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नीली नीली आंखों से मुझ पर जादू कर दिया

मेरा नाम आकाश है मैं पठानकोट में स्वीट शॉप चलाता हूं, मेरी उम्र 35 वर्ष है, मेरी शादी को 5 वर्ष हो चुके हैं। यह स्वीट शॉप मेरे पिताजी ने खोली थी और उनके देहांत के बाद मैं ही इस स्वीट शॉप का काम संभाल रहा हूं, मुझे इस शॉप का काम संभालते हुए 7 वर्ष हो चुके हैं। पहले मैं एक कंपनी में जॉब करता था लेकिन उसके बाद मैंने वहां से रिजाइन दे दिया और अपने पिताजी का कारोबार करने की सोची, मेरी दुकान में 20 लोग काम करते हैं और वह सब लोग काफी पुराने हैं। एक बार मेरी पत्नी अपने किसी रिश्तेदार के साथ दुकान में आई और कहने लगी कि मैं कुछ दिनों के लिए अपने मायके जा रही हूं, मैंने उसे कहा कि तुम अचानक से कैसे अपने मायके जा रही हो, तुम ने मुझे इसके बारे में कोई भी सूचना नहीं दिया ना ही मुझे इसके बारे में कोई जानकारी है, वह कहने लगी मेरा मेरे घर वालों को मिलने का बड़ा मन हो रहा है और मैं सोच रही हूं कि मैं उनके पास कुछ दिनों के लिए चली जाऊं।

मैं भी अपनी पत्नी को किसी चीज के लिए मना नहीं करता और मैंने उसे कहा ठीक है तुम अपने मायके चली जाओ, उसका मायका भी पठानकोट में ही है। मेरे ससुर जी और मेरे पिताजी के बीच में बहुत गहरी दोस्ती थी इसीलिए उन्होंने अपनी दोस्ती को रिश्ते में बदल दिया। मैं जब अपनी पत्नी से पहली बार मिला था तो मैंने उसे पहली नजर में ही पसंद कर लिया था और मेरे सब रिश्तेदारों ने कहा कि लड़की अच्छी है तुम शादी में देर मत करो इसलिए हम लोगों ने बड़ी जल्दी में शादी कर दी। जब कभी मैं दुकान का काम नहीं संभाल पाता तो मेरी पत्नी ही दुकान में ध्यान देती है। मेरी पत्नी अपने मायके चली गई थी तो मैं भी घर पर अकेला ही था, मेरी मां का भी देहांत काफी समय पहले हो चुका है,  मैं घर में एकलौता हूं इसी वजह से मैं घर में उस दिन अकेला ही था। उस दिन मैं घर में अकेला था तो मैंने सोचा क्यों न आज अपने पुराने दोस्तों को फोन कर लिया जाए। मैंने उस दिन अपने सारे पुराने दोस्तों को फोन किया और मेरे सब दोस्त मुझसे कहने लगे तुम तो अब बहुत बड़े आदमी हो चुके हो, तुम्हारे पास तो हमारे लिए बिल्कुल भी वक्त नहीं है, मुझे भी कई बार लगता है कि मैं अपने दोस्तों से बात नहीं करता लेकिन मैं अपने काम के चलते ही उन लोगों से बात नहीं कर पता।

मैंने अपने दोस्तों से कहा कि तुम लोग कभी मुझे मिल तो लो, वह कहने लगे हम लोग तो तुमसे हमेशा ही मिलने के लिए सोचते हैं लेकिन तुम्हारे पास ही वक्त नहीं होता और तुम्हें जब भी फोन करो तो तुम ही कहते हो कि तुम अभी बिजी हो। उस दिन मैंने लगभग अपने सारे दोस्तों को फोन कर लिया था और अगले दिन जब मैं अपनी दुकान में था तो मेरी दुकान में एक व्यक्ति आये, वह अपनी पत्नी के साथ मेरी दुकान में आए हुए थे। मेरी दुकान में बैठने के लिए भी जगह है इसलिए वह लोग वहीं बैठ गए और जब मेरे एक कर्मचारी ने उनसे आर्डर लिया,  जब उन्होंने मेरे दुकान की मिठाई खाई तो वह बहुत खुश हो गए और कहने लगे आप तो बड़ी लाजवाब मिठाई बनाते हैं। वह व्यक्ति मुझसे बात करने लगे, उनका नाम रोहन है। वह मुझसे पूछने लगे आपकी दुकान कितने सालों से यहां पर है, मैंने उन्हें बताया कि मेरी दुकान काफी वर्षों से यहीं पर है क्योंकि पहले मेरे पिताजी काम संभाला करते थे परंतु अब उनका देहांत हो चुका है इसलिए मैं ही उनका काम संभाल रहा हूं। मैंने उनसे पूछा कि क्या आप लोग पठानकोट के ही रहने वाले हैं, वह कहने लगे नहीं हम लोग पठानकोट के रहने वाले नहीं हैं, हम लोग किसी रिश्तेदार के घर आए हुए हैं। उनके साथ उनकी पत्नी भी थी। रोहन ने मुझे अपनी पत्नी से भी मिलवाया, उनका नाम रचना है। जब मैं रचना की तरफ देख रहा था तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं उसे सिर्फ देखते ही रहूं क्योंकि उसकी आंखें एकदम नीली कांच की तरह थी और उससे एक भी पल को अपनी नजर हटाने को जी नहीं कर रहा था। मैंने जब रचना से कहा आप बहुत ही सुंदर हैं और आपकी आंखें बहुत प्यारी हैं, मुझे ऐसा लग रहा है जैसे आपकी आंखें कुछ कहना चाहती हो।

रोहन भी मुझसे कहने लगा कि रचना की आंखों को देख कर ही तो मैं रचना की तरफ आकर्षित हो गया था और मैंने अपने दिल की बात रचना से कह दी थी। हम लोग जिस प्रकार से बात कर रहे थे मुझे ऐसा बिल्कुल भी नहीं लग रहा था कि जैसे मैं पहली बार रचना और रोहन से बात कर रहा हूं। वह दोनों भी मेरी बातों से बहुत प्रभावित हुए और कहने लगे की हमें आपसे मिलकर वाकई में बहुत खुशी हुई, मैंने उनसे कहा कि आप लोगों से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा,  मुझे उनके बारे में और जानने की इच्छा हो रही थी। रोहन मुझसे कहने लगे ठीक है तो फिर कल हम लोग मिलते हैं, मैंने उनसे कहा कि आप हमारे घर पर ही आ जाइए वैसे भी हमारे घर पर आजकल कोई भी नहीं है। रोहन जब मेरी बात के लिए तैयार हो गए तो मैंने कहा आप कल हमारे घर पर आ जाइए,  मैंने उन्हें अपने घर का एड्रेस दे दिया और अगले दिन रोहन और रचना मेरे घर पर आ गए। मैं उन लोगों के लिए बाहर से ही खाने का ऑर्डर दे दिया था। हम तीनों बैठकर ही बात कर रहे थे, कुछ देर बाद रोहन मुझसे कहने लगे आपकी शादी को कितना वक्त हो चुका है, मैंने उन्हें बताया कि मेरी शादी को करीबन 5 वर्ष बीत चुके हैं लेकिन इन 5 वर्षों में मैं अपनी पत्नी को जितना भी समझ पाया हूं, उसने मेरा हमेशा ही साथ दिया है। रोहन और मैं ड्रिंक भी कर रहे थे, जब मैंने रचना से पूछा कि क्या आप भी ड्रिंक करती है तो वह कहने लगी मैं कभी-कभार ड्रिंक कर लेती हूं। रचना ने भी उस दिन थोड़ी ड्रिंक कर ली, उसके बाद हम तीनों ने डिनर किया।

हम लोग मेरे घर के लॉन में ही बैठे हुए थे। जब रोहन और रचना मेरे साथ लॉन में बैठे हुए थे तो रोहन को बहुत ज्यादा नशा हो गया। मैंने रचना से कहा तुम रोहन को अंदर सुला दो, रचना रोहन को उठाते हुए लेकर जा रही थी लेकिन रोहन बिल्कुल अच्छे से चल भी नहीं पा रहा था इसलिए मैंने और रचना ने उसको उठाया और मेरे रूम में रोहन को सुला दिया। रचना और मैं साथ में ही बैठे हुए थे जब रचना मेरे साथ में बैठी हुई थी तो उसकी नीली आंखों ने जैसे मुझ पर कोई जादू कर दिया हो। मैंने रचना की जांघों पर अपने हाथ को रखा तो वह भी मचलने लगी और धीरे धीरे में उसकी जांघों को अपने हाथ से सहलाने लगा। मैंने जब उसके नरम और मुलायम होठों का रसपान किया तो वह पूरी तरीके से मेरे कंट्रोल में थी। मैंने जब उसके कपड़े खोले तो उसका फिगर देखकर में अपने आप को बिल्कुल भी रोक नहीं पाया और मैंने भी अपने लंड को बाहर निकाल लिया। रचना मेरे लंड को बड़े अच्छे से अपने हाथों से हिला रही थी और उसने अपने मुंह में मेरे लंड को लेकर काफी समय तक मेरे लंड को सकिंग किया। मैंने भी रचना के दोनों पैरों को चौडा करते हुए उसकी योनि के अंदर जैसे ही अपने कठोर लंड को प्रवेश करवाया तो वह मुझे कहने लगी तुम्हारा लंड जब मेरी योनि में जा रहा है तो मुझे एक अलग ही प्रकार की अनुभूति हो रही है, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैं भी रचना को बड़ी तेज गति से चोद रहा था और वह पूरे मूड में आ रही थी। मैंने रचना से कहा तुम उल्टा लेट जाओ मैंने अपने लंड को रचना की योनि से बाहर निकाला और जैसे ही वह उल्टी लेटी तो उसकी दिल जैसे आकार की चूतडो को देखकर मैंने तुरंत ही अपने लंड को रचना की योनि में डाल दिया। जब मेरा लंड रचना की योनि में घुसा तो वह बड़ी तेज आवाज में चिल्लाने लगी और मैंने उसे बहुत तेज गति से धक्के देने शुरू कर दिए। वह अपने आप को रोक नहीं पा रही थी उसने अपनी चूतोडो मुझसे मिलाना शुरू कर दिया। उसकी बड़ी बड़ी चूतडे जब मुझसे टकराती तो मेरा मन भी पूरी तरीके से उत्तेजित हो जाता मैं भी उसे बड़ी तेज गति से झटके देने लगा। उसकी चूतडो और मेरे लंड का मिलन इतनी तेज तेज हो रहा था कि उसकी चूतडो से आवाज भी बाहर निकल रही थी जब मेरा वीर्य उसकी योनि के अंदर घुसा तो मैंने उसे कसकर अपने नीचे दबा लिया। पूरी रात भर मैने रचना को 5 बार चोदा।

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