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अपनी योनि में पहली बार किसी का लंड लिया

मेरा नाम ललिता है मेरी उम्र 22 वर्ष है, मैं बचपन से ही अपने माता पिता के साथ विदेश में ही रही हूं और मेरी पैदाइश भी विदेश में ही हुई है। मुझे मेरे दादा दादी से मिलने का बड़ा मन होता है और मैं हमेशा ही अपने मम्मी पापा को कहती हूं कि हम लोग दादा दादी से मिलने के लिए कब जा रहे हैं, वह मुझे हमेशा ही कहते हैं कि बस कुछ दिनों बाद हम लोग उनसे मिलने के लिए जा रहे हैं लेकिन ना जाने वह समय कब आएगा जब मैं अपने दादा दादी से मिलूं। मैंने जब अपने माता पिता को कहा कि अब मैं बड़ी हो चुकी हूं, आप लोगो ने मुझे काफी समय से मेरे दादा दादी से भी नहीं मिलाया है, क्या मैं अकेली ही उनसे मिलने के लिए चली जाऊं। मेरे पापा कहने लगे तुम हमें कुछ वक्त दो यदि हम लोग अपने काम से छुट्टी नहीं ले पाते हैं तो तुम अकेली ही उनसे मिलने चले जाना। मेरे माता-पिता बहुत ज्यादा व्यस्त रहते हैं और वह मेरे लिए भी ज्यादा समय नहीं निकाल पाते, मैं घर में इकलौती हूं इसलिए मुझे हर चीज उनसे पूछकर करनी पड़ती है।

कुछ दिनों बाद ही मैंने अपने पिताजी को पूछा तो वह कहने लगे कि यदि तुम्हे तुम्हारे दादा दादी से मिलने जाना है तो तुम चली जाओ क्योंकि मुझे तो छुट्टी नहीं मिल पा रही है और ना ही तुम्हारी मां आ सकती है इसलिए तुम अकेली ही उनसे मिलने के लिए चली जाओ। मेरे पापा ने मेरी फ्लाइट की टिकट करवा दी, मैं अब उनसे मिलने के लिए दिल्ली चली गई। मैं जब फ्लाइट में थी तो फ्लाइट में ही मेरी मुलाकात रोहित से हुई,  रोहित भी दिल्ली का ही रहने वाला है, वह मेरे बगल में ही बैठा हुआ था इसलिए हम दोनों बात कर रहे थे। वह मुझसे पूछने लगा तुम दिल्ली किस से मिलने जा रही हो, मैंने उसे बताया कि वहां पर मेरे दादा और दादी रहते हैं, मैं उनसे काफी समय से नहीं मिली हूं इसलिए उनसे मिलने के लिए मैं जा रही हूं। रोहित के साथ बात कर के मुझे अच्छा लग रहा था और मैंने भी रोहित से कहा कि क्या तुम यहीं पर काम करते हो, वह कहने लगा हां मैं पिछले 2 वर्षों से यहीं काम कर रहा हूं और मेरा घर दिल्ली में है, मैं अपने माता पिता से मिलने के लिए दिल्ली जा रहा हूं, कुछ दिन मैं दिल्ली में ही रुकने वाला हूं। रोहित के साथ बात करना मुझे अच्छा लग रहा था और मुझे ऐसा भी लग रहा था जैसे वह भी मुझसे बात कर के अच्छा महसूस कर रहा है।

जब हम लोग दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे तो रोहित मुझसे कहने लगा तुम मेरे साथ ही चलो, हम लोग एक ही कार में चल लेते हैं और उसके बाद मैं तुम्हें छोड़ते हुए वहां से अपने घर निकल जाऊंगा। मुझे भी लगा चलो मुझे कंपनी मिल जाएगी और मेरा भी सफर कट जाएगा क्योंकि एयरपोर्ट से दादा दादी का घर काफी दूर है। हम दोनों कार में बैठे हुए थे, तो उस वक्त मैंने रोहित का नंबर ले लिया, रोहित मुझे कहने लगा यदि तुम्हारा कहीं घूमने का मन हो तो तुम मुझे बता देना, हम दोनों ही घूमने के लिए चल पड़ेंगे। मैंने उसे कहा कि कुछ दिनों तक तो मैं दादा और दादी के साथ रहूंगी लेकिन उसके बाद हो सकता है शायद मैं घूमने का प्लान बना लूं। जब यह बात मैंने रोहित से कहीं तो वह कहने लगा ठीक है, तुम मुझे बता देना, यदि तुम्हारा घूमने का मन हो तो तुम मुझे फोन कर देना। हम दोनों सफर में बातें कर रहे थे और मुझे मालूम ही नहीं पड़ा कब दादा और दादी का घर आ गया, जब मैं वहां उतरी तो मैंने रोहित से हाथ मिलाते हुए कहा ठीक है हम लोग दोबारा मिलते हैं और मैं तुम्हें फोन कर दूंगी। रोहित उसके बाद वहां से चला गया और जब मैं अपने दादा दादी से मिली तो वह लोग मुझसे मिलकर बड़े खुश हुए और कहने लगे कितने सालों बाद तुम आ रही हो, तुम्हारे माता-पिता कहां है,  मैंने कहा कि वह लोग तो नहीं आए लेकिन मेरा आप लोगों से मिलने का बड़ा मन था तो मैं चली आई। मेरे दादा दादी मुझसे मिलकर बहुत खुश थे और उन्होंने मुझे गले लगा लिया, वह कहने लगे हमें बहुत ही खुशी हो रही है कि तुम हमें मिलने के लिए आई, अब हम लोग बूढ़े भी हो चुके हैं और हमें भी किसी का तो सहारा चाहिए। मेरे पिताजी घर में एकलौते हैं इसीलिए मेरे दादा जी ने मुझसे यह बात कही, मैंने उनसे कहा कि मैं अब आपसे मिलने के लिए आती रहूंगी।

मेरे दादा दादी बहुत खुश थे और उन्होंने उस दिन मुझे कहा कि तुम हमारी कितनी चिंता करती हो, हमें बहुत अच्छा लगा। मैंने अपने दादा दादी के साथ काफी अच्छा समय बिताया और कुछ दिनों तक मैं उनके साथ ही थी। मेरे दादा दादी भी बहुत खुश थे और मैं उन्हें अपने साथ घुमाने के लिए भी ले गई। मुझे काफी दिन हो चुके थे और मेरी मम्मी ने भी मुझे फोन किया और कहने लगी तुम वापस कब आ रही हो, मैंने उन्हें कहा कि अभी मैं कुछ दिन और दादा दादी के साथ समय बिताना चाहती हूं उसके बाद ही मैं वापस आऊंगी। मेरी मम्मी को भी कोई आपत्ति नहीं थी और फिर एक दिन मुझे रोहित का फोन आया वह कहने लगा तुम तो मुझे भूल ही गई, मैंने उसे कहा नहीं मैं तुम्हें नहीं भूली हूं लेकिन मैं दादा और दादी के साथ बहुत ज्यादा एंजॉय कर रही थी। मैंने उससे कहा मैं तुम्हें कल मिलती हूं, वह कहने लगा ठीक है हम लोग कल मिलते हैं। अगले दिन जब मैं रोहित से मिली तो रोहित मुझसे मिलकर बहुत खुश था हम दोनों ही एक रेस्टोरेंट में बैठे हुए थे। हम दोनों ने काफी देर तक बात की उसके बाद वह मुझे अपने साथ अपने घर ले गया। जब मैं रोहित के साथ उसके घर गई तो रोहित ने मुझे कसकर अपनी बाहों में ले लिया  और अपनी गोद में मुझे बैठा लिया।

मैंने रोहित से कहा तुम यह क्या कर रहे हो। वह कहने लगा कुछ भी तो नहीं कर रहा लेकिन मेरा भी मन उत्तेजित होने लगा था और रोहित का लंड मेरी बड़ी बड़ी गांड से टकराता तो मुझे बड़ा अच्छा लगता। मैंने उसे कहा कि तुम अपना लंड मुझे दिखाओ उसने जैसे ही अपने लंड को अपनी जींस से बाहर निकाला तो मैंने तुरंत ही उसके लंड को अपने मुंह में समा लिया और अच्छे से सकिंग करने लगी, मैंने काफी देर तक उसके कड़क और मोटे लंड को अपने मुंह में समा कर रखा और अच्छे से सकिंग किया। जब उसका पानी निकल गया तो उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए, जब उसने मेरी नेट वाली पैंटी ब्रा देखी तो मै और ज्यादा उत्तेजित हो गया। उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और मेरी पैंटी को बीच में से फांड दिया। उसने मेरी योनि पर अपनी उंगली को लगाया तो मेरी चूत से पानी बाहर की तरफ निकल रहा था। जब उसने अपनी जीभ को मेरी योनि पर टच किया तो मै और भी ज्यादा मचलने लग गई। रोहित ने जैसे ही अपने मोटे और कडक लंड को मेरी चूत मे डाला तो मुझे बड़ा दर्द महसूस हुआ मेरी योनि से खून की पिचकारी निकलने लगी यह मेरा पहला अनुभव था। कुछ देर तक मुझे दर्द हुआ लेकिन धीरे धीरे मैं उस दर्द को महसूस करने लगी तो मुझे अच्छा लगने लगा। रोहित ने जैसे ही अपने मुंह से मेरे छोटे छोटे स्तनों को चूसना शुरू किया तो मेरी चूत से पानी का रिसाव और भी तेजी से शुरू हो गया। मैंने उसे अपने दोनों पैरों के बीच में जकड़ लिया  और वह मुझे बड़ी तेजी से झटके दे रहा था। जब उसका वीर्य पतन हुआ तो मुझे भी बहुत अच्छा महसूस हुआ रोहित को भी बड़ा अच्छा लगा। उसने अब मुझे डॉगी पोज में बनाते हुए मेरी योनि के अंदर अपने कडक मोटे लंड को डाल दिया जैसे ही उसका मोटा और कड़क लंड मेरी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो मेरी चीख निकल पड़ी, मैं बड़ी तेज आवाज में चिल्लाने लगी लेकिन वह मुझे बड़ी तेज गति से चोद रहा था। जिस प्रकार से उसने मुझे झटके दिए मैं बिल्कुल भी उन झटको को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और हम दोनों ही कुछ देर बाद झड गए। रोहित ने अपने लंड को मेरी योनि से बाहर निकाला तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस हो रहा था और मैंने रोहित को गले लगा लिया। हम दोनों ने एक दूसरे को काफी देर तक स्मूच किया मुझे रोहित का लंड अपनी योनि में लेकर एक अलग ही तरीके की अनुभूति हुई।

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