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अपनी मम्मी को चोदने की हसरत

दोस्तों आज मै अपनी कहानी को आगे बढ़ाते हुए अगली कड़ी पेश कर रहा हूँ आशा करता हु आप सभी एन्जॉय कर रहे होंगे और दिल पर ना लेते हुए कहानी का बस बजा ले तो चलिए आगे क्या हुआ जानते है | अरुन ने अपने आपको वहीं कारपेट पर लिटा लिया और अपनी मम्मी को अपने ऊपर इस तरह खींचा कि उसकी चूत उसके मुँह पर आ लगी। उसने अपनी जीभ उसकी चूत में घुसेड़ दी। अब वह इस बात का इंतज़ार कर रहा था कि अंजू उसका लण्ड चूसने लगेगी।

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अंजू के चेहरे पर मुश्कुराहट फैल गई। उसने झुककर उस झुलते हुए लण्ड को अपने हाथ में लिया और झट से मुँह में भर लिया। और बोली- “इसका लण्ड बहुत स्वादिष्ट है, रूचि…” उसने रूचि को हिम्मत देते हुए कहा।

इससे रूचि का यह डर कि वह उसके लड़के को काबू में ले लेगी शांत हो गया। रूचि ने भी देखा कि अंजू अरुन के लण्ड से जलपान कर रही थी। हालांकि वो इस दृश्य को देखना चाहती थी पर उसकी चूत में छाए तूफान पर उसका बस नहीं था।

“मुझे ज़रा मुड़ने दो अरुन…” कहकर रूचि तेजी से घूम गई जिससे उसका मुँह अंजू की ओर हो गया- “अब मेरी चूत चाटो अरुन…”

उसने अपना चेहरा नीचे झुकाया जिससे उसका सिर अंजू के सिर से जा टकराया। रूचि भी उस लण्ड का स्वाद लेना चाहती थी। अंजू ने भी दरियादिली दिखाई और अपने मुँह से उस चिपचिपाते लण्ड को निकालकर रूचि के मुँह की ओर कर दिया।

अंजू- “इसका स्वाद लो रूचि, तब तक मैं इन टट्टों का स्वाद लेती हूँ…”

रूचि ने अपनी जीभ अरुन के लण्ड के सुपाड़े पर फिराई और फिर धीरे से उसे अपने मुँह में भर लिया। इस समय उसे खाने और खिलाने का दोहरा मज़ा आ रहा था।

अरुन उन दोनों सुंदरियों की जिह्वाओं के आघात से तड़प रहा था। उसकी तमन्ना पूरी हो गई थी। पर उसका अपने ऊपर काबू खत्म हो गया था। कुछ ही मिनटों की चुसाई और चटाई से उसके लण्ड ने पिचकारी छोड़ दी। रूचि ने अपने मुँह में छूटते हुए रस को पीना शुरू कर दिया। अंजू ने रूचि को हटाने के उद्देश्य से उसके मम्मों को पकड़कर धक्का सा दिया। पर रूचि इसका कुछ और ही अर्थ समझी।

“और जोर से भींचो इन्हें अंजू… और तुम मुझे खाओ अरुन…” यह कहते समय उसे भी शिखर प्राप्ति हो गई।

अंजू उन दोनों को झड़ते हुए बस देखती ही रह गई। पर उसे यकीन था कि इंतज़ार का फल मीठा होगा। पर उसको मम्मी-बेटे के प्यार की गहराई का अनुभव जरूर हो गया था।

जब रूचि झड़कर शांत हुई तो अंजू उसकी ओर देखकर बोली- “मैं तुम्हारे मम्मों को तुमसे पूछे बिना नहीं दबाना चाहती थी। शायद तुम्हें ये पसंद न आया हो…”

“कोई बात नहीं, अंजू, मुझे वाकई अच्छा लगा था। मैं हमेशा अचरज करती थी कि दूसरी औरत के साथ यह सब करना कैसा लगेगा…” उसने अंजू के तने हुए मम्मों पर आंखें जमाते हुए जवाब दिया।

“हम दोनों भी नमूने हैं, रूचि… कुछ देर पहले हम एक दूसरे की जान लेने पर आमादा थे और अब संजयी बनने की बात कर रहे हैं…” दोनों औरतें साथ-साथ हँसने लगीं।

“शायद मैं तुमसे इसीलिये दूर रहना चाहती थी। मुझे डर था कि मैं कहीं तुम्हारे साथ सम्बंध ना बना लूँ…” रूचि बोली।

अरुन का लण्ड सामने के दृश्य को देखकर फिर से तनतना गया था। उसने अपने सामने नाचती हुई अपनी मम्मी की गाण्ड देखी तो वो उसके पीछे झुका और अपना दुखता हुआ लौड़ा अपनी मम्मी की चूत में पेलने लगा।

“नहीं अरुन…” रूचि ने अपनी चूत से उसका लण्ड बाहर निकालते हुए कहा- “मैं तुम्हें अंजू को चोदते हुए देखना चाहती हूँ। उसके पीछे जाओ और उसे चोदो… जाओ…” दोस्तों आप यह हिंदी सेक्स कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

अरुन का लण्ड इस समय इतना अधिक दुख रहा था कि उसे इस बात से कतई मतलब नहीं था कि उन दोनों में से किसे उसके मोटे लण्ड का आनंद मिलेगा। उसने अंजू के चूतड़ों को दोनों हाथों से पकड़ा और अपना लम्बा लण्ड जड़ तक, एक ही धक्के में ठोंक दिया।

अंजू की पनियाई हुई चूत ने भी आसानी से पूरे मूसल को अपने अंदर समा लिया। हालांकि अंजू अभी ही झड़ के निपटी थी, पर वो एक बार फिर तैयार थी। बोली- “धन्यवाद, रूचि, जो तुमने मुझे इसे चोदने दिया। मुझे खुशी है कि अब तुम सारी बात को समझती हो। मैं इतनी अकेली थी, इतनी चुदासी… मुझे इसके लण्ड की सख्त जरूरत थी…”

रूचि की चूत में भी आग बदस्तूर लगी हुई थी। उसने अच्छे पड़ोसी का कर्तव्य तो निभा दिया था पर वो इंतज़ार कर रही थी कि अरुन अंजू को निपटाकर उसकी चूत की प्यास बुझाए। कुछ ही देर की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद अरुन के झड़ने की बारी आखिर आ ही गई।

“मैं झड़ रहा हूँ, मम्मी…” अरुन चीखा और अपना रस अंजू की चूत में भरना शुरू कर दिया।
रूचि अपने सामने का दृश्य देखकर ही झड़ गई। अंजू आखिर में झड़ी। मम्मी-बेटे के बीच में सैंडविच की तरह चुदने का आनंद अपरंपार था।

“मेरे साथ झड़ो, तुम दोनों… दोनों… अरुन… रूचि… मैं तुम्हारी चूत के स्वाद से प्यार करती हूँ। मैं तुम्हारी घनघोर चुदाई से भी प्यार करती हूँ। अरुन, चोदो मुझे… चो…दो… मैं झड़ी रे… हाय रे… मैं मरी…”

जब सब शांत हुए तो अंजू को ऐसा महसूस हुआ जैसे कि वो भी सिंह परिवार का हिस्सा हो गई हो।

अन्जय एक बड़ा खतरा उठाने के बारे में सोच रहा था। ये पागलपन था और ये उसे भी पता था, पर वो कुछ रोमांचक करने के मूड में था। उसने अपना गोल्फ का खेल खत्म ही किया था और उसका ग्राहक मित्र राकेश उसे घर छोड़ने जा रहा था। उसने अगली सीट पर बैठे हुए अपने शरीर को मोड़ा, जब उसने अपने लण्ड को खड़ा होते हुए महसूस किया। उसका लण्ड अंजू को चोदने के ख्याल से सख्त हो रहा था। उस सुंदर चुदक्कड़ औरत को चोदने के बारे में सोचने के कारण आज उसका खेल बहुत बेकार रहा था।

राकेश की गाड़ी से उतरकर सीधा अंजू के घर में घुसने में खतरा था और रूचि घर पर थी तो ये खतरा और भी बढ़ जाता था। वो अपने खेल का सामान अंजू के घर ले जायेगा और वहाँ से अपने घर चला जायेगा और ऐसे दिखायेगा जैसे वो खेल कर लौटा है। अन्जय ने ये सोचते हुए अपने दुखते हुए लण्ड को एडजस्ट किया और अंजू की रसीली चूत में डालने का इंतज़ार करने लगा।

उधर रूचि, अंजू और अरुन ड्राईंग रूम में बैठकर बातें कर रहे थे। अब उनमें किसी तरह का मलाल नहीं था। हँसना और मज़ाक करना भी अब आसान था, चूंकि पिछले कुछ घंटों में वो काफी करीब आ चुके थे। तीनों नंगे ही बैठे थे।

“तुम दोनों रुक कर मेरे साथ खाना खाकर क्यों नहीं जाते। मेरे पास एक मोटा मुर्गा है जो मैं अकेले तो बिल्कुल नहीं खा पाऊँगी…” अंजू बोली।

रूचि- “धन्यवाद… आज इतना कुछ होने के बाद मैं अब घर जाकर खाना बनाने के मूड में भी नहीं हूँ…”

“अन्जय का क्या होगा… क्या हम उसे भी खाने के लिये आमंन्त्रित कर लें…” अंजू ने एक नटखट मुश्कुराहट के साथ पूछा।

रूचि बोली- “मुझे ये समझ में नहीं आ रहा कि मैं अन्जय को ये बदला हुआ माहौल कैसे समझा पाऊँगी… मेरी तो हँसी ही निकल जायेगी…”

“तुम क्या सोचती हो रूचि… क्या ये समझदारी होगी कि हम उसे बता दें कि तुम अरुन से चुदवाती हो…” अंजू ने पूछा- “उसके लिये शायद ये स्वीकार करना मुश्किल हो कि उसकी बीवी अपने ही बेटे से चुदवाती है…”

रूचि ने अपने एक मम्मे को खुजलाते हुए कहा- “इतना जो इन कुछ दिनों में हुआ है, उसे देखकर लगता है कि मैं सब कुछ संभाल सकती हूँ, चाहे वो एक बेहद नाराज़ पति क्यों न हो… और फिर उसके पास भी तुम्हें चोदने के बाद ज्यादा बात करने का मुँह नहीं है…”

“हाँ… पर मेरा क्या होगा, मम्मी…” अरुन के चेहरे पर गहरी चिंता के भाव थे।
रूचि ने अरुन के सिकुड़े हुए लण्ड को थपथपाते हुए कहा- “अपने पापा को संभालने का काम तुम मुझ पर ही छोड़ दो तो बेहतर है… मैं अब पीछे हटने वाली नहीं हूँ… उसे या तो सब स्वीकार करना होगा… या चाहे तो वो तलाक ले सकता है…”

“मम्मी…” अरुन अपने मम्मी-बाप के अलग होने की बात से आहत हो गया- “तुम्हारे ख्याल से ऐसा नहीं होगा। है न… मैं आप दोनों के बीच में नहीं आना चाहता…”

“नहीं… मेरे ख्याल से ऐसी नौबत नहीं आयेगी। कम से कम तुमसे चुदवाने से तो नहीं। इससे हमारी शादी में और दृढ़ता आयेगी। तुम्हें सोचकर आश्चर्य होगा पर तुम्हारे पापा ने मुझे एक बार कहा था कि बचपन में उनकी अपनी मम्मी को चोदने की हसरत थी…”

“दादी को… पर वो तो…” अरुन चौंक गया।

रूचि ने उसे झिड़कते हुए कहा- “अरे… वो अब बूढ़ी हुई हैं… पर अपने दिनों में वो बेहद हसीन थी… उस बात को छोड़ो… मेरा मतलब है कि ये कोई नई बात नहीं है कि कोई लड़का अपनी मम्मी को चोदने की इच्छा रखता हो। शायद पापा ये बात तुमसे ज्यादा अच्छे से समझ सकते हैं और इस बात का मुझे विश्वास है…”

उसी समय सामने के दरवाज़े की घंटी बजी। अंजू घबरा गयी- “इस समय कौन हो सकता है…”

“हम तुम्हारे अतिथि शयन कक्ष में रहेंगे जब तक कि तुम इस आगंतुक को नहीं निपटा देतीं। अरुन… अपने कपड़े उठाओ और मेरे साथ आओ…” रूचि ने कहा।

रूचि और अरुन को उस कमरे में गये अभी कुछ ही क्षण हुए थे कि अंजू घबराई हुई अपने ऊँची एंड़ी के सैंडल खटकाती अंदर आयी।

अंजू- “अरे बाहर तो अन्जय है… अब मैं क्या करूँ…”

“रूको…” रूचि ने कहा। उसका दिमाग तेज़ी से एक नतीज़े पर आया। फिर बोली- “उसे पता नहीं कि अरुन और मैं यहाँ हैं। उसे अंदर आने दो और अपने शयनकक्ष में ले जाओ। शायद सब कुछ ठीक हो रहा है। अगर तुम उसे अपने शयनकक्ष में लेजाकर चोदने में सफल हो जाती हो तो हम बीच में आकर तुम्हें रंगे हाथों पकड़ लेंगे… उसके बाद… समझीं…”
अंजू के चेहरे पर रंगत वापस आ गयी। उसे रूचि का प्लान समझ में आ गया- “हम्म्म्म… तब अन्जय बहुत ही अजीब सी हालत में होगा… उसे हमारे बारे में कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं होगी… है न…”

“एकदम सही…” रूचि ने एक विषैली मुसकराहट से कहा- “अब जाओ और जैसा मैंने कहा है… वैसा करो। हम यहाँ छुपते हैं, तुम जाकर उसके लण्ड को अपनी चूत में घुसवाओ…” ऐसा कहकर रूचि ने

अंजू की नंगी गाण्ड पर प्यार भरी एक चपत लगाई।

रूचि ने एक झिरी सी रखकर कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया। इसमें से वो बाहर चल रहे प्रोग्राम को देख-सुन सकती थी। उसने अन्जय के गोल्फ के सामान की आवाज़ सुनी। कुछ ही देर में उसने अंजू को अतिथि कक्ष के सामने से अन्जय को अपने शयन कक्ष में हाथ पकड़कर जाते हुए देखा।

उसने अंजू की बात सुनी- “मैंने सोचा था कि आज सुबह की चुदाई से तुम्हारा दिल भर गया होगा… तुम्हें रूचि के घर में रहते हुए यहाँ आने में कोई खतरा नहीं महसूस हुआ…”

“मेरे ख्याल से उसने राकेश को मुझे छोड़ते हुए नहीं देखा… पर अब इस बात की चिंता करने से कुछ नहीं होगा। मैं अगले हफ्ते काफी व्यस्त हूँ। इसलिए आज कुछ समय तुम्हारे साथ बिता लेता हूँ। सारे समय मैं गोल्फ की जगह तुम्हारे बारे में सोचता रहा…”

रूचि ने ये सुना तो उसे अपने पति पर गुस्सा आ गया और अब वो उस वक्त का इंतज़ार करने लगी जब वह उन दोनों को रंगे हाथ पकड़ेगी। उसने अरुन की और मुखातिब होकर कहा- “देखना जब हम तुम्हारे पापा को पकड़ेंगे… वो हर बात जो हम कहेंगे, उसे मानेंगे…”

कुछ देर अन्जय और अंजू की चुदाई शुरू होने के बाद वो बोली- “अब और नहीं ठहरा जा रहा। चलो हम हमला बोलते हैं…”

जब रूचि ने अंजू के शयनकक्ष में झाँका तो कुछ समय के लिए वो सामने का मंजर देखकर ठिठक गयी। उसने अरुन को अपने पास खींचा जिससे कि वो भी देख सके। उसके मन में एक बार ईर्ष्या आ गयी।

“वाह… अपनी चूत को मेरे लण्ड पर और जोर से दबाओ… अंजू…” अन्जय कह रहा था। उसका मोटा लण्ड अंजू की चूत में गड़ा हुआ था। अंजू के सैंडल युक्त पाँव आसमान की ओर थे और अन्जय उसे पुराने तरीके से ही ऊपर चढ़कर चोद रहा था। दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे।

“मुझे जोर से चोदो अन्जय… और जोर से…” अंजू अब सब भूलकर अपनी चूत का भुर्ता बनवाने में मशगूल थी। उसी समय उसकी नज़र दरवाज़े पर पड़ी और उसके मुँह पर एक शैतानी मुश्कान आ गयी।

वहाँ अरुन और रूचि उनका ये चुदाई का खेल देख रहे थे।
उसने उन दोनों का थोड़ा मनोरंजन करने की ठानी- “जोर से चोदो मुझे अन्जय… बिल्कुल रहम मत करो… फाड़ दो मेरी चूत को अपने मोटे लौड़े से…” ये कहकर अंजू ने अन्जय की गाण्ड भींचते हुए उसकी गाण्ड में एक अँगुली घुसा दी।

“हरामजादी…” अन्जय के मुँह से गाली निकली- “अगर ऐसा किया तो मैं झड़ जाऊँगा…”

रूचि के संयम का बांध टूट गया। हालांकि देखने में बहुत मज़ा आने लगा था, पर वो अपने हाँफते और काँपते पति को रंगे हाथों पकड़ने का मौका नहीं छोड़ना चाहती थी।

“क्या हुआ अन्जय… घर पर मेरी चूत चोदकर मन नहीं भरता क्या…” रूचि ने अंदर घुसकर बिस्तर की ओर कदम बढ़ाते हुए सवाल किया। उसकी आवाज़ माहौल के विपरीत काफी शाँत स्वर में थी।

रूचि की आवाज़ सुनकर, अन्जय को काटो तो खून नहीं। उसका जिश्म जैसे जड़ हो गया और धक्के बंद हो गये। उसका मुँह खुला का खुला रह गया जब उसने अपनी पत्नी और बेटे, दोनों को वहाँ नंगा खड़ा देखा। उसके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया। शायद ये कोई सपना ही था।

“तुम्हें शायद मुझे देखकर आश्चर्य हो रहा है… प्रिय पति महाराज…” रूचि मुश्कुराई और बिस्तर के पास जाकर खड़ी हो गयी।

अरुन को अपने पापा से डर लग रहा था और वो अपनी मम्मी के दो-तीन फीट पीछे ही खड़ा रहा।

“पर आश्चर्य तो मुझे होना चाहिये… है न… ये देखकर कि तुम मेरी पीठ पीछे क्या गुल खिला रहे हो…”

अन्जय ने अंजू की चूत से अपना तना हुआ लौड़ा बाहर खींच लिया। उसने बिस्तर पर बैठकर कुछ समय सोचकर अपनी आवाज़ को पाया- “पर तुम यहाँ पर क्या कर रही हो रूचि… और वो भी अरुन के साथ… और फिर तुम दोनों नंगे क्यों हो…” वो अपनी आवाज़ में कठोरता पैदा करने की असफल कोशिश कर रहा था।

“मेरे साथ ज्यादा होशियार बनने की कोशिश मत करो…” रूचि उसे ऐसे नहीं बख्शने वाली थी, न वो अपने ऊपर कोई बात लेने वाली थी। अन्जय उस समय उसी परिस्थिति में था जैसा वो उसे चाहती थी- “वो तुम हो जो गलत चूत में अपने लण्ड के साथ पकड़े गये हो… मैं नहीं…”

“ठीक है कि मैं पकड़ा गया हूँ और मेरे पास कोई सफाई भी नहीं है। पर अरुन तुम्हारे साथ यहाँ क्यों आया है और तुम दोनों नंगे क्यों हो…” अन्जय ने अपने नंगे बेटे की ओर देखते हुए पूछा। अरुन का लण्ड इस समय खड़ा था।

“ये मत समझो कि अरुन ये सब देखने समझने के लिये बड़ा नादान है… अरुन, इधर आओ…”

जब अरुन अपनी जगह से हिला भी नहीं तो रूचि ने दोबारा कहा- “अरुन, इधर आओ… तुम्हारे पापा तुम्हें छुयेंगे भी नहीं, ये मेरा वादा है…”

अरुन धीमे कदमों से अपनी मम्मी के साथ आकर खड़ा हो गया पर उसकी सहमी नज़र अपने पापा के चेहरे पर ही रही। रूचि ने अंजू की ओर आश्वासन के लिये देखा। उसकी नई सहेली ने गर्दन हिलाकर अपना समर्थन दिया। दोस्तों आप यह हिंदी सेक्स कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

“तुम्हें याद है अन्जय… जब तुमने मुझे अपनी मम्मी को चोदने की इच्छा के बारे में मुझे बताया था…” रूचि ने सँयत शब्दों में भूमिका बाँधी।

“रूचि…” अन्जय चिल्लाया- “तुम ऐसे समय वो बात यहाँ कैसे कर सकती हो… मैंने तुम्हें वो बात दुनिया को बताने के लिये थोड़े ही बताई थी…”

रूचि ने अपना हाथ उठाकर उसे शाँत रहने का इशारा किया। उसने अरुन की ओर अपना हाथ बढ़ाया और उसे अपनी ओर खींचा।

“मैं सिर्फ तुम्हें उस समय की याद दिला रही थी जब तुम अरुन की उम्र के थे। इससे तुम्हें वो समझने में आसानी होगी जो मैं तुम्हें बताने वाली हूँ…” रूचि ने एक गहरी साँस भरी और अपने स्वर को संयत किया- “मैं अरुन से उसकी छुट्टियों के कुछ समय पहले से चुदवा रही हूँ…”

कमरे में एक शाँती छा गयी। अगर सुंई भी गिरती तो आवाज़ आती।

फिर अन्जय ने हिकारत भरे स्वर में कहा- “कितनी घृणा की बात है ये… तुम अपने बेटे से कैसे…”

अंजू, रूचि का साथ देने के लिये, अन्जय की बात काटते हुए बोली- “अब ऐसे मर्यादा वाले मत बनो तुम अन्जय। तुम भी कोई बड़े भले मानस नहीं हो। अगर रूचि को तुम घर में उसके मन मुताबिक चोदते रहते तो वो क्यों अरुन की ओर जाती… हो सकता है कि शायद वो फिर भी अरुन से चुदवाती ही, कौन कह सकता है… अगर मेरा अरुन जैसा लड़का होता तो मैं तो उसको जरूर चोदती…”

“पर मुझे यह मंजूर नहीं…” अन्जय बोला।

“बकवास…” अंजू ने जवाब दिया- “तुम्हारे पास कोई विकल्प भी नहीं है अन्जय… रूचि क्षमा नहीं माँग रही है… वो तुम्हें बता रही है कि या तो तुम इसे स्वीकार करो या…” अंजू ने अपने शब्द अधूरे छोड़कर अर्थ साफ कर दिया।

एक दूसरे की चुदाई क्या गलत

“अरे ये सब बेकार की बातें छोड़ो… हम सब चुदासे हैं और एक दूसरे की चुदाई क्या गलत, क्या सही की बातें चोदने में लगे हैं… इधर आओ अन्जय और मुझे चोदो, जो तुम कह रहे थे… अपने लौड़े को देखो, ये अब पहले से भी ज्यादा तना हुआ है। मैंने इतना सख्त पहले इसे नहीं देखा…” ये कहते हुए अंजू ने अपने हाथों से अन्जय का विशाल मोटा लण्ड हाथ में ले लिया और उसे सहलाने लगी।

“इसे यूँ ही चलने दो अन्जय… रूचि और मेरे पास तुम्हारे लिये बहुत कुछ विशेष है…” ये कहकर अंजू ने अन्जय का हलब्बी लौड़ा अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।
रूचि ने भी अपना तीर फेंका। उसने बिस्तर पर झुकते हुए अपनी बांहें उसकी गर्दन में डाल दीं। उसके विशाल मम्मे अब अन्जय के चेहरे के पास थे। बोली- “बोलो मत अन्जय… मेरे मम्मों को चूसो… अंजू को अपना लण्ड चूसने दो। हम दोनों को तुम्हें चोदने चाटने दो… मेरी जान, अब चीज़ें दूसरे नज़रिये से देखो। अब तुम्हें छुपकर अपने पड़ोस में आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। तुम्हारी जब इच्छा हो, हम दोनों तुमसे चुदवाने के लिये तैयार रहेंगी…”

अन्जय अपने दोनों ओर फैले हुए नंगे गर्म जिस्मों में खो गया। रूचि ने अपने मम्मों को उसके मुँह में डाल दिया। अन्जय इतना ताकतवर था कि इन दोनों औरतों को परे धकेल सकता था, पर उसने ऐसा किया नहीं। उसे दोगुने आनंद की प्राप्ति हो रही थी।

“ठीक है… मैं हार मानता हूँ…” अन्जय ने अपना मुँह रूचि के मम्मों से हटाते हुए कहा- “हम बाद में बात करेंगे… पर मुझे अभी भी अरुन और तुम्हारे बीच का…”

“अपना मुँह बंद रखो, अन्जय, अगर खोलना है तो मेरे मम्मों को चूसने के लिये… हाँ अब ठीक है… जोर से चूसो…”

“अब ये सब बहुत हो चुका…” अंजू अन्जय के लण्ड की चुसाई रोकती हुई बोली- “अब मुझे इस मोटे लण्ड से अपनी चूत चुदवानी है। इस पूरे सीन से मेरी चुदास बेइंतहा बढ़ गयी है। अरे अन्जय तुम्हारा लण्ड तो जबर्दस्त फूल गया है। हम्म्म… अब ये मत कहना कि तुम्हें मज़ा नहीं आ रहा…” ये कहकर अंजू ने पूरा लौड़ा एक ही झटके में अपनी चूत में पेल डाला।

 

अब चूंकि अन्जय का लण्ड एक समय में एक ही चूत चोद सकता था, रूचि को अपनी प्यासी चूत के लिये कोई दूसरा इंतज़ाम करना लाज़मी हो गया। वो बिस्तर से खड़ी हो गई और अपने बेटे से बोली- “ज़मीन पर लेटो अरुन… मैं तुम्हें वैसे ही चोदना चाहती हूँ, जैसे अंजू तुम्हारे पापा को चोद रही है…”

अरुन की हिम्मत अब धीरे-धीरे वापिस आ रही थी। अब जब उसने अपने पापा को चुसाई और चुदाई में मशगूल देखा तो वो जाकर ज़मीन पर चौड़ा होकर अपनी पीठ के बल लेट गया और अपनी चुदासी मम्मी का अपने तन्नाये लौड़े की सवारी के लिये इंतज़ार करने लगा।

अन्जय स्तब्ध होकर अपनी पत्नी को अपने बेटे के तनतनाये हुए लण्ड पर सवार होते हुए देख रहा था। उसने रूचि को अरुन से चुदवाने से रोकने के लिये एक शब्द भी नहीं कहा। इस समय वो इतना रोमाँचित था कि उसके लिये ऐसा करना संभव ही नहीं था। नाराज़गी की जगह उसके मन में विस्मय अधिक था।

“ये मेरे लिये ही खड़ा है न, बेटे…” रूचि ने अपनी गर्म प्यासी चूत को अरुन के लण्ड पर सरकाते हुए सरगोशी की। उसने अरुन के लण्ड को पकड़कर अपनी चूत को उसपर आहिस्ता से उतार दिया- “मुझे तुम्हारा लण्ड अपनी चूत में फुदकता हुआ लग रहा है। मेरे लाडले बेटे…”

अरुन ने अपने हाथ बढ़ाकर अपनी मम्मी के फुदकते हुए मम्मों को पकड़ लिया। रूचि की गर्म चूत अब उसके गर्माये हुए लण्ड पर नाच रही थी। उसने अपने पापा की ओर देखा तो वो इस नज़ारे से बहुत मज़ा लेते हुए लगे।

“है न देखने लायक सीन, अन्जय…” अंजू ने अपने विशाल मम्मों को पकड़कर अन्जय के लण्ड पर अपनी चूत सरकाते हुए पूछा- “तुमने सोचा भी न था कि ये देखकर तुम्हें इतना मज़ा आयेगा…”

रूचि ने अपना सिर घुमाकर अपने पति की आँखों में देखा- “देखो, कितना बढ़िया है ये सब… अब तुम्हें ये बुरा नहीं लग रहा होगा… है न मेरी जान… ज़रा सोचो तो कि अब हम लोग क्या-क्या और कर सकते हैं… अरुन को चोदते हुए देखो अन्जय… देखो मैं अपने बेटे को कितना सुख दे रही हूँ…”
“मेरे मम्मों को और जोर से दबाओ अरुन। और मुझे जोर से नीचे से झटके मारकर चोदो…” उसकी चूत को अब तेज़ और दम्दार चुदाई की इच्छा थी।

अन्जय अंजू की गर्म चूत की भट्ठी में अपने लण्ड से पूरे जोर से चुदाई कर रहा था। उसने अंजू की दोनों गोलाइयों को अपने हाथों से पकड़ रखा था और दबा रहा था। पर उसकी नज़रें पूरे समय अपनी पत्नी और बेटे की चुदाई पर टिकी हुई थीं। अब उसे कोई जलन नहीं थी। उसने उस उम्र को याद किया जब वो अरुन की उम्र का था। उसके मन में भी अपनी माँ को चोदने की बड़ी इच्छा थी। आज वो अपनी उस हसरत को अपने बेटे अरुन के रूप में पूरी होते देख रहा था।

उसने अंजू की चुदाई की रफ्तार बड़ाते हुए आवाज़ दी- “चोदो उसे रूचि…” ये कहकर उसने अपना रस अंजू की प्यासी चूत में भर दिया।

रूचि ने अपने झड़ते हुए पति को शाबाशी दी- “भर दो उसकी चूत को अन्जय। आज हम रात भर चुदाई करेंगे…”

रूचि और अरुन को चोदते देखना ही अंजू के लिये काफी था पर अपनी चूत में अन्जय के रस के फुहारे से तो वो बेकाबू हो गई। बोली- “रूचि मुझे देखो… मैं तुम्हारे पति को चोद रही हूँ। मैं उसके साथ झड़ रही हूँ। आआआ… आआआआ… ईईईई… ईईईईईईई…”

अन्जय और अंजू थोड़ी देर के लिये शाँत हो गये और दोनों माँ बेटे का खेल देखने लगे।

“जल्दी करो तुम दोनों, अरुन भर दे अपनी माँ की चूत…” अंजू ने उन्हें बढ़ावा दिया।

अन्जय को अपनी आवाज़ सुनकर आश्चर्य हुआ- “चोद उसकी चूत को जोर से, अरुन…”

रूचि ने भी अपने पति की बात सुनी। उसे खुशी हुई कि अन्जय ने सब कुछ स्वीकार कर लिया है। उसने अन्जय की ओर मुश्कुराकर देखा और अपना ध्यान अपनी चुदाई की ओर वापिस लौटा लिया। वो भी अब झड़ने के करीब थी।

“मैं झड़ रही हूँ अरुन… अन्जय…” अरुन के लंबे मोटे लौड़े पर उछलते हुए रूचि चींखी। अचानक वो ठहर गई। उसकी चूत में अजीब सा संवेदन हो रहा था।

अरुन भी अब झड़ रहा था। वो भी चींखने लगा- “मम्मी… मैं भी… आआआह…” पर उसने अपने धक्कों की रफ्तार कम न की। रूचि को यही पसंद था। उसके झड़ने के बाद भी अपनी चूत में मोटे लण्ड से घिसाई- “चोद मेरे लाडले… वा…आआआआ…ह…”

 

अंजू और अन्जय दोनों देख रहे थे कि कैसे रूचि, सिर्फ ऊँची एंड़ी की सैंडल पहने बिल्कुल नंगी, अपने बेटे के लण्ड पर उछलती हुई झड़ रही थी। अंजू के मन में आया कि काश उसे भी वही सुख मिले जो अभी रूचि को मिल रहा था। अन्जय को भी समझ में आया कि क्यों उसकी बीवी अपने बेटे से चुदवाने लगी थी। रूचि एक बार और झड़ी और निढाल हो गई। दोस्तों आप यह हिंदी सेक्स कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

“काश मैं तुम्हें समझा पाती अंजू… जो मैं इस वक्त महसूस कर रही हूँ… इसमें इतना सुख है की मैं नहीं समझा सकती…”

“इस सुख को भोगो… बोलो मत…” अंजू ने ठंडी साँस लेते हुए कहा।

थोड़ी देर बाद ही अरुन और अन्जय के लण्ड दोबारा तनकर खड़े हो गये। अब उन्हें फिर चुदाई की इच्छा हो रही थी। चूंकि वो अभी अंजू को चोदकर हटा था तो अन्जय ने रूचि की ओर अपना रुख किया। रूचि इस समय झुक कर अंजू की चूत चाटने में व्यस्त थी। अन्जय ने पीछे से जाकर एक ही झटके में अपना पूरा लौड़ा रूचि की चूत में पेल दिया।

“ऊँओंफ्ह…” रूचि के मुँह से अजीब सी चीत्कार निकली। कई साल बाद उसके पति ने उसे इतनी बेरहमी से चोदने की कोशिश की थी। उसने अपनी कमर हिलाते हुए अन्जय को उत्साहित किया- “मुझे यूँ ही बेरहमी से चोदो अन्जय… मुझे खुशी है कि तुम मुझे आज ऐसे चोद रहे हो… फाड़ दो मेरी चूत…”

अंजू यूँ ही छोड़ने वालों में से तो थी नहीं। वो अपनी ऊँची एंड़ी की सैंडल में गाण्ड मटकाती अरुन के पास आयी और बोली- “देख अपने मम्मी-पापा की चुदाई… और मेरी चूत का भोंसड़ा बना…”

अरुन आगे बढ़ा और अंजू के ऊपर चढ़ाई कर दी। अपने लण्ड को उसने अंजू की गीली चूत में पेल दिया। उसने अपने पापा को देखा जो रूचि की ताबड़तोड़ चुदाई कर रहे थे। उसकी मम्मी उन्हें और बढ़ावा दे रही थी। अरुन ने तेजी से अंजू कि चुदाई की और कुछ ही समय में दोनों का पानी छूटने लगा। उधर अन्जय और रूचि का भी खेल खत्म हो गया था और दोनों लण्ड अपनी चूतों को पानी पिलाकर शाँत हो गये थे। चारों थक भी गये थे।

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अंजू ने सबको खाना खिलाया और बीयर पिलायी और एक बार फिर सबने मिलकर चुदाई की। दोबारा फिर मिलने के वादे के साथ सिंह परिवार अपने घर चला गया। रूचि सोने के पहले यही सोच रही थी कि अब उसके जीवन में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। ये सोचकर वो अन्जय से चिपककर सो गयी।

समाप्त.

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