 3 महीने निकल गये. भैया सुबह ऑफिस जाते और शाम को घर आते थे. एक दिन की बात है, जब में अपने दोस्त के पास से मार्केट होते हुए आ रहा था, तो मैंने भाभी को उनके एक पुराने बॉयफ्रेंड के साथ देखा, उस लड़के का नाम मोनू था और वो कॉलेज से ही रागिनी भाभी का बॉयफ्रेंड था.
भाभी उस लड़के मोनू के साथ हंस हंसकर बातें कर रही थी और उसके बाद वो लड़के के साथ बाईक पर बैठी और कहीं चली गई और में देखता रह गया और मुझे सारा माजरा समझ में आ गया कि शादी के बाद भी रागिनी भाभी अभी भी वही पुरानी रागिनी ही है. मुझे बहुत गुस्सा आया और में घर आ गया और अपने रूम में जाकर लेटे लेटे सोचता रहा और मुझे नींद आ गई. जब में सोकर उठा. फिर मैंने भाभी से बात करने की ठान ली, तब तक भाभी वापस आ चुकी थी. में भाभी के पास गया, वो किचन में कुछ काम कर रही थी, फिर में बोला कि मुझे आपसे कुछ बात करनी है, तो वो बोली कि क्या बात है? आज मुझसे क्या बात करनी है आपको.
में – भाभी ये सब अब नहीं चलेगा.
भाभी – क्या नहीं चलेगा?
में – यही जो आप कर रही हो.
भाभी – तो वो अंजान बनते हुए बोली कि मैंने क्या किया है? तो मैंने सारी मार्केट वाली बातें बताई और हिदायत दी कि अब ऐसा नहीं होना चाहिये और गुस्से में वहां से चला गया.
एक दो दिन तो उन्होंने कुछ नहीं किया, लेकिन एक हफ्ते के बाद भाभी मार्केट जा रही थी, तो मुझे शक हुआ और मैंने उनका पीछा किया, तो पाया कि फिर से वही भाभी का बॉयफ्रेंड मोनू बाईक लेकर आया और भाभी जैसे ही बाईक पर बैठी कि उनकी नज़र मुझ पर गई और वो नज़र नीची करके बाईक से उतर गई और मोनू से कुछ बोला, तो वो वहां से चला गया और भाभी भी घर चली आई और उनके पीछे में भी घर आ गया और उनसे पूछा कि ये सब क्या है? तो वो बोली कि मुझे माफ़ कर दो, तो मैंने 2 थप्पड़ लगा दिये, तो वो रोने लगी और में वहां से चला गया.
उस दिन भैया का एक दोस्त शाम को अमेरिका जाने वाला था, तो में भाभी के पास गया और सॉरी बोला, तो वो मुझे घूरकर देखने लगी, तो मैंने एक बार फिर से सॉरी बोला और वहां से चला गया.
फिर हमने डिनर किया और में अपने कमरे में चला गया और भैया अपने दोस्त से मिलने बाहर चले गये. भैया के दोस्त की फ्लाईट रात के 3 बजे थी, तो लगभग 12 बज चुके थे, भैया और उनके दोस्त गार्डन में बैठे बातें कर रहे थे. इतने में भाभी मेरे रूम में आई और मुझसे बोला कि रवि मेरे रूम में आना और चली गई और में भी पीछे से उनके रूम में चला गया. में अंदर गया, तो देखा भाभी एक पारदर्शी काले कलर की नाईटी पहने खड़ी थी और अंदर उनकी गुलाबी कलर की ब्रा और पेंटी साफ झलक रही थी. काले कलर में उनका शरीर चमक रहा था.
मेरे रूम में जाते ही पहले उन्होंने रूम लॉक किया और फिर मेरी तरफ मुड़ी और मेरे हाथों को पकड़कर बोली कि सॉरी रवि, लेकिन तुम तो मेरी आदत जानते हो, तुमसे तो कुछ भी नहीं छुपा है. में आज के बाद कभी बाहर नहीं जाऊंगी, लेकिन मेरी एक शर्त है. फिर मैंने पूछा कि क्या शर्त है? तो जवाब में वो मेरी और बढ़ी और मेरे सर को पकड़कर मेरे होंठो से होंठ सटाकर चूम लिया और मुझसे लिपट गई, तो में इस अचानक हुये हमले के लिये तैयार नहीं था. में अलग होकर पीछे हट गया और बोला ये सब ठीक नहीं है, तो भाभी बोली कि तुम नहीं तो कोई बाहर वाला करेगा, फिर मुझसे कुछ मत बोलना. में बोला भैया है ना बाहर क्यों जाती हो.
भाभी – तुम्हारे भाई के अलावा मुझे सभी में दिलचस्पी है.
में – ऐसा नहीं है भाभी, भैया आपसे बहुत प्यार करते है .
भाभी – हाँ, लेकिन उनके प्यार से सिर्फ़ वो ही संतुष्ट है, में नहीं. फिर भाभी ने अपनी नाईटी निकाल दी और बोली कि आज के बाद में किसी से नहीं मिलूंगी. तुम मुझे अच्छे से जानते हो बिना चुदाई के में नहीं रह सकती और मुझसे लिपटकर जोर से चूमने लगी.
अब मुझे भी जोश आने लगा, आख़िर में भी मर्द ही था. में भाभी को महसूस करने लगा और मेरे लंड ने हाफ पेंट में तंबू बना लिया. फिर मैंने सोचा कि अगर मेरे चोदने से भाभी का बाहर चुदवाना बंद हो सकता है, तो में भाभी को ज़रूर चोदूंगा. आख़िर घर की इज़्ज़त कौन बाहर जाने देगा, बस फिर क्या था.
मैंने अपनी बाहें भाभी पर कस ली और कॉलेज के गुज़रे दिन याद करने लगा. जब मेरी रागिनी भाभी को कॉलेज के हर लंड की चाहत थी. लंड की रानी चुदक्कड़ रागिनी इतना सोचते ही में बेकाबू हो गया और में भी रागिनी भाभी को बाहों में जकड़कर चूमने लगा. फिर उनके होंठो को मुँह में भरकर जबरदस्त लिप लॉक करते हुए किसिंग की और उनके होंठो को बहुत देर तक चूसता रहा. मेरा लंड पेंट में अकड़ने लगा था.
फिर मैंने गालो पर किस किया, कान पर और कान के नीचे के हिस्से को चूसा. फिर गर्दन पर चूमने लगा, तो भाभी अपना चेहरा कभी दाएँ तो कभी बायं कर रही थी और एक हाथ उन्होंने मेरे लंड पर रख दिया और सहलाने लगी और मुस्कुराकर बोली कि में बहुत खुश हूँ कि मुझे तुम जैसा देवर मिला. भाभी मेरे लंड को ऊपर से नीचे तक उसकी लंबाई और मोटाई माप रही थी और खुश हो रही थी.
शुरू में मुझे थोड़ा अजीब लगा, लेकिन फिर अच्छा लगने लगा. मुझे पसीना आने लगा और दिल की धड़कन तेज हो गई. कॉलेज के बाद यह मेरा पहली बार था कि में अपनी भाभी को सेक्स की नज़र से देखने लगा था. भाभी ने बोला कि तुम्हारी पेंट में पहाड़ क्यों बना है? और मुस्कुराकर कामुक निगाहों से मुझे देखे जा रही थी और मेरे सीने पर हाथ फेर रही थी.
मैंने भाभी से पूछा कि भाभी आप और भैया क्या रोज़ सेक्स करते हो, तो वो बोली कि में इतनी ख़ुशनसीब नहीं हूँ. तुम्हारे भैया के लिए उनका काम ही ज़्यादा ज़रूरी है, वो थककर आते है और सो जाते है. फिर में बोला कि भाभी क्या में आपको एक बार फिर से किस कर सकता हूँ?
भाभी मुस्कुरा दी और मेरी तरफ देखा और कुछ रिप्लाई नहीं किया, वो सीधे अपने होठों को मेरे होठों के करीब लेकर आई और मेरे लिप्स को चूसने लगी. में हक्का बक्का रह गया था, क्योंकि मैंने कभी सोचा नहीं था कि शुरुवाती पहल भाभी की तरफ से होगी. में संभला और में भी भाभी का साथ देने लगा और भाभी के होठों को काटने और चूसने लगा.
अब हम दोनों ही उत्तेजित हो गये थे और एक दूसरे को जोर जोर से चूम रहे थे. लगभग 5 मिनट की किसिंग के बाद मैंने भाभी को अपने से चिपका लिया और उनकी पीठ सहलाने लगा. जब ब्रा की स्ट्रीप मेरे हाथ लगी, तो मैंने ब्रा की हुक खोल दी और बस भाभी को चूमता चाटता हुआ उनके 36 साईज़ के बूब्स दबाने और सहलाने लगा.
फिर उनकी निप्पल को दो उंगलियो के बीच लेकर मसलने लगा और उनके एक बूब्स को मुँह में लेकर चूसने लगा, बूब्स बहुत सॉफ्ट लग रहा था और उस पर किशमिश के दाने की तरह का ब्राउन निप्पल और उसके चारो और एक इंच के दायरे में पिंक ब्राउन धारी गोरे-गोरे बूब्स पर कितना आश्चर्य लग रहा था. में बूब्स को तेज़ी से चूसने और मसलने लगा, तो भाभी मस्त होकर, आहह आँह ऊओह करने लगी और वो भी मुझे चूमने लगी और मेरे सर को सहलाने और अपने बूब्स पर दबाने लगी.
फिर मैंने बारी बारी से दोनों चूचियों को खूब चूसा और रागिनी डार्लिंग आह आह की आवाजें लगातार निकालती रही. अब उनकी चूचियों के निप्पल लाल होकर एकदम खड़े हो गये थे. अब में चूमते हुए नीचे आया और उनकी नाभि को चूमकर थोड़ी देर जीभ नाभि में घुमाई और हाथों से भाभी के चूतड़ सहलाने और दबाने लगा. फिर नीचे आकर पेंटी के ऊपर से ही चूत पर किस ली, तो भाभी ने आहहह ऊससस्स की आवाज की.
फिर हल्के हल्के सहलाते हुए पेंटी नीचे खींच दी और भाभी की क्लीन शेव चिकनी चूत को देखने लगा, इसी दौरान भाभी ने पैरो से अपनी पेंटी निकाल दी. में भाभी के चूतड़ को दबाते हुए चूत पर क़िस करने लगा. भाभी की चूत एकदम गोरी थी और नीचे की और थोड़ी सावंली थी और उस पर एक गुलाबी लाईन नीचे की और गई थी.
फिर मैंने भाभी की चूत को ताबड़तोड़ चूमते हुए चूतड़ को सहलाने लगा और चूत को जितना अंदर हो चूसा और चूमने की कोशिश करने लगा, तो भाभी ने मेरा सर सहलाते हुये पैरो को थोड़ा चौड़ा किया, लेकिन उन्हें खड़े होने में दिक्कत हुई, तो मैंने उन्हें बेड पर बिठा दिया और वापस उनकी टांगों को अलग करके चूत को चूमा और चाटने लगा.
मैंने नीचे से लेकर ऊपर तक पूरी चूत की लाईन पर अपनी जीभ चलाई और भाभी की जाँघो को हाथों से सहलाने लगा, तो भाभी ओन्नह आअहह, जैसी आवाजें निकालने लगी और मेरे सर को सहलाते हुए बोलने लगी, आहह रवि बहुत अच्छा लग रहा है, सस्सह आअहह और करो, खा जाओ मेरी चूत को आहह सस्स्सह. अब मैंने भाभी की चूत की फांको को अलग किया तो अंदर का नज़ारा सब कुछ गुलाबी था, चूत का छेद और उसके ऊपर का मटर के दाने जैसा था.
अब में चूत के दाने पर जीभ फेरने लगा और जीभ से उसे कुरेदने लगा. भाभी तो जैसे कराहने लगी, ह्ह्ह्हह ऊन्ह अहह श्श्शश्स, जैसी आवाजें निकालते हुए कमर नोचने लगी. उनकी चूत गीली हो चुकी थी, तो मैंने अपनी एक उंगली चूत के अंदर डाल दी और आगे पीछे करके उंगली अंदर बाहर करने लगा.
यह सब ब्लू फिल्म देखकर सीख गया था. भाभी एकदम मस्त होकर झूम रही थी और अपने हाथों से मेरे सर को चूत पर दबा रही थी और आँखे बंद किये हुए बड़बड़ा रही थी, आअहह रवि ऊओह मेरे राजा खा जा मेरी चूत को, तू तो एक्सपर्ट है मेरी जान हह और जोर से हहउऊउउहह और जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो भाभी ने मुझे हटा दिया और मेरा हाफ पेंट और टी-शर्ट निकाल दिया. हाफ पेंट निकलते ही मेरा लंड उछलकर बाहर आ गया और रागिनी भाभी ने उसे पकड़कर देखा.
फिर सहलाते हुए नीचे बैठकर लंड की स्किन को पीछे किया और सुपाड़े को मुँह में लेकर चूसने लगी और में उसके सर को सहलाने लगा. मुझे बहुत मज़ा आने लगा, में दोनों हाथों से भाभी के सर को पकड़कर कमर हिलाने लगा. भाभी एक हाथ से अपनी चूत को सहला रही थी और दूसरे हाथ से लंड के बचे हुए हिस्से को आगे पीछे करके सहला रही थी. अब में आअहह शस्स्स्स की आवाज़ करके भाभी के मुँह में ही हल्के हल्के धक्के लगाने लगा, अचानक भाभी उठी और बोली कि अब सहन नहीं हो रहा है.
फिर बिस्तर पर लेटकर टांगे चौड़ी करके चूत की और इशारा करके बोली कि देखो कितना पानी छोड़ रही है, अब आ जाओ और अपना लंड डालकर शांत कर दो. मेरे राजा और रिक्वेस्ट करने लगी कि मुझे चोदो प्लीज़, मुझे चोदो और मैंने भाभी के कहने पर उनकी अलमारी से कंडोम निकाला. फिर भाभी ने कंडोम मेरे सख्त लंड पर चढ़ाया और इशारा किया, में मुस्कुराते हुए भाभी के पैरो के बीच में बैठ गया और भाभी के ऊपर आकर उनके होंठो को चूमने लगा और भाभी की चूचियों को दबाने और मसलने लगा और लंड को बिना हाथ लगाये ही चूत पर रखा और एक झटका दिया, तो लंड सही सेट ना होने की वजह से फिसल गया.
फिर एक बार और ऐसे ही किया, तो फिर स्लिप हुआ, तो मेरा लंड बार बार स्लिप होता देखकर भाभी ने अपने हाथों से लंड को चूत के दरवाजे पर सेट करते हुए अंदर किया और फिर मेरी पीठ को सहलाया और हल्के से नीचे से ऊपर की और चूत को लंड पर दबाया. फिर मैंने पूरे जोश में दम लगाकर धक्का मारा और पूरा लंड चूत में घुसेड़ दिया. भाभी की चूत गीली होने की वजह से पूरा लंड एक ही झटके में घुस गया, तो भाभी के मुँह से जोर से ऊऔच आअहह की आवाज़ निकली और आवाज़ इतनी तेज थी कि नीचे पार्क में बैठे भैया और भैया के दोस्त को सुनाई दी, तो भैया ने भाभी को आवाज़ दी कि क्या हुआ रागिनी? तो भाभी बोली कुछ नहीं छिपकली थी और फिर बगल में पड़े रिमोट से टी.वी. चालू कर दिया और गाने का चैनल लगा दिया. फिर मुस्कुराकर मेरी और देखा और मुझे चूम लिया, भाभी की चूत अभी भी इतनी टाईट थी कि लंड को कसकर जकड़े हुए थी.
अब में भी भाभी को चूमते हुए उनके बूब्स मसलने लगा और हल्के हल्के धक्के के साथ चुदाई शुरू कर दी. भाभी लगातार मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए कुछ ना कुछ बोले जा रही थी और ज़ोर से आहह और ज़ोर से मेरे राजा. मैंने स्पीड बड़ाई तो भाभी भी नीचे से साथ देने लगी, भाभी तो अनुभवी थी और उचक उचककर चुदवा रही थी और गपागप पूरा का पूरा लंड निगल रही थी और में भी पूरा लंड बाहर निकालता, सिर्फ़ सुपाड़ा चूत में ही रहता और फिर ज़ोर के धक्के के साथ अंदर ठोक देता था. पूरे कमरे में ठप-ठप की आवाज़ और चूत के पानी की वजह से पच-पच जैसी आवाजें आ रही थी. ठप-ठप और पच-पच जैसी चुदाई संगीत से पूरा कमरा गूँज रहा था और ऊपर से भाभी की आहह ऊईईइ हहऊंम आसस्शह जैसी आवाजें मुझे सुनाई दे रही थी और उस पर टी.वी. की आवाज़ आ रही थी.
भाभी अब थोड़ा अकड़ने जैसे करने लगी और मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया और अपनी टांगों को मेरी कमर पर लपेट लिया और मुँह से और तेज और आअहह आआईईई माँ गईईईईईई आहहा हा आहा फक मी और तेज चोदो चोदो और फिर उनका शरीर काँपते हुए मुझे इतना कसकर जकड़ लिया कि में बहुत मुश्किल से हल्के हल्के ही धक्के लगा पाया.
भाभी अब झड़ने लगी और उनकी चूत बहुत गीली हो गई और वो मेरे कान को अपने दातों तले दबाकर काटने लगी और पीठ पर इतनी ज़ोर से पकड़ बनाई कि उनके नाखुनों के चुभने का मुझे महसूस हो रहा था. अब में रुक गया और भाभी ज़ोर ज़ोर से हाफ़ते हुए अपनी सांसे कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थी. फिर मैंने फिर से उनकी चूचियों को चूसना और दबाना चालू किया और भाभी मेरी पीठ को सहलाती रही, लगभग 2 मिनट के बाद भाभी फिर से गर्म हो गई. फिर मैंने चूमते हुए उनके होंठो पर किस किया और 2-4 धक्के लगाये और फिर उठकर खड़ा हो गया और भाभी को डॉगी पोज़िशन में आने को बोला, तो वो मुस्कुराकर बोली कि अरे वाह आप तो एक्सपर्ट हो गये हो और बिस्तर पर ही पोज़िशन ले लिया. मैंने पीछे जाकर पीछे से एक बार चूत को चूमा और सहलाया और चूत पर लंड सेट करके ज़ोर के धक्के के साथ पूरा लंड अंदर कर दिया, लंड घुसते ही भाभी की चीख निकल गई, टी.वी. चालू थी तो इसलिये आवाज़ दब गई.
अब में लगातार तेज तेज धक्के लगा रहा था और झुककर भाभी की चूचियों को मसल रहा था और भाभी आहह आहह हा हा हा करते हुए सेक्सी आवाजें निकाले जा रही थी और गांड पीछे करके चुदवा रही थी. इसी तरह चुदाई करते हुए ताबड़तोड़ धक्के और फिर वो वक़्त आ गया, जब हम अपने आखरी समय पर पहुँच गये और हम दोनों एक साथ झड़ गये और में भाभी के ऊपर लेट गया, तो भाभी मेरा वजन नहीं संभाल पाई और बिस्तर पर लेट गई. हम दोनों लिपटे हुए अपनी सांसे कंट्रोल कर रहे थे और में भाभी की पीठ पर लेटा हुआ, उन्हें चूम रहा था. फिर में भाभी के ऊपर से हट गया और बगल में लेट गया. फिर भाभी उठी और मुझे किस किया और अपनी पेंटी उठाकर मेरे लंड का कंडोम निकाला और पेंटी से मेरे लंड को साफ किया.
फिर वो मुस्कुराते हुये बाथरूम में घुस गयी. फिर मैंने भी झट से कपड़े पहने और नीचे आ गया, वो रात मेरी और मेरी भाभी की सबसे सुहानी रात थी, जिसे में कभी नहीं भूल पाऊँगा. फिर भाभी टाईम निकालकर मुझसे चुदती रही और अब अच्छी खबर यह थी कि भाभी का बाहर चुदवाना बिल्कुल बंद हो गया.

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