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प्रेमिका और उसकी माँ,दोनों मेरे बिस्तर पर

मेरा नाम राकेश है और मै एक निजी कम्पनी मे काम करता हु | मेरी एक गर्ल फ्रेंड है | उसका नाम उर्मी और हम एक दुसरे से बहुत प्यार करते है और साथ जीने मरने का वायदा कर चुके है; मतलब शादी करने वाले है |

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उससे मेरी मुलाकात इस कंपनी की एक मीटिंग मे हुई थी और तब से हमरे मुलाकाते बड्ती गयी और हम प्यार करने लगे | पहले हम बाहर मिलते थे, फिर, वो मेरे घर पर आने लगी | मे शहर मे अकेला रहता था; तो, किसी को कोई आपत्ति का सवाल ही नहीं था |एक दिन उर्मी ने अपनी मम्मी से हमारी बात की और उन्होंने मुझे उनके घर पे बुलाया | मै चाय पर उनके घर गया और उनकी और उनके पति की पसंद की कुछ चीज़े लेकर गया | मुलाक़ात अच्छी रही और उर्मी के मम्मी को कोई एतराज़ नहीं था | बस अब उन्हें, उर्मी के पापा को पटाना था | वो, हम दोनों की समस्या नहीं थी | उस दिन उर्मी मेरे साथ मेरे घर तक आयी और हमने पहले बार भावनायों मे बहकर सेक्स किया | जब मै उर्मी के घर गया था; मुझे उसकी मम्मी की आँखों मे एक अजीब सा आकर्षण दिखाई दिया था | मैने, एक लेख मे पड़ा था; कि, प्रौड़ उम्र मे पति-पत्नी के बीच सेक्स कम हो जाता है और दोनों अपनी प्यास बुझाने के लिए बाहर का रुख करते है |इसी को परखने के लिए मैने उर्मी और उसकी मम्मी को लंच पर लेजाने का प्रोग्राम बनाया | उर्मी बहुत खुश थी; कि, दामाद बनने से पहले मे उसकी माँ का इतना ख्याल रख रहा हु; तो, वो १००% पापा को पटा लेंगी | मै सबसे पहले पंहुचा, उर्मी और उसकी माँ थोड़ी देर मे आये | उस दिन, मैने उर्मी की कोई तारीफ़ नहीं की और ना उससे ज्यादा बात की | सिर्फ उसकी मम्मी की तारीफ़ करता रहा और उन्ही से बात करता रहा | उस दिन मुझे पक्का यकीन हो गया; कि, अगर थोडा सी और मेहनत की जाये; तो, उसकी मम्मी के साथ सेक्स कर सकता हु | एक दिन मैने उर्मी और उसकी मम्मी के साथ शापिंग का प्रोग्राम बनाया | मुझे मालूम था, कि उर्मी नहीं आ पायेगी | ऐसा ही हुआ | उर्मी ने मुझे फ़ोन पर मना कर दिया और उसकी मम्मी भी मना कर रही थी; लेकिन, उर्मी एंड मैने जोर देकर उनको चलने के मना लिया |वो मुझे तह वक़्त पर बताई गई जगह पर मिली | गज़ब लग रही थी | मैने भी उनकी तारीफ़ की और बोला अगर उर्मी से मेरी शादी फिक्स्ड नहीं होती, तो, मै आपसे शादी कर लेता | वो सिर्फ मुस्कुराके रह गयी | हमने शापिंग की, खाना खाया और एक फिल्म देखने चले गये | फिल्म के बीच-बीच मे उनका हाथ पकड़ लेता था | १-२ उन्होंने एतराज़ किया; पर, बाद मे वो कुछ नहीं बोली और मेरा इरादा जानकार मेरी पेंट पर हाथ रख दिया | मेरे लंड ने खड़ा होना शुरू कर दिया और उन्होंने मेरा लंड जिप खोलकर बाहर निकल लिया | मैने, लंड को फटाफट अन्दर किया और हम फिल्म अधूरी छोड़कर मेरे घर आ गये |मैने जैसे ही दरवाज़ा बंद किया और उनकी तरफ घूम कर उनके होटो पे अपने होट रख दिये और चूसने लगा | वो, बोली क्या कर रहे हो? तुम मेरे होने वाले दामाद हो | मैने कहा, तभी तो अपनी सासू माँ को खुश कर रहा हु | मैने जल्दी से उनकी साड़ी खोली; क्योकि, उर्मी के आने का टाइम हो रहा था | मैने उनको खीचा और अपने बेडरूम मे ले गया और हम दोनों ने अपने-अपने कपडे उतर दिये | आज मुझे समझ आया; कि, उर्मी को खूबसूरती कहाँ से मिली | उसकी माँ गज़ब की खुबसूरत थी और बहुत सेक्सी थी | मेरा लंड देखकर उनकी आँखों मे चमक आ गयी और मेरा लंड चूसने लगी |अभी, हमारी कामक्रीडा शुरू ही हुई थी | इतने मे उर्मी ने डोरबेल बजा दी | उर्मी के माँ भागकर बाथरूम मे चली गयी और मैने जल्दी से कपडे पहने और दरवाजा खोलने चले गया | उर्मी आई  और उसने सारी शापिंग देखी और चाय बनाने चली गयी | तबतक सासू माँ भी आ गयी थी और बैठ गयी | थोड़ी देर बाद वो दोनों घर जाने लगे और उर्मी की माँ ने मुझे अगले दिन घर आने को कहा, शादी की कुछ बात करने के लिए | जब उर्मी ने रुकने को कहा, तो उसकी माँ ने उसे कॉलेज भेज दिया |अगले दिन, मै उर्मी के घर पंहुचा | उस समय ना तो उर्मी के पापा थे और ना ही उर्मी | जैसे ही उसकी माँ ने दरवाजा खोला, मै हैरान रह गया | वो एक पारदर्शी काली साड़ी मे थी | किसी स्वर्ग की अप्सरा लग रही थी | मे अंदर गया और सोफे पे जम गया | वो मेरे लिए चाय पीने के लिए लायी | मैने चाय एक तरफ रखी और कहा, मुझे कुछ और पीना है और एक शरारती मुस्कान दे दी | वो, सोफे मे मेरे पास आकर धस गयी और मैने उनको अपनी तरफ खीच कर चूमना शुरू कर दिया | हम दोनों पागलो की तरह एक दुसरे को चूमे और चुसे जा रहे थे | मेरे हाथ उनके पुरे शरीर पर रेंग रहे थे | मैने उनकी साड़ी उतारनी शुरू कर दी और उनको नंगा कर दिया | मैने जल्दी से अपने कपडे उतारे और उनके नंगे बदन को अपने नंगे शरीर से चिपका लिया |हम दोनों खड़े हुए, एक दुसरे के होटो को चूस रहे थे | उनके चुचे मेरी छाती मे घुस रहे थे और मेरा लंड उनकी चूत पर रखा हुआ फुंकार रहा था | मै तो उनके शरीर का दीवाना हो चुका था | इस उम्र मे भी, वो जवान लड़कियों को मात करती थी | उनके चुचे बड़े कसे हुए थे; जैसे कितने सालो से उनको चूसा और मसला ही ना गया हो | उनके गुलाबी निप्पल उनके गोरे और मस्त चूचो की शोभा बड़ा रहे थे | उनका मस्त मस्त शरीर और उसकी गंध माहौल मे मस्ती भर रही थी और कामुक बना रही थी | मैने, उनको सोफे पे धकेला और उनके मुह पे लपका और अपना लंड के मुह मे घुसा दिया | वो भी उसको किसी बच्चे की तरह चूस रही थी और मै मज़े मे सि-सि कर रहा था | इतना मज़ा तो मुझे कभी उर्मी ने भी नहीं दिया था |जब उन्होंने मेरे लंड को पूरी तरह से गीला कर दिया; तो, वो बोली तू यहाँ मेरी प्यास बुझाने आया है; कि अपनी | मैने उनके पेरो को खोला और अपना मुह उनकी चूत मे घुसा दिया और मस्ती मे चाटने लगा | उनकी चूत एक दम चिकनी और गुलाबी थी और किसी भी मर्द को मस्त कर सकती थी | मेरे चूसने से उनके शरीर मे सिहरन हो रही थी और वो अपनी गांड मस्ती मे हिला रही थी | अब, हम दोनों से ही नहीं रुका जा रहा था | मैने उनके पैर खोले और अपना लंड उनकी चूत पर रख कर अन्दर घुसा दिया | मेरा लंड फूलकर बड़ा और मोटा हो चुका था और उनकी चूत मे अन्दर जाकर चिपक गया | मेरे एक दो झटको मे ही वो झड गयी; लेकिन, मैने उनको चोदना जारी रखा और कुछ देर मे अपना सारा पानी उनकी चूत मे छोड़ दिया |

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उन्होंने बोला, आज कई सालो बाद, मेरी चूत ने लंड का और उसके पानी का स्वाद चखा का है | तुम बहुत मस्त हो और मेरी बेटी और मुझे दोनों को खुश रखोगे |

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