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भैया बन गए सैंया

मेरे 12वीं के एग्जाम नजदीक आने वाले थे और मैं बहुत घबराई हुई थी क्योंकि मैंने इस वर्ष अच्छे से पढ़ाई नहीं की थी, मुझे यह डर था कि यदि मेरे कम नंबर आए तो मुझे पापा और मम्मी दोनों की ही डांट खानी पड़ेगी इसलिए मैं बहुत ज्यादा घबराई हुई थी। मेरी बचपन की सहेली नीलम को मैंने जब फोन किया तो मैंने नीलम से कहा एग्जाम नजदीक आने वाले हैं मुझे बहुत डर लग रहा है, नीलम कहने लगी कि तुम टेंशन मत लो सब हो जाएगा, मैंने उसे कहा लेकिन इस बार तुम्हें पता ही है कि मैं अच्छे से पढ़ ही नहीं पाई मेरी तबीयत भी खराब है और उसके बाद सब कुछ इतनी जल्दी से निकल गया कि कुछ मालूम ही नहीं पड़ा नीलम मुझे कहने लगी तुम पढ़ने में बचपन से ही अच्छी हो तुम बिल्कुल भी घबराओ मत तुम इस बार भी अच्छे नंबरों से पास हो जाओगी।

मुझे बहुत ज्यादा टेंशन थी इसलिए नीलम ने उस वक्त मेरी मदद की नीलम के भैया जिनका नाम राजेश है वह कॉलेज में प्रोफेसर हैं उन्होंने मुझे कहा कि यदि तुम्हें कोई भी मदद चाहिए तो राजेश भैया से मदद ले सकती हो और राजेश भैया भी तुम्हारी मदद जरूर कर देंगे मैंने भी सोचा कि चलो राजेश भैया से ही मदद ले ली जाए, मैं नीलम के घर चली गई और मैंने जब राजेश भैया को यह बात बताई तो वह कहने लगे तुम फिकर मत करो सब कुछ ठीक हो जाएगा और तुम्हारी तैयारी मैं बहुत ही अच्छे से करवा दूंगा। उन्होंने जब मुझे हिम्मत दिलाई तो मैंने भी तैयारी शुरू कर दी मुझे कोई भी परेशानी होती तो मैं राजेश भैया से पूछ लिया करती और उन्होंने मेरा बहुत सपोर्ट किया जब परीक्षा आने वाली थी तो उन्होंने मुझे कहा था कि तुम बिल्कुल भी घबराना मत तुम अच्छे नंबरों से पास हो जाओगी। नीलम भी पढ़ने में पहले से ही अच्छी है और मुझे पता था कि वह तो पास हो ही जाएगी और उसके अच्छे नंबर भी आएंगे क्योंकि उसके और मेरे बीच हमेशा कंपटीशन रहता था किसी वर्ष मैं ज्यादा नंबर ले आती थी और किसी और वह ज्यादा नंबर ले आती थी लेकिन इस बार मेरी तबीयत खराब हो चुकी थी इस वजह से मैं काफी समय तक पढ़ाई नहीं कर पाई जब मैं अपने पहले एग्जाम में बैठी हुई थी तो मुझे बहुत डर लग रहा था लेकिन जब मेरा वह एग्जाम अच्छा हो गया तो उसके बाद मेरे सारे एग्जाम अच्छे हुए मुझे भरोसा था कि मैं पास हो जाऊंगी मेरे अच्छे नंबर भी आ जाएंगे।

नीलम ने मुझसे पूछा कि तुम्हारा एग्जाम कैसे हुए तो मैंने उसे बताया कि मेरे एग्जाम तो बहुत अच्छे हुए है और इस वर्ष मैं पास भी हो जाऊंगी और लगता है अच्छे नंबर भी आ जाएंगे यह सब राजेश भैया की वजह से ही संभव हो पाया है नहीं तो इस वर्ष मैं पढ़ाई भी नहीं कर पाई थी लेकिन राजेश भैया ने मेरी बहुत मदद की नीलम कहने लगी इसमें मदद वाली क्या बात है यह सब तुम्हारी ही मेहनत है। जिस दिन हमारा आखरी एग्जाम था उस दिन मैं जल्दी घर चली गई थी तो राजेश भैया का फोन आया और वह मुझसे पूछने लगे तुम्हारे सारे एग्जाम तो अच्छे हुए? मैंने उन्हें कहा हां मेरे सारे एग्जाम अच्छे हुए तो वह कहने लगे अब तुम चिंता मत करो तुम अच्छे नंबरों से पास हो जाओगी। जिस दिन मेरा रिजल्ट था उस दिन मुझे टेंशन हो रही थी परंतु जब मैंने देखा तो मेरे अच्छे नंबर आए थे मैं बहुत ज्यादा खुश हो गई और मैंने तुरंत ही नीलम को फोन किया नीलम से मैंने उसके नंबर पूछे नीलम कहने लगी मेरे भी अच्छे नंबर आए हैं और हम दोनों ही पास हो चुके थे, राजेश भैया का भी मुझे फोन आया और उन्होंने मुझे बधाई दी वह कहने लगे नीलम ने मुझे बताया कि तुम पास हो चुकी हो, मैंने उन्हें कहा हां भैया आप की वजह से ही मैं पास हुई हूं और मेरे अच्छे नंबर आए हैं वह कहने लगे इसमें भला मैंने क्या किया यह तो सब तुम्हारी वजह से संभव हो पाया है। घर में भी सब लोग बहुत खुश थे क्योंकि घर में मैं ही बड़ी हूं इसलिए मेरे पापा ने उस दिन हमारे आस पड़ोस में मिठाइयां बांटी मेरे नंबर भी काफी अच्छे आए थे जिससे कि मेरे मम्मी पापा भी बहुत ज्यादा खुश थे।

मैं आगे पढ़ना चाहती थी इसके लिए मैंने कॉलेजों में फॉर्म भर दिए थे लेकिन मुझे नहीं पता था कि कौन से कॉलेज में मेरा सिलेक्शन होगा मेरे नंबर तो अच्छे थे परंतु मुझे चिंता थी कि जिस कॉलेज में मैं चाहती हूं क्या उस कॉलेज में मेरा दाखिला हो पाएगा इसी बीच नीलम के पापा का भी ट्रांसफर हो गया और वह पुणे चले गए नीलम ने भी मेरे साथ कुछ कॉलेजों में फॉर्म भरे थे लेकिन जब उसने मुझे बताया कि वह शायद अब यहां नहीं पढ़ पाएगी क्योंकि उसको पापा मम्मी के साथ पुणे ही रहना पड़ेगा। मैंने उसे कहा लेकिन तुम यहीं पढ़ लो, वह कहने लगी नहीं पापा ने मुझे कहा है कि तुम पुणे में ही पढ़ाई करना और वही कोई कॉलेज देख लो इसीलिए मैंने भी वहां के कॉलेज में फॉर्म भर दिए हैं देखते हैं कौन से कॉलेज में मेरा भी सिलेक्शन होता है। अब मैं अकेली पड़ चुकी थी क्योंकि नीलम भी पुणे जाने वाली थी, मेरा मुंबई के कॉलेज में सिलेक्शन हो गया और मैं जिस कॉलेज में चाहती थी उसी कॉलेज में मेरा दाखिला हुआ मैंने वहां एडमिशन ले लिया था और नीलम ने भी पुणे में एडमिशन ले लिया था हम दोनों की फोन पर बातें हो जाया करती थी लेकिन नीलम मुंबई अब कम ही आती थी वह एक आध महीने में कभी-कबार मुंबई आ जाया करती थी। मेरा पहला वर्ष भी अच्छे से निकल गया कभी कबार मुझे राजेश भैया भी फोन कर दिया करते थे और हमेशा कहते कि जब भी तुम्हें जरूरत हो तो तुम मुझे फोन कर दिया करो लेकिन मेरी भी उनसे मुलाकात कम ही हो पाती थी राजेश भैया दिल के बहुत ही अच्छे हैं और मैं नीलम को बहुत मिस किया करती थी जब भी वह मुंबई आती तो हम दोनों उस दिन खूब इंजॉय किया करते।

मेरा पहला वर्ष भी अच्छे से क्लियर हो चुका था अब मैं अपने कॉलेज के दूसरे वर्ष में आ चुकी थी लेकिन अब मुझे चिंता हो रही थी कि मैं आगे की पढ़ाई कैसे करूंगी क्योंकि हमारा कॉलेज का सिलेबस भी बहुत ज्यादा टफ था और मुझे अपनी तैयारी अच्छे से करनी थी इसके लिए एक दिन मैंने राजेश भैया को फोन किया तो वह कहने लगे हां शगुन मैं तो कहीं काम से बाहर गया हुआ हूं कुछ दिनों बाद मैं घर लौट आऊंगा तो तुम मुझे मिलना, मैंने राजेश भैया को कहा ठीक है भैया जब आप घर आए तो मुझे बता दीजिएगा। उस दिन मेरी नीलम से भी बहुत देर तक फोन पर बात होती रही मैंने नीलम से कहा यार इस वर्ष तो बहुत ज्यादा टफ सिलेबस है मुझे तो लगा था कि जैसे कॉलेज के पहले साल में सब कुछ अच्छे से हो गया था इस वर्ष भी हो जाएगा लेकिन इस वर्ष तो बहुत ही ज्यादा टफ सिलेबस है इसलिए मैंने राजेश भैया को फोन किया था लेकिन भैया शायद कहीं गए हुए थे, नीलम कहने लगी हां भैया अपने किसी प्रोजेक्ट के सिलसिले में दूसरे कॉलेज गए हुए हैं और शायद कुछ दिनों बाद लौट जाएंगे मैंने नीलम से कहा हां मैंने भैया से कह दिया था भैया ने कहा था कि मैं जैसे ही वापस लौटूंगा तो मैं तुम्हें फोन कर दूंगा। कॉलेज में मेरे कुछ गिने चुने ही दोस्त है मैं ज्यादा लोगों से कुछ संपर्क नहीं रखती थी मैं जब भी अपने कॉलेज जाती तो मुझे सिर्फ पढ़ाई से मतलब रहता था और मैं सीधे घर आ जाती थी, राजेश भैया भी वापस आ चुके थे और उन्होंने मुझे फोन करके कहा कि मैं आ चुका हूं मैंने भैया से कहा भैया मैं जिस दिन मैं आपसे मिलने आउंगी उस दिन मैं आपको फोन कर दूंगी, वह कहने लगे ठीक है तुम मुझे फोन कर देना। मैं कुछ समय बाद राजेश भैया को मिलने के लिए घर पर चली गई, मैं जब उनसे मिलने के लिए घर पर गई तो उस दिन वह घर पर ही थे।

वह मुझे कहने लगे आओ शगुन काफी समय बाद तुम घर पर आई हो मैं तुम्हारे लिए चाय बना देता हूं। मैंने राजेश भैया से कहा नहीं भैया आप बैठी जाईए मै आपके लिए चाय बना देती हूं। मैंने उनके लिए चाय बना दी हम दोनों साथ में बैठकर चाय पीने लगे। वह मुझसे कहने लगे तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है मैंने उन्हें कहा बस पढ़ाई तो ठीक ही चल रही है। हम दोनों साथ में बैठे हुए थे हम दोनों ने चाय पी ली थी और एक साथ एक सोफे पर बैठ गए। मैंने उस दिन टाइट जींस और टीशर्ट पहनी हुई थी, मैं उनसे बिल्कुल चिपक कर बैठ गई और वह मुझे पढ़ाने लगे। वह मुझसे कहने लगे तुम्हें क्या दिक्कत आ रही है। मैंने कभी भी राजेश भैया के बारे में ऐसा नहीं सोचा था लेकिन मेरी जवानी भी पूरी तरीके से चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी। राजेश भैया ने अपने हाथों को मेरे स्तनों पर फेरना शुरू किया मेरा जोशी बढने लगा। वह मेरे स्तनों पर अपने हाथो को फेरने लगे मुझे भी बड़ा मजा आता। मै कंट्रोल से बाहर हो गई मैंने उनके होठों को चुसना शुरू किया।

मैंने जैसे ही उनके होठों को चुमा तो उन्हें भी अच्छा लगा उन्होंने मेरी टीशर्ट को उतार दिया। वह मेरे स्तनों को अपने हाथों से दबाने लगे और मेरे स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया मेरे स्तनों का जमकर रसपान किया। जब उन्होंने मेरी जींस को उतारा तो उन्होंने मेरी योनि को भी काफी देर तक चाटा जैसे ही उन्होंने अपने मोटे लंड को मेरी योनि पर रगडना शुरू किया तो मैं उत्तेजीत हो गई। मुझे बहुत दर्द महसूस होने लगा मेरी योनि से खून बहने लगा लेकिन वह जिस तेजी से मुझे चोद रहे थे मुझे भी बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। मैं भी उनका पूरा साथ दे रही थी जैसे ही उनका वीर्य मेरी योनि के अंदर प्रवेश हो गया तो मुझे बहुत ही अच्छा महसूस हुआ। हम दोनों को एक दूसरे को देखकर शर्म आने लगी थी लेकिन अब हमारे बीच में यह सब हो चुका था मेरी सील राजेश भैया ने तोड दी थी। उस दिन मै पढ़ाई भी ना कर सकी और घर चली गई लेकिन जब भी मैं राजेश भैया से कुछ पूछने जाती तो वह मुझे चोदा करते।

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